📖 औक़ात की कीमत | एक ऐसी कविता जो हर पुरुष के अनकहे संघर्ष को शब्द देती है... ❤️🩹
क्या सचमुच प्रेम बिना शर्त मिलता है, या उसे कमाना पड़ता है?
यह कविता उन भावनाओं की कहानी है जिन्हें अक्सर शब्द नहीं मिलते। संघर्ष, ज़िम्मेदारियाँ, आत्मसम्मान और प्रेम की तलाश... हर पंक्ति शायद आपको अपने जीवन का एक हिस्सा लगे।
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शीर्षक: दुआ का एक सफ़ेद धागा
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हर सुबह,
मैं अपनी उलझनों को
तकिए के नीचे नहीं,
हथेलियों की लकीरों में रखकर
ऊपर वाले के हवाले कर देता हूँ...
जैसे कोई माँ
स्कूल जाते बच्चे के माथे पर
चुपके से एक दुआ रख देती है।
बस इतना यक़ीन रहता है,
कि कोई है...
जो मेरे टूटे हुए दिनों को भी
धीरे-धीरे सिल रहा है,
बिना आवाज़ किए।
मैं हर रोज़
खुद को थोड़ा-सा बेहतर करने की
एक छोटी-सी कोशिश पहनता हूँ,
जैसे सर्दियों में धूप
धीरे से कंधों पर उतरती है।
हाँ,
कभी मंज़िल जल्दी नहीं मिलती,
पर रास्ते अगर सच्चे हों,
तो वक्त भी थककर
एक दिन दरवाज़ा खटखटा ही देता है।
जो हमारा है,
वो कहीं जाता नहीं...
बस किस्मत की अलमारी में
थोड़ी देर टंगा रहता है।
शायद इसी लिए
दुआ मुझे सुकून देती है,
मेहनत रास्ता दिखाती है,
और सब्र...
सब्र मेरी उँगली पकड़कर कहता है,
चलो,
अभी सफ़र बाकी है।
✍️ आशुतोष पाणिग्राही।
शीर्षक: “एक का सन्नाटा”
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प्रेम की तीन दिशाएँ होती हैं —
एक…
अनेक…
और फिर, अनंत की ख़ामोशी।
अनेक में बिखरा हुआ प्रेम,
जैसे हवा में उड़ती रेत,
हथेलियों से फिसलता है,
और मन को
धीरे-धीरे टुकड़ों में बाँट देता है।
हर टुकड़ा किसी नाम से जुड़ता है,
हर नाम एक आवाज़ बनता है,
और शोर इतना बढ़ जाता है
कि भीतर की खामोशी
कहीं खो जाती है…
फिर एक दिन,
कोई थककर बैठता है
अपने ही दिल की चौखट पर—
और देखता है,
कि प्रेम का असली घर
भीड़ में नहीं,
एकांत में बसता है।
एक में ठहरा हुआ प्रेम,
जैसे गहरा पानी,
जिसमें डूबने पर
तुम खुद को नहीं खोते,
बल्कि पा लेते हो।
और जब वही एक,
अपनी सीमाओं को छोड़कर
अनंत की ओर मुड़ता है—
तो प्रेम नहीं रहता सिर्फ़ एहसास,
वो बन जाता है
मुक्ति का दरवाज़ा…
जहाँ
न कोई नाम होता है,
न कोई बंधन—
सिर्फ़ एक सन्नाटा,
जो सब कुछ कह देता है।
— ✍️ आशुतोष पाणिग्राही।
शीर्षक: मनुष्य का मोल
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प्रकृति ने दिया हमें ज्ञान और उजियारा,
पर हम ही भूल गए उसका सच्चा सहारा।
जब बुद्धि से रचते हैं विनाश का व्यापार,
तब गिरता है इंसान अपने ही स्तर के पार।
जिसे छोटा समझा, वही रेशम बुन जाता,
अपने जीवन से भी संसार को सजा जाता।
हम ऊँचे होकर भी अक्सर राह भटक जाते,
अपने ही कर्मों से खुद को छोटा कर जाते।
सृजन में ही छिपा है जीवन का असली मान,
विनाश की राह बस देती है क्षणिक पहचान।
जो देता है जग को, वही सच में बड़ा होता,
जो छीनता रहता है, वो भीतर से खोटा होता।
— ✍️ आशुतोष पाणिग्राही।
🌅 Jai Jagannath 🌅
As the first rays touch His divine abode, may your day be filled with peace, strength, and purpose.
Today is not just a new morning, it’s a blessing to rise, to try again, and to move forward with faith.
May Lord Jagannath guide your path and protect your every step.
Have a powerful and positive day ahead. 🙏
सुप्रभात ☀️
आज की सुबह तुम्हें बस एक बात याद दिलाए –
कोई मेहनत अधूरी नहीं होती,
सिर्फ उसका नतीजा थोड़ा समय लेता है।
इस दिन को अपने लक्ष्यों के लिए समर्पित समय की तरह जीओ,
और देखोगे कि धीरे‑धीरे वही कर्म तुम्हारी जीत की नींव बन जाएगा। 🌿
— ✍️ आशुतोष पाणिग्राही।
Ishan Kishan brushed off Kirti Azad 's criticism of the team India ( Jay Shah , Surya Kumar Yadav , Gautam Gambhir ) Bal Hanuman temple visit !
Saying : We've achieved something huge, Written History -focus on the joy & memories. T20WorldCup 🏆
@klassic_prasant Why to drag cricketers into the dirty politics? Let them play pure cricket & bring glory to our country. Ishan did the right thing.