2022 का ही क्यों 2018 और 2016 की भी FSL जांच करवा लो हजारों की संख्या में फर्जी मिलेंगे,माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल जी एक जांच ये भी करवा दो बहुत गड़बड़ियां मिलेगी।।
सबसे ज्यादा फर्जी REET 2018 में 54000 अध्यापकों की भर्ती में लगी हुई जो पहले REET के फार्म में ओर्जिनल बाद में शिक्षा विभाग के फार्म में 97% तक की डिग्री लगी हुई है और सबसे बड़ी बात ये उन यूनिवर्सिटी से प्राप्त की हुई डिग्रियां है जिनको वर्तमान सरकार ने फर्जी साबित कर दिया है और लोग उन्हें डिग्री के बेस पर नौकरी कर रहे हैं।
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार क���या था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम य�� हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की ��ूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp
जी, विशेष बच्चों के विशेष शिक्षकों की बहुत आवश्यकता है।।
विशेष शिक्षा में सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती आखिरी बार 2016 में हुई थी। पिछले 10 साल से कोई भर्ती नहीं!
वर्तमान में 863 पद खाली पड़े हैं, जिससे राज्य के हजारों दिव्यांग बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।
युवाओं के हित में, विशेष बच्चों के भविष्य के लिए अब भर्ती प्रक्रिया शुरू करें!
#सेकंड_ग्रेड_विशेष_शिक्षक_भर्ती_करो
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।
समस्या की ज��़: 70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
पारदर्शिता के लिए आवश्यक कदम
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित ���भ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जा��साजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी सरकार महंगाई ने कमर तोड़ रखी है, हर चीज के दाम आसमान छू रहे हैं।
नया कर्मचारी घर चलाने के लिए पूरा वेतन चाहता है, न कि आधा-अधूरा।
सरकार 100% काम लेती है, तो 100% वेतन देना उसका फर्ज है।
'Equal pay for equal work' सिर्फ किताबों में नहीं, हकीकत में लागू होना चाहिए!
#प्रोबेशन_में_पूर्ण_वेतन
@skbishnoi164@pantlp@DainikBhaskar@manojpehul@vinodmittal9 1/5
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है।
@skbishnoi164@pantlp@DainikBhaskar@manojpehul@vinodmittal9 1 /4 जाना 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक
@skbishnoi164@pantlp@DainikBhaskar@manojpehul@vinodmittal9 1/3 REET और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
पारदर्शिता के लिए आवश्यक कदम
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया
@skbishnoi164@pantlp@DainikBhaskar@manojpehul@vinodmittal9 समस्या की जड़: 70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी त���ीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और
@skbishnoi164@pantlp@DainikBhaskar@manojpehul@vinodmittal9 REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपह���ल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।
समस्या की जड़: 70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को ��ेरिट से बाहर कर दिया।
पारदर्शिता के लिए आवश्यक कदम
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।
समस्या की जड़: 70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
पारदर्शिता के लिए आवश्यक कदम
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में न���म्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्��र पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा स��� बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp
जी,
विशेष शिक्षा में सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती आखिरी बार 2016 में हुई थी। पिछले 10 साल से कोई भर्ती नहीं!
वर्तमान में 863 प��� खाली पड़े हैं, जिससे राज्य के हजारों दिव्यांग बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।
युवाओं के हित में, विशेष बच्चों के भविष्य के लिए अब भर्ती प्रक्रिया शुरू करें!
#सेकंड_ग्रेड_विशेष_शिक्षक_भर्ती_करो
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वव���द्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।
समस्या की जड़: 70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
पारदर्शिता के लिए आवश्यक कदम
सरकार और शिक्षा विभाग को इस ���िशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डि��्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारको�� को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
प्रोबेशन पीरियड परीक्षा नहीं, बल्कि सेवा की शुरुआत है।
नए कर्मचारी उत्साह से काम करते हैं, लेकिन अधूरे वेतन से मनोबल टूटता है।
एमपी हाईकोर्ट ने भी कहा - प्रोबेशन में वेतन कटौती अवैध है!
अब समय है राज्य सरकार भी ये न्याय दे।
#प्रोबेशन_में_प��र्ण_वेतन
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल जी शर्मा विशेष शिक्षा मे सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती 2016 मे हुई थी इसके बाद पिछले दस सालों में भर्ती नहीं आई है।
विशेष बच्चों के लिए शिक्षण व्यवस्था के लिए ये बहुत जरूरी हैं,वर्तमान में 863 पद खाली होने के बावजूद भी भर्ती जारी नहीं हो पा रही हैं
राज्य के हज़ारों दिव्यांग विद्यार्थी शिक्षा से वंचित हो रहे आप संज्ञान लेकर युवाओं हित और विद्यार्थियों के हित में फैसला करें।।
#सेकंड_ग्रेड_विशेष_शिक्षक_भर्ती_करो
@BhajanlalBjp