सोनम वांगचुक, जिसने कभी अपने लिए नहीं माँगा, कुछ कि पद चाहिए, सत्ता चाहिए।
अपनी ज़िंदगी देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ते रहे है और 15-16 दिनों से अनशन पर बैठे हैं!
अपने लिए नहीं, देश के लिए। देश के बच्चों के भविष्य के लिए! उसके बाद भी देश के नेताओं की सोई हुई संवेदनाएँ नहीं जाग पा रही।
सत्ता की ख़ामोशी बरकरार है।
भूख हड़त��ल और अनशन भी अगर व्यवस्था को सुनाई नहीं दे रहा, तो एक आम नागरिक की आवाज़ की कीमत क्या ही होगी?
अब दर्�� सिर्फ़ यह नहीं कि एक व्यक्ति अनशन पर है, बड़ा दर्द यह है कि देश धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुँच रहा है जहाँ जनता की पीड़ा का महत्व खत्म है और उस पर सत्ता हावी है।
सोचिए, आज अगर एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी की जा सकती है, जिसने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, तो कल बेरोज़गार युवा, न्याय की गुहार लगाता परिवार, किसान, छात्र या कोई भी आम नागरिक किस उम्मीद से अपनी तकलीफ़ के लिए लड़ पाएगा और कौन उसकी सुनेगा?
���ोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव है क्या? अगर सत्ता अपने शांत नागरिक की आवाज़ नहीं सुन रही, तो ये लोकतंत्र पर सवाल नहीं है?
और अगर वह आवाज़ भी अनसुनी होने लगे! तो यह चिंता सिर्फ़ पूरे देश को होनी चाहिए।
Be stand with Sonam Wangchuk
"मेरे शरीर से चर्बी के साथ मांसपेशियां भी कम हो गई हैं। हड्डियां दिखने लगी हैं, लेकिन मैं अब भी खुद को ऊर्जावान महसूस कर रहा हूं।" — @Wangchuk66
जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 13 दिन पूरे होने पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका उपवास अब स्थिर अवस्था में पहुंच गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर���ण विरोध-प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
Sonam Wangchuk जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
आंदोलन की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है, जिसमें परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं को लेकर जवा��देही तय करने की मांग की जा रही है।
मुर्गी मारकर खाओगे तो चिकन पार्टी,
बकरा मारकर खाओगे तो मटन पार्टी,
और अगर युवाओं के सपनों और भविष्य को कुचलोगे,
तो लोग उसे "भारतीय जनता पार्टी" कहेंगे।
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चतुर्थ श्रेणी भर्ती ✨✨
कुछ प्रमुख मांगे जिन पर विचार किया जाएं तो वाकई में सराहनीय कार्य होगा।
~ प्रोबेशन में पूर्ण वेतन 💰
~ पे लेवल L 2 से L 3 💸
और भी कई मांगे हैं जिन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
जंतर मंतर पर आमरण अनशन कर रहे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के दो छात्र कार्यकर्ताओं को अनशन के 12वें दिन अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है, जिससे आंदोलनकारियों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है।
- @PeekTV_in
A Delhi Police official in plain clothes was secretly recording videos of protesters.
When I asked him to identify himself, he claimed to be a farmer who had come to support the protest.
Why are the authorities secretly documenting the people attending the protest and why are they hiding their identity if they are not doing anything wrong?
हम दिल्ली पुलिस से हाथ जोड़कर अनुरोध करते हैं कि प्रदर्शन स्थल पर तंबू लगाने की अनुमति दी जाए।
जो छात्र पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, उन्हें कम से कम बारिश से बचने का अधिकार तो मिलना ही चाहिए।
मानवीय संवेदनाओं के लिए थोड़ी-सी जगह दीजिए।
— @abhijeet_dipke 🇮🇳
For the past three days, our team has been waiting for the police’s approval to set up tents. It rained throughout the night, and those on hunger strike couldn’t sleep. All their belongings are completely drenched. We’ve been waiting since 11 a.m. for the police to allow us to take the tarpaulin inside.
जिस शिक्षा विभाग ने इतनी बड़ी भर्ती का काम तीव्र रफ़्तार से करवाया आज उस विभाग ने हमको अपने में समाहित कर लिया चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में आभार - शिक्षा विभाग राजस्थान 🙏🙏
धन्यवाद सीताराम जी