उम्र-भर हम ने फ़ना के तजरबे ख़ुद पर किए
उम्र-भर में आलम-ए-फ़ानी का अंदाज़ा हुआ
इक ज़माने तक बदन बे-ख़्वाब बे-आदाब थे
फिर अचानक अपनी उर्यानी का अंदाज़ा हुआ
सूरतें बिगड़ीं तो अपनी हालतों में आए हम
आईना टूटा तो हैरानी का अंदाज़ा हुआ
~शाहीन अब्बास 🖤✨
ब-सद-फ़रेब उसे क्या से क्या दिखाई दे
कि इब्तिदा में जिसे इंतिहा दिखाई दे
फ़लक को ताकते उस ने गुज़ार दीं सदियाँ
उसे उमीद थी शायद ख़ुदा दिखाई दे
ये शहर शहर-ए-ख़मोशाँ है अहल-ए-दानिश का
कहीं तो एक कोई सर-फिरा दिखाई दे
- बद्र-ए-आलम ख़ान
अहल-ए-दानिश - विद्वान लोग
@_Baad_e_Saba Lajawaab ash'aar se pur lutf kar diya
Kya shandaar takhayyul hai .. Ibtidaa me Intehaa .. waahh
ब-सद-फ़रेब उसे क्या से क्या दिखाई दे
कि इब्तिदा में जिसे इंतिहा दिखाई दे