ब्राह्मण का अपमान भी संविधान के खिलाफ है!
स्वामी रामदेव जी का साफ संदेश:👇
एसएसटी के साथ अन्याय हो रहा है तो ब्राह्मण के साथ भी। कुछ लोग ब्राह्मणों को गाली देकर ब्राह्मण तंत्र-बनिया तंत्र का नारा लगा रहे हैं...ऐसा नहीं चलेगा।
न क्षत्रिय, न वैश्य, न शूद्र, न ब्राह्मण, न सन्यासी — किसी को भी गाली मत दो। समाज में भेद की दीवारें खड़ी करके लोगों को लड़ाने की कोशिशें बंद होनी चाहिए।
संविधानिक अधिकार हर नागरिक के हैं। अपमान किसी का भी गलत है।
ये तो शुरुआत है ...
जिस दिन पुराने अंदाज में आ गया न सवर्ण समाज ताप से जल जाओगे सब के सब, वो तो चुप हैं क्योंकि देश में उपद्रव नहीं होने देना चाहते हैं और वो गर्मी आज भी बच्चा बच्चा के खून में है....
ये जो पावर और सत्ता का खेल खेल रहे हो वो भी सवर्ण समाज का देना है, और भाजपा जो आज 2 सीट से 300+ पर बैठा है वो भी सवर्ण समाज का ही देन है तो मजबूर मत करो....
धन्यवाद अजीत भाई @ajeetbharti@AjeetBhartii
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
—-
अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
—-
सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
@Mayawati अम्बेक्डकर का तो मान लो उसने भी 10 साल का आरक्षण मांगा लेकिन आप लोग साँप बनकर कुंडली मार के बैठे आरक्षण के वोट बैंक पर
आरक्षण तो उन्हें मिले जो लायक़ है जो एससी एससीटी में अति पिछड़े है समीक्षा हो
और कौनसी सदियो से दलितों पर अत्याचार हुआ है
कहाँ लिखा है
CJP’s credibility is over
CJP co-convenor Ashutosh Ranka and his team were chased away by locals the moment they tried to enter Bagru village in Rajasthan.
No welcome...No support....Just rejection😆😆
The same group that claimed to represent students and the public is now being driven out by ordinary people.
No one trusts them anymore
सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी हो गई लेकिन सवाल ये है कि 2024 में FIR हुई.. दिसंबर 2025 में चार्जशीट दाखिल हुई और खबरों के मुताबिक केस का मुख्य आधार डिजिटल सबूत हैं तो चार्जशीट के 9 महीने तक गिरफ्तारी का इंतजार क्यों हो रहा था?
डिजिटल सबूत तो पहले ही मिल गए होंगे? तो फिर इंतजार किस बात का था?
वैसे नेशनल हेराल्ड.. राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता से लेकर रॉबर्ट वाड्रा के कथित जमीन घोटाले के सालों से चल रहे केसेज़ में भी ऐसी ही तेजी दिखे तो जनता का विश्वास और मजबूत हो जाएगा।
यह संसद नहीं, इस देश का दुर्भाग्य खड़ा है। पूरा सत्र बिना प्रश्न काल के, पक्ष की मूर्खता और विपक्ष की अकड़ की बलि चढ़ गया। सत्ता पक्ष निर्लज्ज हो कर अंतिम दिन लोकसभा सत्र की अंत्येष्टि में ‘वन्दे मातरम्’ का चार स्टैंजा गा कर देश को ठग रहा है कि वो देशभक्त हैं।
@narendramodi जी, आप केवल पार्टीभक्त हैं।