"उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री आदरणीय श्री योगी आदित्यनाथ जी को जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं! 🎂💐
माननीय मुख्यमंत्री जी से सविनय निवेदन है कि नीति आयोग/PAB की रिपोर्ट (8 वर्षों में 1.43 लाख खाली पद) को संज्ञान में लेते हुए, प्रदेश के लाखों डीएलएड/टीईटी पास युवाओं के भविष्य के लिए 78,000 प्राथमिक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन तुरंत जारी कर न्याय प्रदान करें।" 🙏✨#UP_Needs_Primary_Teacher_Vacancy
#78000_शिक्षक_भर्ती
@myogiadityanath@PrashantK_IPS90@basicshiksha_up@upesscprayagraj@UPGovt
आदरणीय प्रशांत सर बेसिक शिक्षा विभाग में 8 वर्षों बाद केवल नगर क्षेत्र के 11000 पदों पर भर्ती का अधियाचन आयोग को भेजा है अतः आपसे निवेदन है योगी जी से मिलकर एक बड़ी प्राथमिक शिक्षक भर्ती 78000 पदों पर विज्ञापन जारी करवाने का कष्ट कीजिये। सभी डीएलएड वाले आपके सदा आभारी रहेंगे।🙏
जन्मदिन की शुभकामनाएं मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी आपको। मुख्यमंत्री जी बेसिक में 51112 का हलफनामा आपकी ही सरकार ने लगाया था और 68500 के शेष पद 27000 को जोड़कर बेसिक में 78000 पदों पर भर्ती दे दीजिये सर
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Thank you.
बांदा रविवार को एक बार फिर देश का सबसे गर्म जिला रहा। पारा 46.4°C रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले 27 अप्रैल को बांदा देश में सबसे गर्म जिला बना था। तब पारा 47.6 °C पर पहुंचा था। यह अचानक नहीं हुआ।
एक्सपर्ट मानते हैं- बांदा के नेचुरल रिसोर्सेज को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है। 10 साल में बांदा की 20% से 25% पहाड़ियां या तो खत्म हो गईं या उनका 50% से ज्यादा हिस्सा तोड़ दिया गया। केन नदी से हर दिन 2000 ट्रक रेत निकाली जा रही। यह हर दिन करीब 57 हजार टन होती है।
साइंस मैगजीन ‘जर्नल ऑफ एक्सटेंशन सिस्टम्स’ की स्टडी के मुताबिक, बांदा में हर साल जंगल का 13.72% हिस्सा काट दिया जाता है। इतनी संख्या में नए पेड़ नहीं लगाए जा रहे। रिसोर्सेज को ऐसे ही खत्म किया गया, तो 20-25 सालों में यह जिला बंजर हो जाएगा।
पूरी खबरः https://t.co/x5lASthE6h
यूपी बेसिक शिक्षा विभाग भले बेसिक भर्ती न करे, अख़बारों ने 45000 भर्ती का बिगुल बजा दिया है. चुनाव करीब है अख़बारों में भर्तियां खूब निकालेंगे अब. सभी बीएड DELED पास कॉकरोच कान खडे कर लें.
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गुजरात के थार मरुस्थलीय क्षेत्रों में पारंपरिक जलसंचय प्रणालियों के नष्ट होने से शहर तेजी से भूजल पर निर्भर होते जा रहे हैं और जलस्तर खतरनाक रूप से गिर रहा है।
भुज का हमीरसर, देसलसर और प्रागसर जैसे ऐतिहासिक जलाशय उपेक्षा, अतिक्रमण, प्रदूषण और अव्यवस्थित पर्यटन के कारण लगभग निष्प्रभावी हो चुके हैं। नलकूपों से अत्यधिक दोहन ने भविष्य के लिए भीषण जलसंकट की नींव रख दी है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की पुस्तक बूंदों की संस्कृति से साभार इस लेख को पूरा पढ़ें -
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एनसीआरबी की ‘भारत में आकस्मिक मौतें और आत्महत्याएं 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में कृषि क्षेत्र से जुड़े 10,546 लोगों ने आत्महत्या की, जो कुल आत्महत्याओं का 6.2% है।
इनमें 5,913 कृषि मजदूर (56%) हैं, जो पांच साल में सबसे अधिक है।
हर दिन औसतन 28 किसान व मजदूर जान दे रहे हैं और हर घंटे लगभग एक किसान आत्महत्या कर रहा है।
2022 के बाद से कुल संख्या में मामूली कमी के बावजूद किसानों और कृषि मजदूरों की आत्महत्याएं चिंताजनक स्तर पर बनी हुई हैं।
महाराष्ट्र में 3,824 मामलों के साथ सबसे आगे है, जहां चरम मौसम से 20 लाख हेक्टेयर से अधिक फसल प्रभावित हुई।
कर्नाटक, मध्य प्रदेश और पुडुचेरी में भी तेज वृद्धि दर्ज हुई।
पूरी रिपोर्ट पढ़ें -
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