ये विडियो देख के कलेजा फट जाएगा 💔😢
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एक तरफ बेटा... दोनों आंखों से विकलांग मां को नमक-चावल और पानी खिला रहा है।
उसके लिए यही दुनिया है, यही जन्नत है। उसे 5 स्टार होटल नहीं चाहिए, बस मां का पेट भर जाए, यही काफी है।
दूसरी तरफ हमारे देश में लाखों ऐसे परिवार हैं
जो उन "25 करोड़" के आंकड़ों में कहीं नहीं आते।
जिन्हें "गरीबी रेखा से बाहर" बता दिया गया, पर उनकी थाली में आज भी सिर्फ नमक-चावल है।
ये है असली भारत,जहां 25 करोड़ के आंकड़े में ये बेटा और उसकी मां नहीं दिखेंगी...पर जहां बेटा मां के लिए भगवान बन जाता है..और जहां संघर्ष ही जिंदगी का नाम है।
सलाम है ऐसे बेटे को🙏
सोचिए... क्या हम वाकई आगे बढ़ रहे हैं?
#viralvideo #RealIndia #HumanityFirst #India
सरकार के आंकड़ों में ये अमीर हैं और laxurious life जीते हैं
माँ के पास आंखे नहीं हैं और बेटे के पास बोध नहीं है यही इनका अपराध है
यदि माँ के पास आँखें होती और बेटे के पास बोध होता तो सरकार से हकमारी का सवाल करता!
लेकिन शर्म की बात ये है सरकार भी अंधी है
देश में एक ऐसा एंकर नहीं होगा जो बरबस ऐसे .. और ऐसा बोल सके…ऐसे मेधावी व्यक्ति को क्यों नहीं मिले औपचारिकता शिक्षा के मौक़े? दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती में रहते हैं मोहम्मद इरफ़ान…इन्हें सलाम 🙌🏼
सुना जाए इरफान को
विश्व के पटल पर हम कैसा भारत ले जाना चाहते हैं
जहां स्वामी रामकृष्ण परमहंस की सोच हो
जहां राजा राममोहन राय की सोच हो
अम्बेडकर और गाँधी की सोच हो
भगतसिंह और रामप्रसाद बिस्मिल की सोच हो
#irfan
मिलिए उस मोहम्मद इरफ़ान से जो अपने जंतर मंतर के उस video से viral हो रहा है, जिसमे वह संविधान की प्रस्तावना को जिस लय में सुना रहा है, वो आसपास वालों को बांध लेती है l
एक टूटे हुए से घर में लोकतांत्रिक मूल्यों को हृदय से लगाकर रखने वाला इरफ़ान संघर्ष कर रहा है l इरफ़ान को बस उसकी प्रतिभा के अनुरूप सही अवसर मिलने की देर है , उसके बाद वह अपना रास्ता बना लेगा l
माननीय प्रधानमंत्री जी,
पेपर लीक बंद करना है तो:
NSA और UAPA लगाइए
BNS की धारा 111 लगाइए
नार्को पॉलीग्राफ टेस्ट करिए
100% संपत्ति जब्त करिए
नागरिकता समाप्त करिए
03 महीने में जाँच पूरी करिए
01 वर्ष में आजीवन कारावास दीजिये
@PMOIndia@narendramodi
हर आंदोलन गलत है।
लोग गलत हैं।
आवाज़ उठाना गलत है।
सवाल पूछना गलत है।
विरोध करना गलत है।
जवाब मांगना गलत है।
पारदर्शिता मांगना गलत है।
व्यवस्था पर प्रश्न उठाना गलत है।
अधिकार मांगना गलत है।
न्याय की उम्मीद करना गलत है।
फिर मैं पूछता हूँ -
क्या पेपर लीक सही है?
क्या मिलावटी पेट्रोल सही है?
क्या मंदिरों से चंदा चोरी सही है?
क्या भर्ती परीक्षाओं में वर्षों की देरी सही है?
क्या बेरोज़गारी सही है?
क्या महंगाई सही है?
क्या अस्पतालों में भ्रष्टाचार सही है?
क्या शिक्षा में घोटाले सही हैं?
क्या नकली दवाइयाँ सही हैं?
क्या पुलों का गिरना सही है?
क्या सड़कों पर गड्ढे और हादसे सही हैं?
क्या टैक्स देने के बाद भी बदहाल सुविधाएँ सही हैं?
क्या बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ सही है?
क्या युवाओं के सपनों का टूटना सही है?
आवाज़ उठेगी तभी तो कुछ बदलेगा अगर हर protest को हम ऐसे ही उसकी कमिया बताकर कमजोर करेंगे तो एक दिन आवाज़ उठाने वाले भी नहीं बचेंगे तब कौन आएगा आगे जब तुम पर ही बीतेगी |
मानवता जिन्दा रखो ||
भावनाएं वगैरा आहत हुई या नहीं?
नितिन नवीन के रोडशो में हमारे बजरंग बली महाराज को ही नचा दिया।
कहाँ मर गए सारे संगठन?,
या फिर जब दीपिका पादुकोण बिकनी पहनेगी तभी भावना आहत होगी।
क्या आदित्य शर्मा की जान की कीमत कुछ भी नहीं है,
अगर यही काम पाकिस्तान ने किया होता तो अब तक एयरस्ट्राइक हो चुकी होती।
लेकिन अमेरिका ने किया है, तो जाने दो।
वो दोस्त है साब का।