रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोज़र चलाने की खबर बेहद अफसोसनाक है।
अगर यूनिवर्सिटी की ज़मीन या उसकी तामीर में किसी तरह की कानूनी अनियमितता हुई है, तो उसकी जांच होनी चाहिए और कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन एक ऐसे तालीमी इदारे को तोड़ देना, जहाँ हज़ारों स्टूडेंट्स अपनी तालीम हासिल कर रहे हैं, किसी भी लिहाज़ से सही नहीं कहा जा सकता।
यूनिवर्सिटी सिर्फ़ इमारतों का नाम नहीं होती, बल्कि यह इल्म, रिसर्च और नौजवानों के मुस्तकबिल की पहचान होती है। अगर कोई विवाद है, तो सरकार चाहे तो यूनिवर्सिटी को अपने अधीन लेकर चला सकती है, लेकिन उसे मिटा देना समस्या का हल नहीं है।
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि किसी भी तालीमी इदारे का सबसे बड़ा हक़ उसके स्टूडेंट्स का होता है। उनके भविष्य को किसी भी प्रशासनिक या राजनीतिक विवाद की क़ीमत नहीं चुकानी चाहिए।
@WasimAkramTyagi@myogiadityanath जहां का हाकिम पक्षपाती और कमीना हो आप उनसे उम्मीद करें कि वो भेदभाव न करे ये मुमकिन नहीं 😕
ऐसे हाकिम को हम शैतान कहते हैं 😡
@WasimAkramTyagi सड़े हुए समाज के सिर्फ़ भजपिल्ले ही बदबूदार नहीं हैं बल्कि संवैधानिक पदों पर बैठे बहुत से पुलिस वाले और जज भी बदबूदार हो गए हैं
इन ज़हरीले कीड़ों को पता होना चाहिए कि i love ❤️ Mohammad के मतवाले हर मुस्लिम हैं हरे झंडे चांद तारे हमारे धार्मिक झंडों की निशानी है
@shujaatQuadri ये सड़े हुए समाज के बदबूदार औरतें हैं इनका जैसा माहौल है वैसा ही क्रिएट करती हैं
ये मुशरिका नापाक औरतें चाहती हैं कि हमारी पाकीज़ा खवातीन इनकी तरह नंगी घूमें🫤
थू है ऐसी मानसिक बीमार मारियल सड़ी हुई औरतों पर 😡
@WasimAkramTyagi ये २ कौड़ी का योगी इंसाफ कर ही नहीं सकता इसके रग रग में मुसलमानों के खिलाफ नफ़रत भरी हुई है, ये संवैधानिक पद पर बैठा ज़रूर है लेकिन ख़ुद असंवैधानिक है 🫤
पुलिस कस्टडी में खड़े शख्स का नाम रजनीश है। रजनीश ने मेरठ के परतापुर क्षेत्र में मुस्कान नामी महिला की हत्या कर दी। रजनीश ने मुस्कान की हत्या करने के लिए उसके ही दुपट्टे का इस्तेमाल किया, दुपट्टे से गला घोंटकर मुस्कान को मार डाला।
मुस्कान की चार वर्ष पहले ही अब्दुल वाहिद के साथ शादी हुई थी। साल भर पहले रजनीश ने मुस्कान पर डोरे डालना शुरू कर दिया। मुस्कान रजनीश पर दबाव बनाने लगी कि वो अपने पति वाहिद से अलग होकर रजनीश के ही साथ रहना चाहती है। मुस्कान ‘दूसरे’ धर्म की थी, शादीशुदा भी थी। लेकिन रजनीश के लिए वो धर्म और पति दोनों ही छोड़ना चाहती थी। रजनीश उसके जिस्म से खेलता रहा, वह उससे शादी करना ही नहीं चाहता था, जब मुस्कान ने ज्यादा ज़ोर दिया तो रजनीश ने उसकी हत्या कर उसे रास्ते से हटा दिया।
पुलिस ने रजनीश को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद पता चला कि रजनीश पहले से ही शादीशुदा है, वह आदतन अपराधी भी है, उस पर एक दर्जन के करीब मुक़दमे दर्ज हैं। अब यहां से यूपी के मुख्यमंत्री के उस बयान को याद कीजिए, जो वो अक्सर देते रहते हैं। योगी कहते हैं कि महिलाओं को छेड़ा तो अगले चौराहे पर यमराज मिलेंगे। सवा यह है कि योगी आदित्यनाथ का यह दावा उस वक्त कहाँ चला जाता है जब कोई ‘रजनीश’ किसी ‘मुस्कान’ को मिटा देता है। यह अपराधी पुलिस कस्टडी में अपने पैरों पर ही खड़ा है। क्या हुआ अपराधी का नाम ‘रजनीश’ देख कर यूपी पुलिस की बंदूकों ने काम नहीं किया? बुलडोज़र भी छुट्टी पर चला गया? यही है निष्पक्षता? इतनी साफ निष्पक्षता कि इसमें भेदभाव बिल्कुल साफ दिख जाए!
एक आदमी प्रदेश की सर्वोच्च कुर्सी पर बैठने के बाद भी निष्पक्ष नहीं है। बड़ी-बड़ी डिग्रियों वाले पुलिस के ‘बड़े’ अधिकारी भी निष्पक्ष नहीं हैं! नाम, जात, शक्ल, देखकर देखकर कार्रावाई होती है। यही मदर ऑफ डेमोक्रेसी की ब्यूटी है!
कैमरे के सामने आतंकवादी देखें हैं? नहीं देखे तो गौर से देख लीजिए।
वाराणसी के अस्सी घाट पर हिंदू युवती के साथ घूमने के आरोप में आतंकवादी ने मुस्लिम युवक की पिटाई की और उससे जबरन कहलवाया "आज के बाद हम जिहादी लव जिहाद नहीं करेंगे अगर करेंगे तो लात खाएंगे।"
@AshrafFem पहले मुगलों के आगे इनकी माएं नाचती थीं अब मुसलमानों के आगे इनके बेटे नाच रहे हैं
वाह रे मुस्लिम क़ौम बग़ैर तबले के भी तुम इन्हें नचा देते हो 😆🤣😂😝
गोदी मीडिया और हिन्दुत्ववादियों का फ़र्ज़ी न्यूज़ नैरेटिव बहुत खतरनाक है। ये इतनी भयानक फ़र्ज़ी खबरें फैलाते हैं कि अच्छे से अच्छे इंसान की ज़िंदगी बर्बाद हो जाए।
अब इसी केस में देख लीजिए। इसका कहना है कि निदा खान 100 हिन्दू लड़कियों को इस्लाम धर्म में लाईं? और किसी आतंकी संगठन के संपर्क में थी। यह बात किसी के गले उतर जाएगी? इससे ज़्यादा सफ़ेद झूठ और क्या होगा?
यहाँ तक कि किसी भी जांच एजेंसी ने इस तरह का कोई दावा नहीं किया है। लेकिन हर एक मामले में एक बकरा चाहिए होता है। इस मामले में निदा खान को बलि चढ़ाया गया।
जबकि आप देखिएगा साल दो साल तक जांच होगी और कुछ हाथ नहीं लगेगा फिर निदा खान को बा-इज़्ज़त रिहा करना पड़ेगा। तब ये लोग कहाँ मुंह छुपाएंगे? एक लड़की की ज़िंदगी तबाह करके इन लोगों को क्या मिलेगा? मुसलमानों से नफरत के चक्कर में इंसानियत भी भूल चुके हैं ये लोग।