@fpjindia This judgment's implications go far beyond stray dogs. SC has effectively stated it will sidestep the law, ignoring the ABC Rules, 2023. This is constitutionally alarming - it signals the judiciary can openly disregard due process.
#SaveDelhiDogs2025#SaveDelhiNCRDogs
I strongly condemn the barbaric violence against Hindus, Christians, and other minorities who are getting attacked and looted by mobs in Bangladesh, which remains in a total state of chaos.
It would have never happened on my watch. Kamala and Joe have ignored Hindus across the world and in America. They have been a disaster from Israel to Ukraine to our own Southern Border, but we will Make America Strong Again and bring back Peace through Strength!
We will also protect Hindu Americans against the anti-religion agenda of the radical left. We will fight for your freedom. Under my administration, we will also strengthen our great partnership with India and my good friend, Prime Minister Modi.
Kamala Harris will destroy your small businesses with more regulations and higher taxes. By contrast, I cut taxes, cut regulations, unleashed American energy, and built the greatest economy in history. We will do it again, bigger and better than ever before—and we will Make America Great Again.
Also, Happy Diwali to All. I hope the Festival of Lights leads to the Victory of Good over Evil!
🔸एक ज्ञानवर्धक एवं भावुक दृष्टांत🔸
🔹अवश्य पढ़ें🔹
सन्तोष मिश्रा जी के यहाँ पहला लड़का हुआ तो पत्नी ने कहा, "बच्चे को गुरुकुल में शिक्षा दिलवाते है, मैं सोच रही हूँ कि गुरुकुल में शिक्षा देकर उसे धर्म ज्ञाता पंडित योगी बनाऊंगी।"
सन्तोष जी ने पत्नी से कहा, "पाण्डित्य पूर्ण योगी बना कर इसे भूखा मारना है क्या !! मैं इसे बड़ा अफसर बनाऊंगा ताकि दुनिया में एक कामयाबी वाला इंसान बने।।"
संतोष जी सरकारी बैंक में मैनेजर के पद पर थे ! पत्नी धार्मिक थी और इच्छा थी कि बेटा पाण्डित्य पूर्ण योगी बने, लेकिन सन्तोष जी नहीं माने।
श्री रतन टाटा के जीवन की सबसे बड़ी खुशी
"मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं, तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।"
यह वाक्य रतन टाटा के जीवन का वह क्षण था, जिसने उन्हें सच्चे सुख का अर्थ समझाया। जब एक टेलीफोन साक्षात्कार में भारतीय अरबपति श्री रतन टाटा से रेडियो प्रस्तोता ने पूछा, "सर, आपको जीवन में सबसे अधिक खुशी कब मिली?" तब उन्होंने एक मार्मिक जवाब दिया।
जीवन के चार चरणों में खुशी की तलाश
रतन टाटा ने कहा, "मैंने जीवन में चार चरणों से गुजरा और अंततः मुझे सच्चे सुख का अर्थ समझ में आया।"
पहला चरण धन और साधन संचय करने का था। इस दौरान, मुझे वह खुशी नहीं मिली, जिसकी मुझे उम्मीद थी।
फिर दूसरा चरण आया, जब मैंने कीमती सामान और वस्त्रों को इकट्ठा करना शुरू किया। लेकिन मुझे जल्द ही यह एहसास हुआ कि इस सुख का प्रभाव भी अस्थायी है, क्योंकि इन वस्तुओं की चमक ज्यादा देर तक नहीं रहती।
तीसरा चरण तब आया जब मैंने बड़े-बड़े प्रोजेक्ट हासिल किए। उस समय मेरे पास भारत और अफ्रीका में डीजल की आपूर्ति का 95% हिस्सा था, और मैं भारत और एशिया में सबसे बड़े इस्पात कारखाने का मालिक था। फिर भी, मुझे वह खुशी नहीं मिली, जिसकी मैंने कल्पना की थी।
चौथा और निर्णायक चरण
फिर चौथा चरण आया, जिसने मेरे जीवन की दिशा बदल दी। मेरे एक मित्र ने मुझे विकलांग बच्चों के लिए व्हीलचेयर खरीदने के लिए कहा। करीब 200 बच्चे थे। मैंने अपने दोस्त के अनुरोध पर तुरन्त व्हीलचेयर खरीदीं। लेकिन मेरे मित्र ने आग्रह किया कि मैं उनके साथ जाकर खुद उन बच्चों को व्हीलचेयर भेंट करूं।
मैंने बच्चों को अपनी हाथों से व्हीलचेयर दीं और उनकी आंखों में जो खुशी की चमक देखी, वह मेरे जीवन में एक नया एहसास लेकर आई। उन बच्चों को व्हीलचेयर पर घूमते और मस्ती करते देखना ऐसा था, मानो वे किसी पिकनिक स्पॉट पर हों और किसी बड़े उपहार का आनंद ले रहे हों।
जीवन बदल देने वाला पल
जब मैं वापस जाने की तैयारी कर रहा था, तभी एक बच्चे ने मेरी टांग पकड़ ली। मैंने धीरे से पैर छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उसने और जोर से पकड़ लिया। तब मैं झुककर उससे पूछा, "क्या तुम्हें कुछ और चाहिए?"
उस बच्चे का जवाब जीवन बदलने वाला था। उसने कहा, "मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं, तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।"
सच्चे सुख का अर्थ
इस एक वाक्य ने न केवल रतन टाटा को झकझोर दिया, बल्कि उनके जीवन के प्रति दृष्टिकोण को पूरी तरह से बदल दिया। यह अनुभव उन्हें समझा गया कि सच्ची खुशी दूसरों की सेवा में है, न कि भौतिक संपत्तियों में।
जीवन का मर्म
इस कहानी का मर्म यह है कि हमें यह सोचने की आवश्यकता है कि जब हम इस संसार को छोड़ेंगे, तो हमें किस लिए याद किया जाएगा। क्या हमारा जीवन किसी के लिए इतना महत्वपूर्ण होगा कि वह हमें फिर से देखना चाहे? यही सबसे बड़ा सवाल है, जो हमें अपने जीवन के सच्चे उद्देश्य पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
रतन टाटा: 25 वर्ष से 87 वर्ष तक का सफर
रतन टाटा ने अपने जीवन के इस सफर में, 25 वर्ष से 87 वर्ष तक, आखिरकार सच्चे सुख का अर्थ समझा, जो निस्वार्थ सेवा में निहित है।
विनम्र श्रद्धांजलि देश के सच्चे भारत रत्न स्वर्गीय श्री रतन टाटा जी को 🙏😥
I am unable to accept the absence of Ratan Tata.
India’s economy stands on the cusp of a historic leap forward.
And Ratan’s life and work have had much to do with our being in this position.
Hence, his mentorship and guidance at this point in time would have been invaluable.
With him gone, all we can do is to commit to emulating his example. Because he was a businessman for whom financial wealth and success was most useful when it was put to the service of the global community.
Goodbye and Godspeed, Mr. T
You will not be forgotten.
Because Legends never die…
Om Shanti
🙏🏽
दुर्मिळ रत्न हरपले
नैतिकता आणि उद्यमशीलता यांचा अपूर्व आणि आदर्श संगम रतनजी टाटा यांच्या ठायी होता. सुमारे १५० वर्षांची श्रेष्ठत्व आणि सचोटीची परंपरा असलेल्या टाटा ग्रुपची जबाबदारी यशस्वीरित्या पेलणारे रतनजी टाटा हे एक जिवंत आख्यायिका होते. त्यांनी वेळोवेळी दाखविलेला निर्णायक खंबीरपणा आणि मानसिक कणखरपणी टाटा ग्रूपला वेगळ्या औद्योगिक उंचीवर घेऊन गेला. त्यांना मी आदरपूर्वक श्रद्धांजली अर्पण करतो. रतनजी टाटा यांच्या पार्थिवावर शासकीय इतमामात अंत्यसंस्कार केले जातील.
रतनजी टाटा हे भारताचा अभिमान होते, येत्या पिढीच्या उद्योजकांसाठी ते नेहमीच एक आदर्श राहतील. रतनजी टाटा यांनी अतिशय कौशल्याने आंतरराष्ट्रीय पातळीवरच्या अनेक कंपन्यांना टेकओव्हर करुन व्यवसाय वाढवला. माहिती तंत्रज्ञानाच्या नव्या क्षेत्रांतही त्यांनी दमदारपणे आघाडी घेतली. टाटा ग्रूपची विश्वासार्हता जपत त्यांनी टाटा ग्रूपचा विस्तार केला. आपल्या निर्णयक्षमतेने त्यांनी टाटा ग्रुपच्या कंपन्यांमध्ये सळाळते चैतन्य निर्माण केले. नैतिकता जपत उद्योगाबरोबरच देश आणि समाजाचा विकास करण्याची टाटांची विचारधारा आणि परंपरा त्यांनी समर्थपणे सांभाळली. रतनजी टाटा यांची औद्योगिक झेप आकाशाला गवसणी घालणारी होती. तरुणांमधील कर्तृत्वाला, प्रयोगशिलतेला प्रोत्साहन देण्यात ते कायम आघाडीवर होते.
१९९१ मध्ये रतनजी टाटा टाटा समूहाचे अध्यक्ष झाले. त्यांच्या कार्यकाळात टाटा समूहाचा मोठ्या प्रमाणात विस्तार झाला. त्यांनी टेल्को (नंतर टाटा मोटर्स) ची कार निर्मिती क्षेत्रात आणि टाटा कन्सल्टन्सी सर्विसेस (TCS) ची माहिती तंत्रज्ञान क्षेत्रात आघाडीची कंपनी बनवली. तसेच, टाटा केमिकल्स, टाटा टी, टाटा स्टील यासारख्या अनेक कंपन्यांना त्यांनी यशस्वी केले. २०१२ मध्ये ते टाटा समूहाच्या अध्यक्षपदावरून निवृत्त झाले. मात्र, त्यानंतरही ते विविध उद्योगांना मार्गदर्शन करत होते.
२००८ च्या मुंबई हल्ल्यांनंतर रतनजी टाटा यांनी दाखवलेला खंबीरपणा सगळ्यांच्या कायमच स्मरणात राहील. त्यांचे निर्णय, धाडसी वृत्ती आणि सामाजिक बांधिलकी यांचे स्मरण कायम राहणार आहे.
#RatanTata
@narendramodi End of an Era. 💔
Veteran business leader Ratan Tata, passes away at 86.
A true legend whose visionary leadership transformed India's corporate landscape.
Om Shanti 🙏 #RatanTata