अब मोदी सरकार की लूट UPI तक पहुँच गई है। “No fees on UPI” को बदलकर अब “₹2,000 तक के UPI transactions पर no fees” कर दिया गया है।
गगनचुंबी महँगाई से आम आदमी की जेब पहले ही खाली है। थोक महँगाई 10% के क़रीब है और भाजपा सरकार ने जनता पर “Digital Payments Tax” लगाकर उनकी बची-कुची, बचत को भी तबाह करने की योजना बना दी है।
मोदी सरकार का सबसे बड़ा पलटवार देखिए —
10 साल पहले नोटबंदी करके देश की अर्थव्यवस्था को झटका दिया गया। जब नोटबंदी के विनाशकारी नतीजों पर सवाल उठे, तो सरकार ने दलील दी थी कि नोटबंदी Digital Payments और Cashless Economy को बढ़ावा देने के लिए थोपी गई।
वित्त मंत्री जी ने हाल ही में संसद में कहा था कि UPI पर कोई Tax व Charges नहीं लगेंगे, पर कई ख़बरों के मुताबिक़:-
₹5,000 के transaction पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 तक की संभावित वसूली की जाएगी। क्या ये सच है?
MDR की बात करें तो सरकार को क्या यह नहीं पता कि व्यापारी पर पड़ने वाला यह अतिरिक्त बोझ आखिरकार कीमतों के जरिए आम उपभोक्ता की जेब से ही वसूला जाएगा?
महँगाई से त्रस्त जनता को राहत देने के बजाय मोदी सरकार हर रोज उसकी जेब पर डाका डालने का नया तरीका खोज रही है !!
मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है।
अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है।
सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से।
अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।
US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं।
"एक बार इंदिरा गांधी जी से पूछा गया कि उनका झुकाव लेफ्ट की ओर है या राइट की ओर...? उनका जवाब था - मेरा झुकाव न लेफ्ट है, न राइट, मैं रीढ़ सीधी रखती हूं। लेकिन मोदी जी का सिद्धांत अलग है, उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के सामने सीधे लेट जाने का फैसला किया है। उन्होंने अमेरिका को भारी मुनाफा पहुंचाने के लिए UPI पर चार्ज लगाकर हर एक भारतीय पर टैक्स थोप दिया है। मोदी जी, रीढ़ सीधी कीजिए और UPI टैक्स वापस लीजिए।"
~ राहुल गांधी जी, नेता प्रतिपक्ष
19 सितंबर को इंदौर आ रहा हूं - छात्रों से मिलने, आपको सुनने, आपसे बात करने।
अगर आप या आपके अपने education system के सताए हुए हैं और चाहते हैं कि ये हालात बदलें, तो आप जानते हैं - ‘छात्रों की गूंज’ आपकी सामूहिक आवाज़ है, बदलाव की शुरुआत करने का एक मौका है।
इस लिंक पर रजिस्टर कर बड़ी संख्या में जुड़ें: https://t.co/z4STGegsDE
शिक्षा के हर पहलू और आपके संघर्षों पर इंदौर में विस्तार से चर्चा करेंगे।
#ChhatronKiGoonj
दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की खबर बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है। कई लोगों के मलबे में दबे होने की खबर है, जिनमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई छात्र भी शामिल हैं।
मेरी अपील है कि NDRF, दिल्ली फायर सर्विस और सभी बचाव दल हर संभव प्रयास करके हर एक छात्र तक पहुँचें, घायलों को तुरंत सर्वोत्तम संभव इलाज मिले, ताकि किसी को भी बचाने में कोई कसर न छोड़ी जाए।
कांग्रेस और NSUI कार्यकर्ता मौके पर मौजूद हैं और हर संभव मदद के लिए तैयार हैं। इस मुश्किल घड़ी में हम सभी पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ खड़े हैं।
छात्रों का जीवन पहले ही संघर्षों से भरा था - अब हालात जानलेवा हैं। कॉलेज या विश्वविद्यालय में अच्छे हॉस्टल न होने के कारण छात्र PG में एक छत के नीचे 40-40 की संख्या में, अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं।
हर छात्र की जान कीमती है और उसकी रक्षा हर हाल में होनी चाहिए।
सोचिए, ऐसा क्या गुनाह किया था इन बच्चों ने कि इन्हें गोली मार दी गई?
इन्होंने सरकार से सिर्फ़ तीन चीज़ें माँगी थीं - शिक्षा, रोज़गार, और जवाबदेही।
एक छात्र के पैर की हड्डी AK 47 की गोली से टूट गई। सेना में जाकर देश की सेवा करने का उसका सपना भी उसी के साथ चला गया। दो और छात्रों के कंधों को गोली चीरती हुई निकल गई।
ये अपराधी नहीं थे। ये ग़रीब घरों के वो बच्चे थे जो अपने परिवार के सपने लेकर पढ़ने निकले थे - किसी को अच्छी नौकरी चाहिए थी, किसी को अपने घर के हालात बदलने थे।
गोली के घाव भर जाएंगे - पर जो डर इन बच्चों के भीतर बैठ गया है, उसका इलाज किस अस्पताल में होता है?
प्रधानमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी - इनकी टूटी हड्डी तो जुड़ जाएगी। क्या इनका टूटा हुआ सपना आप लौटा सकते हैं?