*हर आदिवासी की दास्तां यही है। पूरे संभाग राज्य से इस मामले को गंभीरता से लेना होगा*
*हमारे ST के लिए जो न्याय का कानून बना है हो पालन क्यों नहीं होता*
कितनी अफसोस कि बात है ना इसी जगह में पुर्वजों ने जिस भुमियार ने गांव बसाया कितनी पीढ़ी गुजर चूकी होगी उसके आस पास की जंगल जमीन का किया संरक्षण अब उन्हें हटाया जाएगा ।
किया बस्तर के जन प्रतिनिधि इस पर कुछ बोल नहीं सकते।
पता नहीं आस पास जंगल भी टारगेट में होगी ✍️
मंदिरों के लिए बजट मिल जाता है। किलो के जीर्णोद्धार के लिए फंड आ जाता है। विदेश यात्राओं पर करोड़ों खर्च हो जाते हैं लेकिन सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों के लिए कभी बजट नहीं आता! क्यों?
इस वीडियो में दिखाया गया "कटा सिर थाली में" चमत्कार असल में एक ऑप्टिकल इल्यूजन है। यह दिखाता है कि कैसे साधारण विज्ञान को ढोंगी लोग चमत्कार बताकर अंधविश्वास फैलाते हैं। तर्क करें, भ्रम से बचें।
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Municipal Corporation :- BJP
MLA :- BJP
MP :- BJP
Chief Minister :- BJP
Prime Minister :- BJP
Who is Responsible for this Defect in Main Road of the City ? 🧐
मध्यप्रदेश के खिवनी की एक आदिवासी महिला ने कलेक्टर से पूछा– “आपकी सैलरी कितनी है?”
फिर बोली – “₹20,000 हम आपको देंगे और 12 माह का राशन भी, लेकिन हमारी जमीन मत उजाड़ो।”
जब प्रशासन ₹20,000 और 6 माह का राशन देकर समझौता कराने लगे तो समझिए लूट की तैयारी है।
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सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं, और प्राइवेट स्कूलों का कारोबार बढ़ रहा है। गरीब बच्चों से उनका हक़, उनका भविष्य छीना जा रहा है। क्या शिक्षा अब सिर्फ अमीरों के लिए रह गई है?
भारत में कुछ हरामज़ादो को आरक्षण से सिर्फ़ इसलिए दिक्कत है क्योकि वो SC/ST को मिलने वाले रिप्रजेंटेशन को ही आरक्षण समझते है ।
जबकि आरक्षण कई तरह है जैसे देश में प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री का काफिला गुजरे तो सड़क पर आम जनता से इतर उन्हें आरक्षण दिया जाता है ।
मंदिरों में ब्राह्मण पुजारी होने का आरक्षण । जन्म लेते ही तथाकथित मुखपूत उच्ची जाति होने का आरक्षण।
मैनेजमेंट कोटा हो या स्पोर्ट्स कोटा या फिर आर्मी रिटायर्ड कोटा, या फिर कई बस, ट्रेन, एयरोप्लेन उसमे भी लोग आरक्षण लेते है। ews आरक्षण से लेकर vip आरक्षण तक । देश में हजारों तरह के आरक्षण है ।
लेकिन हज़ार सालों से जिनके जमीन जायदाद छीन कर पढ़ने लिखने पर प्रतिबंध लगाकर, उनके सामाजिक सम्मान को नीचा बनाने वालो की नालायक संताने आज भी बहुजन रिप्रजेंटेशन को ही आरक्षण समझती है और सुदामा खैरात खाने के बाद भी जहर सिर्फ बहुजनों के आरक्षण से है ।
2013 का 'एनकाउंटर' फर्जी था। न्यायिक जांच में खुलासा हुआ कि मारे गए लोग नक्सली नहीं, निहत्थे आदिवासी थे। 8 साल बाद भी न्याय अधूरा है।
हम मांग करते हैं:
1. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो
2. पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा मिले
मध्यप्रदेश के बालाघाट में 3 आदिवासी बच्चियों के साथ हुए भयावह अपराध की हम कड़ी निंदा करते हैं। यह घटना न सिर्फ मानवता पर धब्बा है, बल्कि आदिवासी समुदाय की सुरक्षा पर भी सवाल उठाती है। हम दोषियों को जल्द से जल्द कठोर सजा और पीड़ित बच्चियों के लिए न्याय की मांग करते हैं। @DGP_MP
हंसराज मीणा की इस हैंडल को देखिए। ये पूरे ट्राइबल समाज के नाम पर हैंडपे बनाकर मासूम भील, भिलाला, सहरिया जैसे समाज को बदनाम करने की नाकाम कोशिश कर रहा है। इस एक व्यक्ति ने मीणा समाज को पूरे देश में बदनाम करने का ठेका ले रखा है क्या? मीणा समाज को ऐसे लोगों का खुलकर विरोध करना चाहिए
इसकी गिरी हुई घटिया सोच देखिए 26 मासूमों को उनका धर्म देखकर, पैंट उतरवाकर खतना नहीं मिलने पर गलियों से भून डाला गया। यहां भी ये राजनीति कर रहा है। कितने बेशर्म लोग भरे पड़े हैं यहां। शर्मनाक।
भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले जी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
महिलाओं की शिक्षा और समानता, और बहुजनों के हक़ और अधिकारों के लिए उनका संघर्ष और योगदान हमारे लिए सदैव प्रेरणादायक रहेगा।