ये देखिये गूजरों की नफरत मीणा समाज के प्रति:
डकैत जगन गूजर के 12वीं में अटक से लेकर कटक तक का गूजर समाज मातम में शामिल हुआ और “मीणाओं को सबक सिखाने और नौकरियाँ करना भूला देने की चुनौती” एक 5 फुट के बुड्ढें से😎।
ये हैं इनका असली चेहरा, किरायेदार अब मालिक को सबक सिखाने की चुनौती दे रहा हैं, वाह!
#पाँचना_बाँध, जो एक राष्ट्रीय संपत्ति है, उसकी आज़ादी की लड़ाई आखिरकार सर्वसमाज के किसानों ने जीत ली है, बुराई पर अच्छाई कि जीत हैं। यह जीत पीली, हरी, नीली और काली लुगड़ी की, धोती-कुर्ते की, सफेद रूमाल की ललकार और पुकार की जीत है। खण्डीप आज एक ऐतिहासिक भूमि बन चुका है।
यह पूर्वी राजस्थान है। यहाँ का किसान अपनी पूँछ, मूँछ और लठ्ठ तीनों की ताकत और सम्मान को अच्छी तरह समझता है। हम छल-कपट में नहीं, बल्कि कानून और कानून की स्थापना के लिए संघर्ष करने में विश्वास रखने वाले लोग हैं।
जब इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी, तब दूसरी ओर अराजकतावादी गुंडे और डकैत लोग और उनके मंचों से जुड़े अभद्र कलाकार कमांड एरिया के किसानों के खिलाफ नफरत भरी बातें कर रहे थे। मंचों से कहा जा रहा था कि, “एक बूँद पानी की नहीं जाने देंगे, चाहे मर जाएँ, मिट जाएँ।” वहीं दूसरी तरफ खण्डीप में सर्वसमाज के किसान हुंकार भर चुके थे कि पाँचना बाँध का पानी लेकर रहेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए।
आज कमांड एरिया की नहरों में पानी पहुँच चुका है, अब सर्वसमाज जिसमें पहला गाँव राजपूत समाज, फिर जाट समाज के गाँव उसके बाद मुस्लिम समाज के गाँव फिर बामण समाज, सैनी समाज, मीणा समाज के गाँव और दलित और गूजर समाज जी हाँ गूजर समाज जिनको नहरों में पानी भी नहीं चाहिए था उन्हें भी जबरदस्ती पाँचना का पानी सिंचाई और पीने के लिए पानी का इस्तेमाल करेंगे।
यह आंदोलन केवल पानी का नहीं था, बल्कि स्वाभिमान, अधिकार और न्याय की लड़ाई थी। इस संघर्ष की सफलता से आंदोलन में शामिल हर नागरिक गर्व और खुशी महसूस कर रहा है। पूर्वी राजस्थान का परचम ऐसे ही लहराता रहेगा। वैसे भी यहाँ की धरती हर दो दशकों में इतिहास रचने वाले जनआंदोलनों की साक्षी बनती रही है।
मेरे युवाओं, अब फिर से पढ़ाई-लिखाई और अपने भविष्य की ओर ध्यान लगाओ। फिलहाल यहाँ मुझे कोई बड़ा विवादित मुद्दा दिखाई नहीं देता। इस जनआंदोलन से इतना जरूर सीखना चाहिए कि धैर्य, अहिंसा, सांस्कृतिक जुड़ाव और एकता के बल पर स्वाभिमान और अधिकारों की लड़ाई हँसते हँसते नाचते गाते जीती जा सकती है।
बाकी राजनीति अपनी गति से चलती रहेगी।
इस आंदोलन से जुड़े हर व्यक्ति को धन्यवाद, जिन्होंने साथ दिया🙏
अगर मीणा-गुर्जर विवाद की यह खबर सच है तो...
CM भजनलाल शर्मा को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।
तोप के अपुष्ट दावे क्षेत्र में प्रचारित हैं।
यह अपराध है.... बहादुरी नहीं। 🙏
@KarauliPolice@SPsawaimadhopur को इस दावे की सत्यता जाँचनी चाहिए। 🙏
अगर आप न्याय के साथ है तो करौली कलेक्टर @DmKarauli और पुलिस @KarauliPolice से सीधा सवाल कीजिये की उन्होंने अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई और इस गैरजिम्मेदारी के लिए वो आगे आके जनता से माफ़ी मांगे 🙏
हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना, खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन, राष्ट्रीय संपत्ति पर कब्ज़ा और कानून-व्यवस्था की अनदेखी प्रशासन की मौजूदगी में होती रही। अब कार्रवाई का समय आया है तो करौली प्रशासन पर एकतरफ़ा कार्रवाई के आरोप हैं।
गंगापुर विधायक रामकेश मीणा ने मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp को पत्र लिखकर मांग की है कि पांचना बांध एवं कमाण्ड क्षेत्र प्रकरण में पुलिस प्रशासन निष्पक्ष, पारदर्शी और समान कार्रवाई सुनिश्चित करे। यदि सोशल मीडिया पर कानून विरुद्ध या भड़काऊ पोस्ट दोनों पक्षों से हुई हैं, तो कार्रवाई भी दोनों पक्षों के दोषियों पर समान रूप से होनी चाहिए।
कानून का राज तभी स्थापित होगा जब न्याय सबके लिए एक समान हो @Ramkeshmeenainc #RamkeshMeena #PanchanaDam #Karauli
पांचना बांध मामले के सबसे बडी दोषी SP और कलेक्टर है आखिर इनके खिलाफ मुकदमा क्यू नही दर्ज होना चाहिए क्योकि ये हाईकोर्ट के आदेशो के बावजूद ये स्थिति क्यू पैदा हुई जो लोग विरोध कर रहे थे उनका गृहमंत्री वहा पर बैठा हुआ था और उन्ही की दरियादिली पर आप SP लगे हुए हो
मुकदमे आपके खिलाफ भी दर्ज होंगे #समरावता_कांड मे प्रशासन के खिलाफ 27 मुकदमे दर्ज कराए थे बाद मे वो तो उन लोगो ने राजीनामे कर लिए अन्यथा प्रशासन के पसीने आ गए थे दिन मे मेरे पास 20-20 फोन आते थे
हम चुप है इसका मतलब ये नही है कि हम कमजोर है SP साहब मै आपको बताना चाहता हू कि हर समाज मे पढे लिखे और काबिल लोग भी है वो तो भला हो उस किरोडीलाल मीना का जो रात मे वहा चला गया और एक समाज को पीछे हटा दिया
- मुखराज (एडवोकेट)
माननीय @DmKarauli महोदय,
आज सवाल केवल पांचना बांध का नहीं है, सवाल कानून के राज का है। सवाल उस प्रशासन की जवाबदेही का है जिसने अपनी आंखों के सामने सब कुछ होते देखा, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। /1
पूर्वी राजस्थान की स्थिति बिगड़ने के लिए सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी करौली प्रशासन @DmKarauli@KarauliPolice है। यदि प्रशासन ने समय रहते निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई की होती, तो संभवतः यह मामला इतना नहीं बढ़ता।
प्रशासन की मौजूदगी में हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होती रही, लेकिन कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
प्रशासन की मौजूदगी में लोग खुलेआम हथियार लेकर घूमते रहे, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन की मौजूदगी में राष्ट्रीय संपत्ति पर कब्ज़ा कर धरना चलता रहा, लेकिन इसे हटाने का प्रयास नहीं किया गया।
प्रशासन की मौजूदगी में अशोभनीय और अभद्र भाषा का खुलेआम प्रयोग होता रहा, फिर भी कानून का पालन सुनिश्चित नहीं कराया गया।
सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण स्थिति बिगड़ी, उनके विरुद्ध आज तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कमांड नहर के गेट किसने क्षतिग्रस्त किए? इसकी निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई?
जब दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हो चुका था, तब गेटों की तकनीकी और फोरेंसिक जाँच कर समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया? यदि समय रहते यह किया जाता, तो शायद हालात इतने तनावपूर्ण नहीं होते।
प्रशासन की एकतरफ़ा कार्रवाई निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। यदि अब यह मामला पुनः न्यायालय में जाता है, तो हमारी विनम्र मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, स्वतंत्र और तथ्यों पर आधारित जाँच कराई जाए तथा सभी दोषियों के विरुद्ध समान रूप से विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए 🙏🏻 #KarauliPolice #Karauli #Rajasthan @IgpBharatpur@PoliceRajasthan@RajPoliceHelp
मैं, मनोज मीणा, यह कहना चाहता हूँ कि यदि किसानों की आवाज़ उठाना अपराध है, तो हाँ, मैं यह अपराध स्वीकार करता हूँ। किसानों के हक और पानी के अधिकार की लड़ाई मैं आगे भी पूरी मजबूती से लड़ता रहूँगा। जेल जाने से मुझे कोई डर नहीं है।
मेरा मानना है कि करौली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई एकतरफा प्रतीत होती है। यदि पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करना चाहती है, तो उन सभी लोगों के खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए जिन पर दोनों समाजों के बीच तनाव बढ़ाने के आरोप लगे हैं। यदि किसी एक पक्ष पर ही कार्रवाई होती है और दूसरे पक्ष के आरोपित लोगों को छोड़ दिया जाता है, तो इससे निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे।
मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि यदि मेरी गिरफ्तारी से किसानों को उनका हक और नहरों का पानी मिल जाता है, तो ऐसी गिरफ्तारी मैं एक नहीं, हजार बार देने के लिए तैयार हूँ।
मेरा पुलिस प्रशासन से केवल इतना आग्रह है कि कानून का पालन पूरी निष्पक्षता और बिना किसी भेदभाव के किया जाए। कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि कार्रवाई पक्षपातपूर्ण दिखाई देगी, तो इससे सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी निष्पक्ष और संतुलित व्यवस्था बनाए रखने वाले सभी पक्षों की होगी। @BhajanlalBjp@DrKirodilalBJP@RajCMO
करौली पुलिस अधीक्षक श्री लोकेश सोनवाल जी, कानून का दायित्व सभी नागरिकों के प्रति समान होता है.! यदि खण्डीप संघर्ष समिति, हेट स्पीच देने वालों और गाली-गलौच करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है, तो वह बिना किसी भेदभाव के सभी पक्षों पर समान रूप से होनी चाहिए.!
हमें ऐसा प्रतीत होता है कि गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म जी के इशारे पर एक तरफ़ा कार्रवाई करके समुदाय विशेष को खुश करने की कोशिश कर रहे है.! हम इतना कहना चाहते है कि मीणा समाज पर एक तरफ़ा कार्रवाई की बजाय दोनों समुदाय के लोगों पर निष्पक्ष और समान कार्रवाई कीजिए अन्यथा एकतरफा कार्रवाई से न्याय की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं.!
@DrKirodilalBJP@BhajanlalBjp@KarauliPolice@SPsawaimadhopur@IgpBharatpur
हमारी इस बात को सुनो
@MeerutPradesh@Meena_dinesh22 Cochu tum kita he kr lo aese on ground jydtr doctor Karauli Gangapur m meene h or gurjar pupil unsee he dilwate chochu boi jb pata khuch nhi toh udte ni h
#नए_फसाद_की_जड़:
सरकार का वह मंत्री, जिसने भारतीय संविधान की शपथ ली थी, और जो उस समझौते पर हस्ताक्षर के समय स्वयं उपस्थित था और हस्ताक्षरित भी हैं, उसी समझौते की भावना के विरुद्ध नहरों में पानी छोड़ने के बजाय पाँचना बाँध का पानी नदी में बहाकर लौट आया।
इसके बाद मीडिया में आकर यह कहा गया कि पानी छोड़े जाने के मात्र 5 मिनट बाद तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गई। फिर बताया गया कि तकनीकी समस्या को दूर करने के लिए गोताखोर पानी में उतरे, लेकिन पानी के भीतर साँप बैठे हुए थे। 🙃
जबकि तथाकथित वास्तविकता यह बताई जा रही है कि गेटों पर वेल्डिंग करवाई गई, पत्थर डाले गए और अराजक तत्वों द्वारा व्यवस्था को बाधित किया गया। अब सरकार स्थिति की लीपापोती करने के लिए मोटरों के माध्यम से नहरों में पानी पहुँचा रही है, लेकिन हालत यह है कि जो पानी दो घंटे में अपने गंतव्य तक पहुँच जाना चाहिए था, वह दो दिन बाद भी वहाँ नहीं पहुँच पाया है।
भारत सरकार की मुद्रा पर लिखा वचन उसकी साख का प्रतीक है। उसी प्रकार राजस्थान सरकार की विश्वसनीयता भी उसके वचनों और समझौतों के पालन पर निर्भर करती है। यदि किसी मंत्री के आचरण से सरकार की साख को ठेस पहुँची है, तो पुलिस, न्यायालय और सरकार को ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए जिससे संविधान की शपथ का मूल्य और उसकी गरिमा समाज के प्रत्येक वर्ग तक स्पष्ट रूप से पहुँचे।
भारत बंद 🥳 करा देगा दिग्गज गाँव का दिग्गज सरपंच
आज यथार्थ हुआ हैं ये फोटो
सौजन्य: हकीम वेल्डर
नोट: पहले से ही 10 साल की जेल हो रखी हैं, इतिहास (भैंस) चोर क्रेडिट ना ले जबरदस्ती का
कहानी ये हैं आत्मसमर्पण संधि पर कंजरों ने हस्ताक्षर किए तो उस अपमान का बदला लेने के लिए वेल्डिंग कर दी नहरों में पानी सप्लाई करने वाले पाँचना बांध के गेट की।
‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ की कहानी को बदला बोलके गँवारों वाली फीलिंग ले रहा हैं खुलके failout का कंजर समाज।
भगवान सबको कंजरों जैसे दुश्मन दे
रामू मीणा - 42.79 फेल❌
रामू पाण्डेय -40 पास ✅
लेकिन आरक्षण तो सिर्फ SC ST OBC वाले लेते हैं, अब आरक्षण वैशाखी नहीं है। जब इतना ही मैरिटधारी हो तो यह भीख लेने की जरूरत क्या पड़ रही है।
कांग्रेस के लिए मध्य प्रदेश जीतना मुश्किल नहीं है क्योंकि राज्य की लगभग 22% आबादी आदिवासी है। यदि मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी की कमान किसी आदिवासी लीडरशिप को आदिवासी सांसद को सौंपी जाए, तो इससे पूरे राज्य में एक मजबूत और सकारात्मक राजनीतिक संदेश जाएगा, जिसका चुनावी परिणामों पर भी असर पड़ सकता है।
आदिवासी समाज कई सीटों पर निर्णायक प्रभाव रखता है। यदि यह समाज पूरी मजबूती के साथ कांग्रेस के साथ खड़ा हो जाए, तो कांग्रेस न सिर्फ भोपाल की सत्ता में वापसी कर सकती है, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में क्लीन स्वीप करने की स्थिति भी बना सकती है।
मध्य प्रदेश का मजबूत प्रदर्शन 2029 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के लिए बड़ा आधार बन सकता है। इसलिए यदि पार्टी राज्य में अपनी रणनीति का केंद्र आदिवासी नेतृत्व और आदिवासी समाज को बनाए, तो इसका लाभ भोपाल से लेकर दिल्ली तक मिल सकता है @RahulGandhi #MP #Tribals #TribalPower #MP2028 #LokSabha2029