युद्ध चल रहा था,
धर्म के लिए ,
अब देखें -
तभी कौरवो ने रचा चक्रव्यूह भयंकर
आने वाला था समय प्रलायंकर,
वीरता के चरम पर पहुँच,
धीर अभिमन्यु बोला मै कर सकता हूँ, चक्रव्यूह को चिन्न - भिन्न!
धर्मराज ने हामी भरी,
सामने क्षितिज सी कौरव सेना थी खड़ी,
अभिमन्यु के विराट कर्म से,
आदरणीय @dm_vaishali , कुछ स्थानों पर अभी भी भीषण गर्मी का प्रकोप देखा जा सकता है यद्यपि विद्यालयो को पुनः उसी समय से चलाया जा रहा है, सविनय निवेदन है की पुनः दिनांक 23/06/2025 से 24/06/25 तक मोर्निंग कर दिया जाय, सुबह सात से दस बजे तक ।
आदरणीय @dm_vaishali , कुछ स्थानों पर अभी भी भीषण गर्मी का प्रकोप देखा जा सकता है यद्यपि विद्यालयो को पुनः उसी समय से चलाया जा रहा है, सविनय निवेदन है की पुनः दिनांक 23/06/2025 से 24/06/25 तक मोर्निंग कर दिया जाय, सुबह सात से दस बजे तक ।
संसार के किसी झरोखे से,
आपको देख रहा है कोई,
कब निंद्रा ग्रहण करते हो,
कब आँखें मसल कर जगते हो,
कब लोचनो को बंद कर
चिंता मे विश्व भ्रमण करते हो,
कब मृत्यु से लरते हो
कब खर्चे से डरते हो,
जाँच से कम्पित हो
कुंठित तक होते हो,
आकाश मे घंटो देख,
मन मे खुदको निशब्द पाते हो!
सांय - सायं सी बहती हर्षित हवा,
अंतर्मन को चीरती सींचती, देती दवा,
हो सावन - भादो - माघ - पुष,
गाँव रूपी इस स्थायी स्वर्ग मे सभी खुश ।
- उत्सव( लेखनी )
नहर डगर फिर रास्ता फिर ठहर,
कोयल, काक और ललित मधुर प्रहर,
खेते फसले लादे घूम घूम धूम धूम रही ,
चाहे हो गेहूँ, चाऊर या खैनी ही सही!
खुद मे एक काव्य लपेटा यह स्थान,
अलंकार अलंकृत मनोरम ठंडी इसकी पहचान
जहाँ तहाँ तरु की लंबी रमणीय कतारे,
ढो रहे वे सुंदर सुचर समर शीतल सितार