"यत् सुखं सेवमानोपि धर्मार्थाभ्यां न हीयते।
कामं तदुपसेवेत न मूढव्रतमाचरेत्।"
अर्थात - "व्यक्ति को यह छूट है कि वह न्यायपूर्वक ओर धर्म के मार्ग पर चलकर इच्छानुसार सुखों का भरपूर उपभोग करे, परंतु उनमें इतना आसक्त न हो जाए कि अधर्म का मार्ग पकड़ ले ।"
#WednesdayThoughts
"चलें हम प्रेरित करें बिहार !" #LetsInspireBihar के प्रथम वर्षगांठ पर संजीव मुकेश जी द्वारा रचित "बिहार गौरव गीत" साझा कर रहा हूँ ! आइए, मिलकर प्रेरित करें बिहार !
"जीवन्तं मृतवन्मन्ये देहिनं धर्मवर्जितम् ।
मृतो धर्मेण संयुक्तो दीर्घजीवी न संशयः ॥"
अर्थात - "धर्महीन मनुष्य भले जीवित प्रतीत होता हो, परंतु वास्तविक रूप में वह मृतप्राय ही है । धर्मयुक्त मनुष्य मर कर भी दीर्घायु रहता है, इसमें कदापि संदेह नहीं है ।"
#ThursdayThoughts
Wish to Express Heartfelt Gratitude towards my Alma Mater @IITKanpur for the Prestigious #SatyendraKDubey Award - A Rare Recognition which not just makes one feel Proud, but also embeds a Deeper Sense of Responsibility towards the Highest Values of #Integrity that it Represents !