जब औरत का जिस्म कामवासना की चाहत में सुलगता है, तब उसके पूरे जिस्म को प्यार और जबरदस्ती से चूमने, जीभ से चाटने, दांतो से कटने और खाने, नाखूनों से नोचने और बालो को पकड़ के बेरहमी से चो.दने में माहिर चुदारे मर्द साथी का समागम ही उसकी सब इच्छाओं को पूर्ण रूप से तृप्त कर सकता है, ओर जब वही मर्द उस औरत की शर्म हया की चादर उतार कर उसे रण्डी का टाइटल दे देता है जिसे वह औरत हसी खुशी स्वीकार कर लेती है, ओर अपने उस पसंदीदा मर्द से बेहया बनकर, बेशर्मी से गंदी गालियां खुद के जुबान से मांगती है, तो उसकी आंखों में लज्जा नहीं बल्कि उस मर्द के द्वारा दी गई ऐसी गलियों की लालसा होती है, ऐसी औरत बस चूदाई नहीं करती बल्कि हर पल उसमें खुद को डुबो देती है और अपने अंद��� की प्यास को बेझिझक बहने देती है।
लेकिन अगर उसका पति उसे प्यार से रण्डी कह दे या बिस्तर पर गली देदे तो वो गुस्सा हो जाती है, वही अपने पसंदीदा मर्द की जबान से निकला हर वह शब्द उसको स्वीकार होता है, जो अपने पति के मुंह से कभी नहीं सुनना चाहती है............
एक औरत सोलह श्रृंगार अपने पति के लिए करती है, लेकिन जब वो कुछ मिनट में ही ढेर होने लगे तो
मजबूरन इन ��ादाओं को अपने बदन की प्यास बुझाने के लिए अपनी लगाम किसी गैर मर्द के हाथ में देनी पड़ती है फिर वो चाहे इनकी इज्जत करे या न करे बस उससे एक ही चाहत होती है कि वो प्यास बुझाता रहे...