मैं उत्तराखंड सरकार को केतन लाल के परिवार की सभी न्यायोचित मांगों को पूरा करने के लिए 8 दिन का समय देता हूँ।
निर्धारित समय सीमा के भीतर सरकार हमारी मांगें स्वीकार नहीं की गई, तो मैं केतन लाल के परिवार के साथ देहरादून में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठूंगा।
सांसद, चंद्र शेखर आजाद जी
राम मंदिर में चंदा/चढ़ावा घोटाला में मुझे एक बात समझ नहीं आ रही है ED कहाँ है?
अख़बार में छपी खबर को आधार बनाकर विपक्षी नेताओं को महीनों तक गिरफ्तार कर रखने वाली ED तो ऐसे शांत हो गयी मानो उसका कोई वजूद ही नहीं हो!
खैर अभी तो चंदा घोटला चल रहा है! शायद इसके बाद जब करोड़ों के जमीन घोटाले पर एजेंसी शायद कुछ दखल दे
दलित का हत्यारा गिरफ्तार।
यूपी के फर्रुखाबाद में 18 जून को दलित मजदूर सोनू पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला हुआ था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस इतने दिनों बाद मुख्य आरोपी सौरभ को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं।
इस समय देश में दलित कहीं भी सेफ नहीं हैं।
बहन जी AC में क्यों बैठी हैं?
2000 के आसपास की बात है। उस समय मैं अपने गांव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था। उस समय जब भी कहीं चुनाव होता था, तो साथ पढ़ने वाले यादव बच्चे बहन जी को "चमारिन", काली *&#, जैसी कई जातिसूचक गालियां देते थे।
बहन जी के पोस्टरों पर गंदे-गंदे इशारे किए जाते, उनका नाम मुलायम सिंह के साथ जोड़कर अश्लील और जातिसूचक गालियां दी जातीं। मेरा गांव में कई जाति के लोग रहते हैं। गांव में चाय की दूकान पर राजनीतिक चर्चा के नाम पर सभी गैर दलित समुदाय के सभ्य से सभ्य लोग चाय की चुस्कीयां लेते हुए बहन जी पर अपमानजनक टिप्पणियां करते और खूब ठहाके लगाते। ये वही लोग थे, जिन्हें हम सम्मान से चाचा, बाबा.. कहकर बुलाते थे। देश में PM इंदिरा गांधी सहित कई महिलाएं CM एवं बड़ी नेता रही हैं लेकिन कोई उन्हें गाली नहीं देता था। सिर्फ बहन जी से ही इतनी नफरत क्यों थी? सिर्फ इसलिए क्योंकि वह दलित हैं।
बुरा तो लगता था, लेकिन तब हम छोटे थे। उस समय मुझमें इतना भावबोध नहीं था, लेकिन इतना जरूर पता था कि वह हमारे समाज की नेता हैं। हमारे बाबा एक पुराना नीला झंडा लेकर बसपा की सभी मीटिंगों और रैलियों में जाते थे। गांव के कुछ बड़े लोग मान्यवर साहब और बहन जी के संघर्षों के बारे में बताते थे। बाबा अपने मिट्टी के घर पर बड़े गर्व से बसपा का झंडा लगाते थे। छोटी उम्र से ही हम सब उनका नाम सुनते ही एक खास अपनापन महसूस करते थे। जब गांव में बसपा का कोई नेता आने वाला होता, तो हम सब खुशी से नाचते हुए बहन जी के पोस्टर लगाया करते थे। रास्ते से साइकिल पर जाते हुए इन पोस्टरों को देखकर बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी ठहाके लगाकर मसखरी करते थे।
एक बार यादव समाज के लोगों ने गांव में होली मिलन समारोह रखा था। उसमें तूफानी सरोज भी आए थे। उनके सामने गायक ने मुलायम सिंह और बहन जी का नाम जोड़कर मंच से एक अभद्र गीत गाया, लेकिन तूफानी सरोज सुनकर मुस्कुराते रहे, जबकि वह स्वयं दलित हैं। आज उनकी बेटी प्रिया सरोज हमारे लोकसभा क्षेत्र मछलीशहर से सांसद हैं। गांव के दलितों ने जब इसका विरोध किया तो आयोजकों ने माफी मांगी और गायक से माइक बंद करवा दिया।
वहीं, 2007 में जब बसपा की सरकार बनी, तो लोगों के बोल बदल गए। प्रेम से नहीं, डर से। अब दलितों में स्वाभिमान आ गया था। गांव में जो लोग हमारे बुजुर्गों को "रे, बे, ते" कहकर और नाम बिगाड़कर बुलाते थे, वही लोग सम्मान से नाम लेने लगे। अब वही यादव समुदाय के लोग बात-बात पर हंसते हुए तंज कसते थे कि, "अरे भाई, अब तो आप लोगों की सरकार है।" हालांकि अब ऐसा सुनकर बहुत गर्व महसूस होता था। यह सिर्फ मेरे बचपन की कुछ बातें हैं जो मुझे याद हैं। छात्रजीवन और आज का अनुभव बताने के लिए पूरी किताब लिखनी होगी।
लेकिन यह सब मैं आपको क्यों बता रहा हूं? इसलिए कि आप समझ सकें कि बहन जी और बसपा ने समाज को दिया क्या है। जिस रीलबाजी और हवाबाजी को आप संघर्ष समझते हैं, अपने बाप-दादाओं का नहीं तो कम से कम अपने बचपन का दौर याद करो और सोचो कि बहन जी ने उस समय कितना संघर्ष किया होगा। नफरत का आलम यह था कि नन्हे-नन्हे बच्चे तक उन्हें जातिगत गालियां देते थे। यह वह दौर था, जब सोशल मीडिया छोड़िए, समाज के अधिकांश घरों में पुराना हैंडसेट भी नहीं था। तुम्हें बहन जी के AC से दिक्कत है, तो जरा ईमान से बताओ, क्या अखिलेश यादव और राहुल गांधी छप्पर और घास-फूस की झोपड़ी में रहते हैं? या फिर अमित शाह ने चंद्रशेखर आजाद के टाइप-8 बंगले में AC की जगह फर्राटा पंखा लगवाया है?
ऐसा नहीं है कि बसपा में कमियां नहीं हैं। बसपा में अनेक कमियां हैं। इन कमियों के बारे में हम खुलकर लिखते भी हैं। इसलिए कई बार बसपा समर्थक भी मेरे बारे में बहुत अभद्र भाषा लिखते हैं, लेकिन हम इग्नोर करते हैं। हालांकि मैं बसपा का सदस्य भी नहीं हूं, लेकिन बसपा हमारी पार्टी है। हमारा घर है। अतः इन कमियों को लेकर मैंने कई बार बसपा के कोऑर्डिनेटरों को आगाह भी किया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप बहन जी के त्याग को गाली दें और उनका अपमान करें। वह हमारी आदर्श हैं, गुरूर है, हिम्मत है और स्वाभिमान हैं।
बसपा की गलती बस इतनी है कि उसकी कोई IT सेल नहीं है। पदाधिकारियों का मानो सोशल मीडिया से छत्तीस का आंकड़ा है। बसपा आज AI के युग में भी 90 के दशक में जी रही है। जिस दिन पार्टी और उसके पदाधिकारी सोशल मीडिया का महत्व समझ जाएंगे और युवाओं से डायरेक्ट संपर्क बना लेंगे, उस दिन सारा पासा पलट जाएगा। उम्मीद है कि बहन जी एक दिन इस पर संज्ञान अवश्य लेंगी। बाकी बहन जी पर अनर्गल टिप्पणी करने वाले लोग या तो अबोध हैं या फिर मूर्ख। जिस दिन कभी शांति से बैठकर आत्मचिंतन करेंगे, उनका सारा भ्रम दूर हो जाएगा।
क्रेडिट पोस्ट- @SurajKrBauddh
बिहार कर मशहूर बहुजन युवा लीडर "गोल्डन दास अंबेडकरवादी" हैं ये बहुत कम उम्र में ही...
बिहार में अंबेडकरवाद को मजबूत करने में इसकी विशेष भूमिका है...
इन पर मनुवादियों द्वारा 63 मुकदमें कर चुके हैं जिसमें 17 बार जेल चुके है
बिहार में कोई पिछड़ा वर्ग समुदाय के साथ कोई घटना होती है , तो मदद करने सबसे पहले पहुंचते हैं!
स्वर्ण समाज के साथ-साथ सभीलोग लोग आज भी आदरणीय बहन मायावती जी के शासन काल को याद करते हैं
मायावती जुमलेबाज तो नहीं है
2027 में बहन मायावती जी की पांच दीवार सरकार आने वाली है यह लोगों की जुबान से सुनने में मिल रहा है
"राम मंदिर दान चोरी के आरोपियों का केस नहीं लड़ना है, अगर कोई वकील लड़ेगा तो 5 लाख का जुर्माना लगेगा"
◆ अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा
#Ayodhya | Ayodhya | Ram Mandir Embezzlement | Kalika Prasad Mishra