ये क्या बात होती है कि छात्रों का मुद्दा सिर्फ CJP उठाएगी या AAP उठाएगी?
छात्रों का मुद्दा तो छात्रों का मुद्दा होता है ?
सीधे सीधे ये बोलिए कि पर्दे के पीछे से पंजाब और गुजरात चुनाव के नतीजों पर असर डालने के लिए CJP का निर्माण हुआ AAP नेकिया, अब जब राहुल गांधी जी छात्रों के हित की बात कर रहे तो आपकी खीझ साफ़ दिख रही।
दिल्ली पुलिस द्वारा CJP प्रोटेस्ट के दौरान हिरासत में लिए गए लगभग 3000 छात्र-छात्राओं तथा युवाओं और महिलाओं पर बर्बर लाठी चार्ज के बाद दोपहर 2 बजे से अब तक विभिन्न थानों और स्टेडियमों में जानवरों की तरह बिना खाना और पानी गिरफ्तार रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अन्यायपूर्ण है।
क्या छात्राओं और महिलाओं को इतने रात तक पुलिस स्टेशनों और स्टेडियम में रखना क़ानून का मख़ौल उड़ाना नहीं है?
मोदी जी अब और कितना नीचे गिरोगे ?
लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध करना अपराध नहीं है।
मैं दिल्ली पुलिस से मांग करता हूँ कि सभी युवाओं को तत्काल रिहा किया जाए और उनके संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाए।
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
साज़िश वैसी ही थी जैसा मैंने कहा था पहले आप के इन्फ़्लुएंसर राहुल गांधी को बुलायेंगे वो नहीं आयेंगे फिर केजरीवाल को बुलाया जाएगा वो आयेगा . छात्रों में संदेश राहुल को बच्चो की चिंता नहीं . जिस ने भी स्क्रिप्ट लिखी काफ़ी कमज़ोर लिखी खैर अब मुझे गाली देनी हो तो वेरिफाइड वाले देना नार्मल भक्त दूर रहे , चलो बनाओ पैसा
मुझे अच्छी तरह से याद है कि अन्ना मूवमेंट के समय भी कई दोस्त छूट गए थे।
सीधा ताना आता था कि रीढ़ वाले सब कलाकार, सेलिब्रिटी वगैरह वगैरह समर्थन दे रहे हैं, तुम क्यों ख़िलाफ़ हो?
सब कहते थे- मुद्दा सही है न? कोई उठाए क्या फ़र्क़ पड़ता है?
मैं कहता था जितना ज़रूरी मुद्दे का सही होना है उससे ज़्यादा ज़रूरी उठाने वालों का वरना तो तानाशाहों ने भी अमन की बात की है। अमरीका ने लोकतंत्र का मुद्दा उठाकर कई जगह सरकारें पलटी हैं। यह भी कि भ्रष्टाचार अपने आप में कोई मुद्दा है ही नहीं।
वर्षों बीते, कई दोस्त वापस आए यह कहते कि तुम सही कहते थे। कई दोस्त उदास हुए आंदोलन से लेकिन जुड़ नहीं पाये फिर किसी न किसी वजह से।
आज भी मुद्दा क्या है? धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा और उनकी जगह सोनम वांगचुक को शिक्षामंत्री बनाए जाने की माँग भी ☺️
यह मेरे लिए मुद्दा है ही नहीं। प्रधान की जगह कोई और, यहाँ तक कि सोनम भी शिक्षामंत्री बन जायें तो कुछ बदलने वाला नहीं। नई शिक्षा नीति का समर्थन तो वह कर ही चुके हैं बाक़ी क्या नया कर देंगे? उस परीक्षा संस्था को भंग करने की माँग तक नहीं है जिसके बाद लगातार पेपर लीक हुए हैं।
आज कांग्रेस महासचिव ने समर्थन दिया उन्हें, कल राहुल गांधी जाकर समर्थन दे आयें, परसों तुषार गांधी चले जायें या कोई और, मेरा स्टैंड एकदम साफ़ है - उन्हें आंदोलन करने का हक है, ज़रूर करें। लोगों को समर्थक करने का हक़ है, ज़रूर करें। उन्हें ज़िंदा रहने का हक़ है, अनशन तोड़ना चाहें तोड़ दें।
लेकिन इन सबके साथ मुझे वह कहने का हक़ है जो मुझे सही लगता है। यह हक़ अन्ना आंदोलन के समय भी था और उसे फ्रॉड आंदोलन कहा था, आज भी है और इसे फ्रॉड आंदोलन कह रहा हूँ।
हाँ न किसी से दोस्ती तोड़नी है अपनी तरफ़ से न ज़्यादा बहस करनी है। जिसको जो सही लगे कहे, करे। यही लोकतंत्र है 🙏
अभिजीत दीपके ने फर्स्ट डे से कॉक्रोच आंदोलन से कांग्रेस को जानबूझकर दूर रखा, शुरुआत में ही "नो बीजेपी" के साथ "नो कांग्रेस" प्रचारित किया गया, दीपके राहुल गांधी के विरोध में लिखता ही रहा है। और समय समय पर अपने इंटरव्यू और भाषणों में उसने कांग्रेस को डिसक्रेडिट करने का काम ही किया है जैसे कि विपक्ष निकम्मी है और उस निकम्मी विपक्ष और सरकार से जनता को मुक्ति दिलाने के लिए सर दीपके का उदय हुआ है।ऊपर से दीपके ने अपनी लीडरशिप में एक भी आदमी कांग्रेस विचारधारा से नहीं आने दिया। एक भी लीडर पर ये आरोप नहीं लगे कि वो कांग्रेस से कनेक्टेड है। सब पर सिर्फ़ ये आरोप लगे कि वे आप पार्टी से डायरेक्टली-इनडायरेक्टली कनेक्टेड हैं।
देश की अलग अलग विचारधाराओं से आए हुए छात्रों के आंदोलन को fully कंट्रोल करने के लिए जानबूझकर पूरी लीडरशिप एक ही पार्टी (आप) के आसपास से ली गई। वो भी मनोनीत तरीक़े से ना कि लोकतांत्रिक तरीक़े से। जिससे कांग्रेस में अविश्वास की स्थिति पैदा हुई। कांग्रेस के लिए चक्रव्यू की स्थिति हो गई कि क्या वो ऐसे आंदोलन को सपोर्ट करे जिसकी लीडरशिप उसकी विरोधी पार्टी से जुड़ी हुई है। इसलिए कांग्रेस दूर हो गई। जबकि कांग्रेस हर उस आदमी को सपोर्ट करती रही है जो एंटी-एस्टेब्लिशमेंट है। लेकिन इतने बड़े ऑनलाइन आंदोलन से कांग्रेस को छिटका दिया गया। ये अभिजीत दीपके की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण हुआ। उसने इस आंदोलन को व्यापक होने के रास्ते, इस आंदोलन को अपना प्राइवेट लिमिटेड बनाने के चक्कर में बंद कर दिये। अभिजीत दीपके ने कॉक्रोच आंदोलन को पहले दिन से अपने ऊपर केंद्रित कर लिया था।
दीपके शुरू से ही मैं मैं मैं मैं मैं करके पूरे आंदोलन पर अकेला बैठ गया। मुझे एयरपोर्ट लेने आओ, मैं पुलिस स्टेशन जाऊँगा, अकेले मैं इंटरव्यू दूँगा, मैं परमिशन माँगूँगा, मैं अकेले आंदोलन घोषित कर दूँगा, और तीन बजे भाग जाऊँगा। कोई कमिटी नहीं, कोई डेमोक्रेसी नहीं। कोई सलाहकार संगठन नहीं। सब मैं मैं मैं मैं। दीपके को पहले दिन लगा वे पहले दिन से ही नेपाल के बालेन शाह बनने वाले हैं। इसलिए उन्होंने अपने ही लोगों को भी सिर्फ़ "यस मैन" भूमिका में रखा। इस आंदोलन को इतना सीमित रखने के लिए कोई और नहीं सिर्फ़ दीपके ज़िम्मेदार है। फिर भी इस हरामी व्यवस्था के ज़िम्मेदार शिक्षा मंत्री को इस्तीफ़ा देना चाहिए। वहीं वांगचुक अपनी मूर्खता का शिकार ख़ुद बने हैं। जो दिल्ली के सभी लिबरल्स और पत्रकारों को दिख रहा था कि दीपके अकेले इस आंदोलन का फूफा बनना चाह रहा है वो वांगचुक को नहीं दिखा। इसलिए उनकी राजनीतिक अज्ञानता पर हंसा जाए कि दुखी हुआ जाए कुछ नहीं कह सकते। कांग्रेस से बाद में सपोर्ट में चाहा गया लेकिन ट्रस्ट दिलाने के लिए कुछ नहीं किया गया। बिना रिप्रेजेंटेंशन एंड बिना चेक्स एंड बैलेंस के देश की सबसे बड़ी पार्टी इन्हें अपना सपोर्ट दे दे। कैसी बात है।
जब आंदोलन पूरी तरह फ्लॉप हो गया, जब सौ-दो सौ लोगों से ज़्यादा इकट्ठे नहीं हुए तब वांगचुक की एंट्री करा दी गई। वांगचुक किसी और की नहीं बल्कि अपनी मूर्खता का शिकार ख़ुद बने हैं। जो दिल्ली के सभी लिबरल्स और पत्रकारों को दिख रहा था कि दीपके अकेले इस आंदोलन का फूफा बनना चाह रहा है वो वांगचुक को नहीं दिखा। इसलिए उनकी राजनीतिक अज्ञानता पर हंसा जाए, कि दुखी हुआ जाए, कुछ नहीं कह सकते।
आज कांग्रेस के लीडर्स से कहा जा रहा है कि वे कॉक्रोच आंदोलन को सपोर्ट करें। जबकि ये नहीं पूछा जा रहा कि आख़िर इस आंदोलन के दूध में मक्खी का काम किसने किया? आख़िर क्या कारण रहा कि देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी को विश्वास में लेने का काम नहीं किया गया? ना उससे रिप्रेजेंशन लिया गया। कांग्रेस को ट्रस्ट में लेने का काम किसने नहीं किया? किसने कांग्रेस को डिसक्रेडिट किया? कांग्रेस को अपने अंदर लाने के लिए कॉक्रोच आंदोलन की लीडरशिप ने क्या किया? सिवाय पत्र लिखने के? क्या उन्होंने कांग्रेस को कहा कि आप लीडरशिप में आइए? आप लीड करिए? या आपको हम रिप्रजेंटेशन देते हैं? बिना रिप्रजेंटेशन एंड बिना चेक्स एंड बैलेंस के देश की सबसे बड़ी पार्टी का सपोर्ट चाहिए, ये अपील है या सिर्फ़ चालाकी?
सच ये है कि ये आंदोलन आज देश में उबाल मार रहा होता। लोग सड़कों पर होते अगर इस आंदोलन में अलग अलग विचार के लोगों को आने दिया गया होता। ख़ासकर एक कमिटी बनाई गई होती। जिसमें हर पार्टी और विचार के लोग होते। जिससे अलग अलग पार्टी से आने वाले लोगों का इस आंदोलन की लीडरशिप में विश्वास क़ायम होता। लेकिन अभिजीत दीपके ने वायसराय बनना चुना। और आंदोलन फ्लॉप हो गया।
आज जो भी सपोर्ट आ रहा है वांगचुक की वजह से आ रहा है। दरअसल ह्यूमैनिटी की वजह से आ रहा है कि एक आदमी मर ना जाए। वरना आंदोलन में एक डेमोक्रेटिक लीडरशिप क्रिएट किए बिना जुड़के वांगचुक ने मूर्खता का ही काम किया है। छात्रों और देश के एक बड़े आंदोलन को फ्लॉप करने में दीपके एकमात्र कारण है। उसकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने छात्रों के आंदोलन को "अविश्वास" से भर दिया।
फिर भी मेरा मानना है इस हरामी सिस्टम पर बैठे शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की लड़ाई में हम साथ दें। मुझे मालूम है इससे कुछ नहीं होगा इससे अधिक मूर्खतापूर्ण लड़ाई कुछ नहीं है। मगर फिर भी साथ दें। क्योंकि वांगचुक को बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है। वांगचुक ने मूर्खता की मगर उनकी इंटेंशन अच्छी थी। दीपके ने होशियारी की मगर उनकी इंटेंशन घटिया थी। वांगचुक से असहमत होते हुए भी मैं उन्हें सपोर्ट करने के पक्ष में हूँ। हम और आप इस बात को रेखांकित करते हुए कि कॉक्रोच आंदोलन के दीपके ने इस आंदोलन के डेमोक्रेटिक स्वरूप को जन्म लेने नहीं दिया और पूरा अकेले मलाई मारने के चक्कर में इस आंदोलन के प्रति अविश्वास और अश्रद्धा पैदा कर दी इसके बावजूद हम इस आंदोलन को सपोर्ट करते हुए। एक अच्छी इंटेंशन के साथ।
कॉक-रोच जनता पार्टी पर मेरी त्वरित टिप्पणी
जिस तरह से कई गोदी एंकर कोक-रोच जनता पार्टी को स्पेस दे रहे हैं, ये उनकी औक़ात के बाहर है कि 'सिस्टम' के इशारे के बिना वे ऐसा करें।
ये विपक्ष के स्पेस को नकार कर ध्यान भटकाने की एक वृहत्तर साज़िश हो सकती है। वैसे भी 'ऑनलाइन' जनता का भड़ास निकलवा कर... प्रेशर वॉल्व के तौर पर उनका इस्तेमाल कर, 'ऑनलाइन वालों को' दो मिनट में छू मंतर (ऑफ़ लाइन) किया जा सकता है। इसलिए ये कैलकुलेटेड रिस्क जैसा लगता है।
वैसे एक बात है कि अगर बोतल से जिन्न कहीं इस रूप में न निकल आए कि वापस बोतल में जाने को तैयार न हो तो सिस्टम को लेने के देने पड़ सकते हैं!
ये वीडियो मोदी की कायरता को हमेशा हमेशा के लिए दर्ज करेगा।
भारत के बुलावे पर “मिलन युद्धाभ्यास 2026” के लिए ईरान ने अपना जहाज भेजा था।
महामहिम राष्ट्रपति जी के सामने इस जहाज की खूबियाँ बताई गई।
इस जहाज को अमेरिका ने मार गिराया जिसमें 100 से अधिक नाविक मारे गये, हमारे मेहमान मारे गये और मोदी ख़ामोश है।
मोदी जी दुनिया आपको हमेशा एक कायर डरपोक और अमेरिकी पिछलग्गू के रूप में याद करेगी।
In a huge offence to India, US sunk Iran's IRIS Dena at the edge of Indian waters near Sri Lanka. This ship was returning from a naval exercise in India. 101 missing, 78 injured (32 critical), 1 dead.
Sri Lanka aids rescue. But what is India doing? Where is our regional clout?
लोगों को अब तो समझ आना चाहिए कि बेस्ट ब्रेन साइंस में IIT ‘s, टॉप सरकारी मेडिकल कॉलेज , NLU s और सामाजिक विज्ञान में JNU,BHU, AMU और मैनेजमेंट में IIMs मे जाते .. जो इनमें पढे वो तो इज्जत जानते .. जो नहीं पढ पाए ,कम से कम शिक्षा संस्थाओं और उनके छात्रों को इज्जत करना तो सीखो .. प्राइवेट शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थान कभी सरकारी का टक्कर योग्यता औौर क्षमता में नहीं ले सकते ,, बाजार बाजार ही रहेगा 🙏
इतिहास में पहली बार, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा है।
आख़िर जनरल नरवणे के बयान और एपस्टीन मामले पर मोदी जी इतने घबराए हुए क्यों हैं?
प्रधानमंत्री ने देश बेच दिया है।
Epstein files में अभी और भी ख़ुलासे होंगे और अदाणी के केस के कारण मोदी ने देश के हितों के साथ समझौता किया है - राहुल गांधी
पहले झुके, फिर लेटे और फिर कहा कि मालिक थोड़ा सा निकाल लीजिए!
1. भारत के निर्यात पर 50% टैरिफ कई दशक से नहीं लग रहा है, ये ट्रंप ने हाल ही में चूड़ी टाइट करने को लगाया था क्योंकि वो जानता था कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेड सरप्लस पार्टनर हैl
2. ट्रंप ने डंडे के जोर से रूसी तेल का आयात बंद करवाया, ये उसके ट्रेड डील की Non Negotiable शर्त थी, जिसे मोदी ने सिर झुकाकर स्वीकार कर लिया।
3. अमेरिकी आयात पर 0% टैरिफ और $500 बिलियन के आयात की शर्त मानना वैसा ही है जैसे अपना बच्चा छुड़वाने के लिए अपहरणकर्ता को करोड़ों की फिरौती देना।
4. अमेरिकी खेत कई दशक से भारत का बाजार हथियाना चाह रहे थे। भारत सरकार हमारे किसानों की दीवार बनकर खड़ी थी। लेकिन ट्रंप ने पहले उस दीवार को जिप खोलकर गीला किया और अब उसपर बुलडोजर चढ़ा दिया।
नाम - अनिल कुमार "गंगवार"
भुक्तभोगी - मेडिकल के DM कोर्स में जातिगत भेदभाव
अनिल कुमार गंगवार ने पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च चंडीगढ़ में मेडिकल की सबसे बड़ी डिग्री DM में प्रवेश के लिए परीक्षा दिया जिसमें उन्हें लिखित परीक्षा में सबसे ज्यादा 43.15 नंबर प्राप्त हुआ।
लेकिन इंटरव्यू में उन्हें सबसे कम 8 नंबर दिया गया जिसके कारण उनको प्रवेश नहीं मिला।
आखिर इंटरव्यू बोर्ड में कौन से द्रोणाचार्य बैठे थे जिसने जातिगत भेदभाव करते हुए इस एकलव्य का अंगूठा काट लिया।
नए #UGCRules पर खूब वीडियो बनाने वाले @Abhinav_Pan और @shubhankrmishra की हिम्मत है कि वो इस जातिगत मेरिट हत्या पर भी एक वीडियो बना पाए???
है हिम्मत तो आवाज उठाइए...
भाजपा सरकार में आदिवासियों की ज़मीनें कौड़ियों में हड़पी जा रही है। 'डमी' बनाकर करवाई होती है, करोड़ों में बेची जाती है, और जब सवाल उठे तो सरकार के दबाव में पुलिस आदिवासी पीड़ित को ही आरोपी बना देती हैं।
भरतपुर से लेकर उदयपुर तक पूरे प्रदेश में भाजपाई सत्ता के इशारे पर जमीनें कब्जाने, लूटने और हड़पने का गिरोह संचालित है।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी, आपकी सरकार में आदिवासियों को डराकर, धमकाकर, उनकी ज़मीनें छीनने वाले भाजपाईयों पर कब कार्रवाई होगी?
उदयपुर के भुवाणा में एक आदिवासी परिवार को बंधक बनाकर उनकी 25 करोड़ की जमीन को षड्यंत्रपूर्वक हड़पना और पुलिस द्वारा पीड़ितों को ही आरोपी बना देना रसूख के दुरुपयोग की पराकाष्ठा है।
भाजपा विधायक पुष्पेंद्र सिंह और खुद को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताने वाले हेमंत शर्मा की इस मामले में भूमिका सीधे तौर पर संदेह के घेरे में है।
बाली से खास तौर पर इस केस के लिए उदयपुर डिप्टी एसपी की पोस्टिंग करवाना और सुखेर थानाधिकारी द्वारा कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करना साफ दर्शाता है कि पुलिस और सत्ता का गठबंधन भू-माफिया को संरक्षण दे रहा है।
मुख्यमंत्री जी जवाब दें कि क्या प्रदेश की पुलिस अब रसूखदारों की 'प्राइवेट फोर्स' बन चुकी है? बीते कुछ समय से कई अधिकारियों के भ्रष्टाचार की खबरें अखबारों में छपने के बाद भी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की जिससे पूरा सिस्टम निरंकुश होता जा रहा है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी विधायक व पुलिस अधिकारियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।
@RajCMO
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में आये दिन पुलिस प्रशासन द्वारा आदिवासियों पर अत्याचार किया जा रहा है।
ना कोई अपराध, ना ही कोई मुकदमा फिर भी आधी रात को बांसवाड़ा जिले के सल्लोपाट थाना पुलिसकर्मी आदिवासियों के घरों में घुसकर बहन-बेटियों के साथ हाथापाई और अभद्र भाषा का उपयोग कर युवक को थाने लाकर थर्ड डिग्री टॉर्चर किया।
भाजपा राज में अपराधी का रिश्तेदार होना अपराध है क्या ? अपराधी के रिश्तेदार को थर्ड डिग्री टॉर्चर करने का कानून किस किताब में है ?
भारतीय न्याय संहिता देश के प्रत्येक व्यक्ति पर समान रूप से लागू होती है, लेकिन यहां तो हकीकत कुछ और ही है। पुलिस की लाठी और कलम हमेशा जाति, धर्म और अमीर-गरीब को देखकर चलती है। ऐसा क्यों ?
CM @BhajanlalBjp आपके शासनकाल में आदिवासी, दलित, शोषित-वंचित पर अत्याचार चरम सीमा पर है। या तो आप इस बात से अनभिज्ञ हो या आपके संरक्षण से यह सब हो रहा है ?
@PoliceRajasthan@IgpUdaipur@PoliceBanswara@NDTV_Rajasthan@zeerajasthan_@BBCHindi@ravish_journo