सुभाष चंद्रा राज्यसभा के सदस्य रहे हैं और उनका टीवी चैनल सुबह से शाम तक मोदी सरकार का गुणगान करता है।
बताया जाता है कि उनकी कंपनी पर ₹22,006 करोड़ का कर्ज था, जो महज ₹6.5 करोड़ में चुकता हो गया।
आम आदमी हजारों-लाखों के कर्ज के लिए बैंक और कानून के चक्कर काटे, लेकिन बड़े पूंजीपतियों के हजारों करोड़ मिनटों में साफ!
यही है भाजपा राज का ‘अमृतकाल’
गरीब के लिए कर्ज, पूंजीपति के लिए माफी!
वाकई… मोदी है तो मुमकिन है!
Zee समूह के मालिक सुभाष चंद्रा पर 22 हज़ार करोड ₹ का कर्ज था।NCLT ने चंद्रा साहब को बड़ी राहत दी है।अब उन्हें सिर्फ 6.5 करोड़ ही चुकाने होंगे।ऐसी लोकलुभावन योजनाएं सिर्फ धन्ना सेठों के लिए होती है।किसान,मज़दूर,छोटे व्यापारी के घर तो बैंकों के गुंडे पहुँच जाते हैं !
सुभाष चंद्रा तो अगस्त में ही दीवाली मान रहे हैं…
जब बिहार का सबसे पढ़ा-लिखा, ईमानदार उम्मीदवार 15,000 वोट पाता है…
और MMS वाले 1 लाख से ज़्यादा—
तो ये हार किसी नेता की नहीं,
हमारी सोच की है।
₹10,000 और 5 किलो राशन ने
बिहार को फिर 5 साल पीछे धकेल दिया।
नेता का बेटा , बहु , पत्नी , बेटी विधायक सांसद मंत्री मुख्यमंत्री बन रहे ,
जज का बेटा , नाती ,भतीजा , भतीजी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जज बन जा रहे ,
बालू , शराब , खनन और भू माफिया सत्ता वाली पार्टी को फंड देकर दोषमुक्त हो जा रहे ,
सरकारी स्कूल की छतों के गिरने से मासूम उसके नीचे सब जा रहे और शिक्षा मंत्री जी के बच्चे विदेश से पढ़कर हमारे ऊपर राज कर रहे ,
सरकारी अस्पतालों में जनता डॉक्टर साहब का और सुविधाओं का इंतजार कर रही , लेकिन डॉक्टर साहब अपने प्राइवेट क्लीनिक में सुविधाओं के साथ हनीमून मना रहे ,
देश को सिर्फ चार पांच हजार परिवार चला रहे , वो बहती हवा की महक सूंघ कर राजनैतिक पार्टियां बदल लेते हैं , चुनाव लड़ते हैं और लगातार कई वर्षों से हमपर राज कर रहे ,
और जनता को भ्रम है कि ये लोग दिन रात हमारी सेवा कर रहे ।
नेता का बेटा नेता बन रहा ,
बाहुबली का बेटा बाहुबली भी और नेता भी बन रहा ,
जज का बेटा जज बन रहा ,
मजदूर का बेटा मजदूर ही बन रहा ,
प्राइवेट क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर साहब का बेटा खुद का नर्सिंग होम वाला डॉक्टर बन रहा ,
किसान का बेटा छोटा किसान बन रहा ,
गरीब का बेटा और गरीब बन रहा ,
कई प्राइवेट और सरकारी नौकरी वालों के बच्चे हजारों खर्चने का बाद भी बेरोजगार बन रहे ,
ये सब देखकर भारत का संविधान , 12 फाइव इयर्स प्लान , तमाम स्कीमें, पार्टियों के मैनिफेस्टो , नेता जी के भाषण दूर खड़े मुस्कुरा रहे हैं और इंट्रोस्पेक्शन कर रहे ।
आंकड़े 1947 के पहले भी छिपाए जाते थे अब भी छिपाए जाते हैं , क्या रेल हादसा , बॉम्ब विस्फोट या फिर आतंकवादी घटना ,कोरोना मौतें ,
निष्पक्ष मीडिया के ऊपर दबाव तब भी था अब भी है , बिका हुआ मीडिया तब भी था अब भी है ,
SP कलेक्टर तब भी राजा थे आज भी राजा हैं,
सरकारी दफ्तरों में टेबल के नीचे से तब भी काम होता था अब भी होता है ,
पहले लोग शिक्षित कम थे इसलिए बेरोजगार थे आजादी के बाद शिक्षित होने के बाद भी बेरोजगार हैं,
गरीबी तब भी थी , गरीबी अब भी है लेकिन आंकड़ों की किताब में मामला गुलाबी है ,
भू माफिया , खनन माफिया ,दहशतगर्दों का राज तब भी था , अब तो विधानसभाओं और पार्लियामेंट में बैठ कर नियम भी बनाते हैं ,
गरीबों पर बरतानिया हुकूमत के पुलिसवालों का अत्याचार तब भी था और अब भी है,
अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पहले भी गरीबों और आम लोगों के लिए सपना थी और अब भी है ,
हर एक सेक्टर में भाई भतीजावाद और परिवारवाद की बीमारी तब भी थी और अब भी है ,
महिलाओं के खिलाफ शोषण और अपराध तब भी थे और अभी भी हैं,
विदेशी माल का भारतीय बाजार में दबदबा तब भी था और अब भी है ,
खाने की चीजों में मिलावट तब भी थी और अब बहुत ज्यादा है ,
असल में आजादी के बाद में बदला क्या ? या केवल गोरी चमड़ी से भूरी चमड़ी को सत्ता परिवर्तन हुआ ?
दिल्ली में मरीज सुबह 5 बजे से सर्दी में लाइन में खड़े हैं , जबकि OPD 8:30 बजे खुलेगा।
क्या यही है “स्वास्थ्य मॉडल”?
जब मरीज ठंड में तड़प रहा है, तब सरकार फ्रीबीज का ढोल क्यों पीट रही है?
डॉक्टर , बेड और सिस्टम कब मिलेगा या सिर्फ भाषण ही चलेंगे?
अशोक गहलोत ने कहा है कि "नरेश मीणा एक नौजवान है। मेरे पास भी आए थे। मैंने समझाया था कि तुम्हे लंबा चलना है अभी, तुम थोड़ा धैर्य रखो, गुस्सा मत करो, नौजवान हो, आगे तुम्हे चांस मिलेंगे।"
गहलोत ने कहा कि वो मुझसे अच्छी बात करके गया मुझसे। बाद में उसने चुनाव लड़ लिया और...बाद में उसने SDM के साथ बदतमीजी कर ली, जेल जाना पड़ा। इस उम्र के अंदर जेल जाना पड़ा। तो ये नौजवान क्या कर रहा है ? किनके हाथों में खेल रहा है ? कौन इसको गाइड कर रहा है ? ये समझ से परे हैं। और जो गाइड कर रहा है, वो इसका दुश्मन है। इसका कभी हितैषी नहीं हो सकता। ऐसे नौजवान को लाइसेंस नहीं मिलना चाहिए पिस्टल का, बंदूक का। गुस्से में कहीं पिस्टल चला दी इसने, कनपटी में मार दी तो कंवर लाल मीणा जैसी स्थिति बन जाएगी।
गहलोत ने कहा कि मैं सही सलाह देता हूं इसको। जल्दबाजी मत करो, धैर्य रखो। वरना, स्थिति बिगड़ सकती है, अच्छी बात नहीं है।