बहुत बुरी लग गई, जब बात ख़ुद पर आई
पर जब औरों पर कही, तो न हुई कार्रवाई
काश उनके साथ भी ऐसा ही होता जो विपक्ष पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं और सरासर झूठे आरोप लगाते हैं।
पक्षपात अन्याय का ही एक रूप है।
स्वयं को माफ़ियाँ देकर मुक़दमा मुक्त कर लिया और जो काम मच्छर करते थे वो सत्ताधीश ख़ुद कर रहे हैं। जनता इनके भ्रष्टाचार के काटने से रक्त मुक्त हो गयी है।
ऐसे लोग बयान देते समय अपने अनुयायियों को जो समझते हैं, वो एक सभ्य-शालीन व्यक्ति को लिखने में भी शर्म आए।
इनकी बात सुनकर तो झूठ भी आत्महत्या कर ले। अजब लोग हैं।
सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है।
क़ानून की भाषा भी साफ़ होनी चाहिए और भाव भी।
बात सिर्फ़ नियम नहीं, नीयत की भी होती है।
न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय
न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो, न किसी के साथ नाइंसाफ़ी
समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं मा. सांसद फतेहपुर श्री नरेश उत्तम पटेल जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
ईश्वर आपको स्वस्थ, सुखी एवं सफल जीवन प्रदान करें।
जो पत्रकार अपनी ज़मीनी समझ के लिए समझे जाते हैं और जो सतह के नीचे की अंदरूनी बातों को ऊपर लाने का काम करते हैं उनकी पत्रकारिता सराहनीय है। उन पत्रकारों से ये भी उम्मीद है कि वे केवल सतह के नीचे की ही बात सामने न लाएं बल्कि जो सबके सामने सरेआम, दिनदहाड़े घटित हो रही हैं, उन बातों पर भी बिना डरे बोलें, रील्स बनाएं, स्टोरी व प्रोग्राम करें, जिससे उनकी दायित्व से भरी, सच्ची और ईमानदार पत्रकारिता, शोषित, वंचित, प्रताड़ित जनता के पक्ष में, सच में जनहित के साथ खड़ी दिखाई दे और उन भ्रष्ट पत्रकारों से अलग लगे जो धनहित में ‘जिसका दाना, उसका गाना’ वाले फार्मूले पर काम कर रहे हैं।
सरेआम दिख रहे, ऐसे कुछ विषय हैं:
⁃फ़र्ज़ी मुठभेड़ या फ़ेक एनकाउंटर
⁃बुलडोज़र की नाइंसाफ़ी
⁃ज़मीनों पर हो रहे क़ब्ज़े
⁃अवैध खनन व वन कटाई
⁃हर काम में बढ़ रहा भ्रष्टाचार
⁃हिरासत में हो रही मौतें
⁃निवेश में माँगा जा रहा कमीशन
⁃लाखों प्रतिदिन कमा रहे थाने
⁃झूठे दावों का बेशर्म प्रचार
⁃संविधान को मिटाने का षड्यंत्र
⁃आरक्षण को ख़त्म करने की चालबाज़ी
⁃भर्ती-नौकरी को ख़त्म करने की साज़िश
⁃खुलेआम साम्प्रदायिक भाषणबाज़ी
⁃चुनावी प्रक्रिया की धांधली
⁃पैसे बाँटकर लड़ा जा रहा चुनाव
⁃पीडीए पर लगातार बढ़ रहे अत्याचार
भाजपा भ्रष्टाचार का विश्वविद्यालय है और चुनावी भ्रष्टाचार का ब्रह्मांडविद्यालय।
हक़मारी और *‘मतमारी’* से भाजपा लोकतंत्र को ख़त्म करने का जो षड्यंत्र रच रही है, हम सब मिलकर उसे कामयाब नहीं होने देंगे।
जनता समझे:
- भाजपा कुछ लोगों की मिलीभगत से कभी अपने समर्थक फ़र्ज़ी मतदाताओं का नाम बढ़ा देती है।
- भाजपा सत्ता सजातीय अधिकारियों की साठगांठ से कभी अपने विरोधी मतदाताओं का नाम कटा देती है।
- भाजपा बूथ पर अपने चुनिंदा लोगों को सेट करके फ़र्ज़ी वोट डालने का ‘टारगेट’ देती है।
- भाजपा बंदूक तानकर कभी मत डालने से रुकवाती है।
- भाजपा अपने समर्थकों से कई-कई वोट डलवाती है।
- भाजपा अपने समर्थकों के नक़ली आईडी बनवाकर अपने लिए फ़र्ज़ी मतदान करवाती है।
- भाजपा फ़ोर्स लगाकर कभी ईवीएम बदलवा देती है।
- भाजपा कभी सीसीटीवी के सामने, अपने विरुद्ध डाले गये मतों को ख़ारिज भी करवाती है।
- भाजपा डीएम से कभी जीत का सर्टिफिकेट भी बदलवाती है।
मतदाता कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
#भाजपा_की_मतमारी
#वोट_डकैती
उप्र में भाजपा की पिछली सरकार ने ‘गड्ढा मुक्ति’ के नाम पर अरबों का जो फंड निकाला था, वो भाजपाइयों की जेब के गड्ढे तो भर गया लेकिन सड़के बद से बदतर हो गयीं।
भाजपा जाये तो सड़क बन जाए।