बहराइच में कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न की घटना बेहद चिंताजनक है। मैं जल्द ही बहराइच जाऊंगा। कार्यकर्ता हमारा परिवार हैं और उनका उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
परम पूज्य बाबा साहेब के अथक प्रयासों से आज ही के दिन, 1 अक्टूबर 1941 को भारतीय सेना में महार रेजिमेंट की स्थापना की गई।
आप सभी को महार रेजिमेंट स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं!
इस गौरवशाली अवसर पर @DefenceMinIndia से हमारी मांग है कि महार रेजिमेंट सेंटर, सागर (मध्य प्रदेश) में विश्व रत्न परम पूज्य बाबा साहेब की भव्य प्रतिमा/ स्मारक स्थापित किया जाए। यह स्मारक परम पूज्य बाबा साहेब के ऐतिहासिक योगदान और महार रेजिमेंट के वीर जवानों की राष्ट्रसेवा के सम्मान का प्रतीक बनेगा।
साथ ही, सैनिकों के मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए महार रेजिमेंट सेंटर, सागर में बुद्ध विहार अथवा ध्यान केंद्र स्थापित किया जाए तथा युवाओं को महार रेजिमेंट की गौरवशाली सैन्य परंपरा से जोड़ने के लिए विशेष जागरूकता एवं प्रोत्साहन अभियान चलाया जाए।
महार रेजिमेंट की गौरवशाली परंपरा को नमन।
जय भीम! जय भारत! जय संविधान!
@rashtrapatibhvn@mygovindia@narendramodi@PMOIndia@rajnathsingh
आज जिला सम्भल की विधानसभा चंदौसी में आयोजित विशाल जनसभा में अपनों के बीच।
जनसभा को सफल बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का हृदय से आभार। अपने अपार प्यार, समर्थन और विश्वास से जनसभा को ऐतिहासिक बनाने वाली संभल की महान जनता को दिल से सलाम और अभिनंदन।
आपकी यह एकजुटता आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मिशन-2027 को नई ऊर्जा और ताकत देगी।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल!
#ASP_K_Mission2027
व्यक्तियों को कुचल कर वो, विचारों को नहीं मार सकते।
देशभक्ति, पराक्रम एवं बलिदान के अद्वितीय प्रतीक शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जी की जयंती पर उन्हें क्रांतिकारी सलाम।
जोधपुर एम्स में प्रथम वर्ष के PG रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राज नरेश यादव जी की आत्महत्या ने देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में रेजिडेंट डॉक्टरों की कार्यस्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उनके साथियों के अनुसार, डेंगू से पीड़ित होने के बाद उन्होंने छुट्टी मांगी थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद भी उनसे लगातार 36 घंटे तक ड्यूटी कराई गई। लंबे कार्य घंटे, अत्यधिक कार्यभार और पर्याप्त मानव संसाधन का अभाव डॉक्टरों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। इन्हीं समस्याओं को लेकर रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर हैं और कार्यस्थितियों में सुधार की मांग कर रहे हैं।
जो डॉक्टर दिन-रात मरीजों की जान बचाने में जुटे हैं, उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और मानवीय कार्य वातावरण सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यह पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
@MoHFW_INDIA और संस्थान प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रेजिडेंट डॉक्टरों से तय मानकों के अनुरूप ड्यूटी ली जाए, पर्याप्त डॉक्टरों की उपलब्धता हो, कार्यभार का संतुलित वितरण हो और उन्हें पर्याप्त आराम तथा आवश्यक मानसिक स्वास्थ्य सहायता मिले।
डॉ. राज नरेश यादव जी की आत्महत्या की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो तथा यह भी तय किया जाए कि संस्थान में ऐसी कार्यस्थितियां क्यों बनीं और भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
डॉ. राज नरेश यादव जी के परिजनों के साथ हमारी गहरी संवेदनाएँ हैं। प्रकृति शोक संतप्त परिवार, परिजनों एवं उनके सहकर्मियों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
@mygovindia@JPNadda@aiims_jodhpur
चुनाव आयोग पर उठे गंभीर सवालों का जवाब अब देश को चाहिए।
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति दर्ज की। मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, वोटर डेटा के केंद्रीकरण और चुनावी सॉफ्टवेयर से जुड़े कदमों पर गंभीर आपत्तियां सामने आईं, जिनमें कुछ को “अनधिकृत” और “अवैध” बताया गया।
जब चुनाव आयोग के भीतर ही इतने गंभीर मतभेद और आपत्तियां दर्ज हुई हैं, तो चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
माननीय #SupremeCourtOfIndia को इन तथ्यों का संज्ञान लेकर पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।
और यदि चुनाव आयोग इन गंभीर सवालों का संतोषजनक जवाब देने में विफल रहता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
मतदाता का अधिकार सर्वोपरि है। लोकतंत्र में जवाबदेही से कोई ऊपर नहीं हो सकता।
#SupremeCourt
#CJISuryaKant
अंबेडकरनगर जिले के बरियावन-किछौछा मार्ग पर कल 21 सितंबर की रात भूमाफिया द्वारा असलहाधारियों की मौजूदगी में तीन जेसीबी लगाकर 15 दलित-पिछड़े परिवारों के मकान और दुकानें जमींदोज किए जाने की घटना बेहद निंदनीय है। आधी रात में इस तरह असलहों के दम पर घर-दुकानें ढहाया जाना प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रभावितों के अनुसार, 50-60 नकाबपोश और असलहाधारी लोग तीन जेसीबी के साथ पहुंचे, रास्ता दोनों ओर से घेर लिया और असलहे दिखाकर परिवारों को धमकाया। लोगों को अपना सामान तक निकालने का मौका नहीं मिला और कई परिवार जान बचाकर घरों से बाहर निकलने को मजबूर हुए। घंटों तक चली इस कार्रवाई के बावजूद पुलिस मौके पर क्यों नहीं पहुंची?
पीड़ितों और स्थानीय लोगों ने पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मिलीभगत का आरोप लगाया है। इतने बड़े पैमाने पर हुई इस कार्रवाई की सच्चाई सामने लाने के लिए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच जरूरी है। घटना के 24 घंटे बाद भी किसी आरोपी की पहचान न होना पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, आधी रात को तीन जेसीबी और 50-60 असलहाधारी लोग घंटों तक मकान-दुकानें ध्वस्त करते रहे, आपकी पुलिस को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?
@UPGovt से हमारी मांग है कि पीड़ित परिवारों को तत्काल सुरक्षा, राहत और न्याय दिया जाए। आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी हो तथा पुलिस-प्रशासन की भूमिका और संभावित मिलीभगत की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की जिला इकाई ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों से बात कर पीड़ितों को शीघ्र न्याय एवं उचित राहत दिलाने की मांग की।
बिहार के जमुई में एक नाबालिग छात्रा और उसके मित्र के साथ छेड़खानी एवं अभद्र व्यवहार की घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है। आरोपियों द्वारा इस अमानवीय कृत्य का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल करना बिहार के उस जंगलराज का उदाहरण है, जहां अपराधी बेखौफ हैं और कानून का कोई भय दिखाई नहीं देता।
@officecmbihar आरोपियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति ऐसी घटना को अंजाम देने के बारे में सोचने से पहले कानून के डर को महसूस करे। साथ ही, पीड़ित नाबालिगों की सुरक्षा, गरिमा और निजता सुनिश्चित की जाए।
IIT-Bombay के बीटेक (एनर्जी साइंस) द्वितीय वर्ष के दलित छात्र साहिल वाकोड़े की असामयिक मृत्यु ने देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, सम्मान और संस्थागत जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
साहिल जी की आत्महत्या के अगले दिन कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी बयान में परीक्षा के दौरान उनके पास मोबाइल फोन मिलने की बात कही गई। लेकिन साहिल की मृत्यु के अगले दिन प्रशासन द्वारा यह बयान जारी किया जाना और पूरे मामले को मुख्य रूप से मोबाइल मिलने की घटना से जोड़ना कई गंभीर सवाल खड़े करता है और मामले को लेकर संदेह को और गहरा करता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि परीक्षा कक्ष में साहिल जी के आसपास अन्य परीक्षार्थी मौजूद थे, लेकिन अभी तक उनमें से किसी अन्य परीक्षार्थी द्वारा उनके पास मोबाइल फोन होने की बात कहे जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
वहीं, कॉलेज प्रशासन के नियमानुसार, यदि परीक्षा के दौरान किसी परीक्षार्थी के पास मोबाइल फोन या अन्य प्रतिबंधित सामग्री मिलती है, तो संबंधित सामग्री जब्त कर परीक्षार्थी को नई उत्तरपुस्तिका देकर परीक्षा पूरी कराई जाती है और आगे की कार्रवाई के लिए मामला कमेटी के सामने रखा जाता है।
साहिल के परिजनों और साथी छात्रों का कहना है कि उन्हें प्रोफेसर द्वारा परीक्षा कक्ष से बाहर ले जाकर धमकाया गया और एक वर्ष के लिए निलंबित करने की बात कही गई। परिवार ने उनके साथ पहले भी जातिगत भेदभाव और संस्थागत प्रताड़ना किए जाने की भी बात कही है।
18 सितंबर की शाम करीब 6 बजे साहिल ने आत्महत्या कर ली। इसके कुछ ही समय बाद @iitbombay के छात्र इस घटना से चिंतित होकर कैंपस में एकत्र हुए और कैंडल मार्च निकाला। इसके बाद से छात्र धरने पर बैठे हुए हैं। धरने पर बैठे छात्रों ने अपनी प्रमुख मांगों में IIT के निदेशक और डीन (छात्र मामले) के इस्तीफे, साहिल जी के परिवार को मुआवजा, IIT प्रशासन की सहमति से प्रोफेसर दुल्ला के खिलाफ FIR दर्ज करने, प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने और सभी छात्रों के साथ ओपन हाउस बैठक आयोजित करने की मांग रखी है।
हम @EduMinOfIndia से मांग करते हैं कि घटनाक्रम से जुड़े सभी CCTV फुटेज, परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाए। सभी संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएं और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो।
देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ जातिगत भेदभाव, अपमान या किसी भी प्रकार की संस्थागत प्रताड़ना की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। छात्रों की शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस दुःख की घड़ी में हमारी गहरी संवेदनाएँ साहिल के शोकाकुल माता-पिता और पूरे परिवार के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दे।
#JusticeForSahilWakode
आज जिला बस्ती की रुधौली विधानसभा में आयोजित विशाल जनसभा में अपनों के बीच।
जनसभा को सफल बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का हृदय से आभार। अपने अपार प्यार, समर्थन और विश्वास से जनसभा को ऐतिहासिक बनाने वाली बस्ती की महान जनता को दिल से सलाम और अभिनंदन।
आपकी यह एकजुटता आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मिशन-2027 को नई ऊर्जा और ताकत देगी।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल!
#ASP_K_Mission2027
#UPMaangeChandraShekharAzad
#सम्पूर्ण_भागीदारी_आंदोलन
#24_सितंबर_चलो_जंतर_मंतर
आज जिला सीतापुर की मिश्रिख विधान सभा के मेला मैदान में आयोजित विशाल जनसभा में अपनों के बीच।
जनसभा को सफल बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का हृदय से आभार। अपने अपार प्यार, समर्थन और विश्वास से जनसभा को ऐतिहासिक बनाने वाली प्रतापगढ़ की महान जनता को दिल से सलाम और अभिनंदन।
आपकी यह एकजुटता आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मिशन-2027 को नई ऊर्जा और ताकत देगी।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल!
#ASP_K_Mission2027
#UPMaangeChandraShekharAzad
#सम्पूर्ण_भागीदारी_आंदोलन
#24_सितंबर_चलो_जंतर_मंतर
महामना रामस्वरूप वर्मा जी के साथ मिलकर ‘अर्जक संघ’ की नींव रखने वाले, वैज्ञानिक चिंतक, मानववादी विचारक, पूर्व सांसद महाराज सिंह भारती जी के स्मृति दिवस पर उन्हें शत-शत नमन एवँ विनम्र आदरांजलि।
जय अर्जक, जय भीम, जय मंडल, जय जोहार, जय संविधान।
लखनऊ के ईको गार्डन में पूरे प्रदेश से आए पंचायत सहायक 7 सितंबर से अपनी जायज़ मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं। आज अपने वायदे के अनुसार उनके बीच पहुँचा।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) उनके हक़ और संघर्ष में मजबूती से उनके साथ खड़ी है।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल! जय संविधान!
#पंचायत_सहायक_का_मानदेय_बढ़ाओ
#पंचायत_सहायक_नियमित_करो
23 जून को जंतर-मंतर की घटना पर पुलिस कहती है कि संजय कुमार की चोटें सामान्य थीं और खोपड़ी में दरार की बात निराधार है। लेकिन आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में वह खुद “7 टांके”, “मरने की स्थिति” और “307 बनता था” जैसी बातें कह रहा हैं।
वह यह भी दावा कर रहा हैं कि संजय कुमार की बेटी निशु, थाने के बाहर खड़े होकर कह रही थी कि “अगर मेरे बाप को इंसाफ नहीं मिला तो हम जहर खाकर मर जाएंगे।” साथ ही उनका दावा है कि वे जेल तक नहीं गए और “कपिल मिश्रा अपने बड़े भाई हैं”, “चिराग पासवान अपने बड़े भाई हैं” तथा “सबका सपोर्ट है।"
तो सवाल है कि अगर घायल की हालत इतनी गंभीर थी और 7 टांके लगे थे, तो पुलिस की MLC में चोटें सामान्य कैसे बताई गईं? अगर धारा 307 का मामला बनता था, तो आरोपी जेल क्यों नहीं गया?
“कपिल मिश्रा के फोन के बाद छोड़ने का दावा सच है या झूठ? क्या पुलिस इसकी निष्पक्ष जांच करेगी? जब राजनीतिक संरक्षण का इतना स्पष्ट दावा सामने आ रहा है, तो पुलिस यह क्यों नहीं स्पष्ट कर रही कि इस मामले में किसी अनुचित प्रभाव या हस्तक्षेप की कोई भूमिका थी या नहीं?”
आखिर पुलिस के रिकॉर्ड और आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में इतना बड़ा अंतर क्यों है? हमें इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अपने पीड़ित परिवार को न्याय दिला कर रहेंगे। जय भीम, जय भारत।।
आज जिला जौनपुर की मछलीशहर विधान सभा में आयोजित विशाल जनसभा में अपनों के बीच।
जनसभा को सफल बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का हृदय से आभार। अपने अपार प्यार, समर्थन और विश्वास से जनसभा को ऐतिहासिक बनाने वाली जौनपुर की महान जनता को दिल से सलाम और अभिनंदन।
आपकी यह एकजुटता आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मिशन-2027 को नई ऊर्जा और ताकत देगी।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल!
#ASP_K_Mission2027
उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में SC/ST विद्यार्थियों की विशेष सीट व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आंदोलन कर रहे सभी विद्यार्थियों को मेरी हार्दिक बधाई।
इन चारों मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पूर्व की सीट व्यवस्था जारी रखने का @UPGovt का निर्णय विद्यार्थियों के संघर्ष और उनकी एकजुटता की बड़ी जीत है।
हम पिछले वर्ष से लगातार इस महत्वपूर्ण मुद्दे को सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाते रहे हैं। विशेष घटक योजना (Special Component Plan) के उद्देश्य से स्थापित इन मेडिकल कॉलेजों में SC/ST विद्यार्थियों की विशेष सीट व्यवस्था की रक्षा करना सामाजिक न्याय और उनके अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है।
इस संघर्ष में आवाज उठाने वाले सभी विद्यार्थियों और साथियों को मैं बधाई देता हूं। आपकी एकजुटता ने सरकार को मौजूदा व्यवस्था जारी रखने का निर्णय लेने के लिए मजबूर किया है।
हालांकि, यह केवल तत्काल राहत है। भविष्य में किसी प्रशासनिक या न्यायिक बदलाव से इस व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाने के लिए इसे कानून के माध्यम से स्थायी कानूनी संरक्षण देना जरूरी है।
हमारा स्पष्ट मानना है कि इन मेडिकल कॉलेजों की विशेष सीट व्यवस्था को केवल शासनादेश के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार को इसके लिए मजबूत कानूनी प्रावधान करना चाहिए, ताकि SC/ST विद्यार्थियों के अधिकार और प्रतिनिधित्व भविष्य में भी सुरक्षित रहें।