अबकी जब हम मिलेंगे तो...
अंकित कर दूँगा एक चुम्बन
तुम्हारे हाथों पर, तुम्हारे थके हारे पैरों पर
जो न जाने कितनी सरहदें पार करके
लेकर आते हैं तुम्हें मेरे करीब...
संभवतः इससे
धुल जाये हृदय का तमाम विषाद
और मेरे मन का समस्त प्रेम
घुल जाये तुम्हारे हृदय की गहराई में...!
बारिशें आती हैं तो
हम एक बार भीगते हैं
या दो बार
फिर कहीं सूखे में खड़े
चुपचाप उसे बरसते देखते हैं
प्यार भी हम
एक बार ही करते हैं
या दो बार
फिर चुपचाप
एक इंतज़ार में खड़े
संसार को प्यार करते देखते हैं।