बिहार कर्मचारी चयन आयोग द्वारा जारी चतुर्थ स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (वि०सं०-05/25)—(कुल 1481 पद) में अनुसूचित जाति को मात्र 143 पद, अत्यंत पिछड़ा वर्ग को 149 पद और पिछड़ा वर्ग को 183 पद दिए गए हैं, जबकि सामान्य वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मिलाकर 974 पद आवंटित किए गए हैं।
वहीं, बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा परिवहन विभाग में “प्रवर्त्तन अवर निरीक्षक” पद की भर्ती (विज्ञापन संख्या-03/2025)—(कुल 33 पद) में स्थिति और भी गंभीर है—अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए एक भी पद निर्धारित नहीं किया गया है जबकि अनारक्षित वर्ग को 19 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 3 पद दिए गए हैं।
यह स्थिति न केवल सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) का खुला उल्लंघन है, जो पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का अधिकार सुनिश्चित करता है। जब राज्य के अपने आयोग ही संवैधानिक प्रावधानों और आरक्षण अनुपात की अनदेखी करेंगे, तो बहुजन समाज के युवाओं के साथ यह खुला अन्याय होगा।
मुख्यमंत्री @NitishKumar जी ,हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि इन भर्तियों में आरक्षण अनुपात का पालन करते हुए पदों का पुनर्वितरण किया जाए और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए पद शून्य रखने की यह भेदभावपूर्ण नीति तुरंत समाप्त की जाए।