छात्रों की बात - छात्रों के साथ
मैंने पहले भी कहा है कि मैं और हमारी सरकार झारखंड सहित पूरे देश में छात्रों और युवाओं से जुड़ी समस्याओं के ठोस एवं व्यावहारिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
रांची में मेरे युवा साथियों के साथ-साथ, राज्य के विभिन्न जिलों में रहने वाले युवाओं और छात्रों के सुझाव भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए सरकार सभी जिलों के छात्र-छात्राओं की राय और सुझाव प्राप्त करेगी, ताकि समाधान व्यापक और समावेशी हो।
हम शीघ्र ही राज्य और देशभर के छात्रों, शिक्षाविदों तथा नीति-निर्माताओं के सुझाव एकत्रित कर, समयबद्ध तरीके से आवश्यक सुधारों और सकारात्मक बदलावों की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।
हवा हवाई दावों के बाद
अब पेश है फर्राटा पंखे
यह 4200 करोड़ की लागत से बना वही लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे है
जो 2 दिन के अंदर बार बार ढह रहा है
अब पंखे से सुखाया जा रहा है
BJP को बहुत डर लगता है।
एक तरफ वो प्रयागराज में 'छात्रों की गूंज' से डर रही है, इसलिए उसे रोकना चाहती है। दूसरी तरफ अमित शाह सदन में आकर जवाब देने से डर रहे हैं।
: कांग्रेस महासचिव और सांसद श्रीमती @priyankagandhi जी
The Chhatron Ki Goonj event is happening tomorrow in Prayagraj.
If anyone wants to stop it, let them try. But we will go ahead with it.
: Congress General Secretary (Org.) Shri @kcvenugopalmp
माननीय मंत्री श्री @kumarsudivya जी ने बीजेपी के इस षड्यंत्र का पर्दाफाश कर दिया है।
आंदोलन छात्रों का है, तो बीच में बीजेपी के एजेंट का नाम क्यों?
वार्ता केवल और केवल हमारे छात्र भाइयों-बहनों से होगी, बीजेपी के सियासी दलालों से नहीं।
ये तो इक रस्म-ए-जहाँ है जो अदा होती है
वरना सूरज की कहाँ सालगिरह होती है 🔥
@ShayarImran जी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ 💐
प्रभु आपको मुस्कुराने के नित नए अवसर प्रदान करें 🙏
The devastation caused by landslides and flash floods across Nagaland and Arunachal Pradesh is heartbreaking.
My deepest condolences to the families who have lost their loved ones. I pray for the speedy recovery of those injured, and the safety of everyone affected.
I urge Congress workers to provide all possible support to relief and rescue efforts in this hour of crisis.
झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार से बातचीत के लिए 11 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल बना दिया है .
सरकार ने छात्रों से बात करने के लिए चार मंत्रियों की एक कमेटी बना दी है .
इस कमेटी में झारखंड के उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार भी हैं . छात्र और सरकार के बीच आज बातचीत होनी थी लेकिन हो नहीं पाई है .
मैंने सुदिव्य कुमार से छात्रों की तरफ से उठाए हुए सवाल पूछे हैं .
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर
लोकतंत्र ऐसे चलता है - तानाशाहियों से नहीं - कर्नाटक के मुख्यमंत्री @DKShivakumar और गृहमंत्री @PriyankKharge प्रोटेस्ट 🪧 कर रहे छात्रों से संवाद कर समस्या का हल मिलकर निकालते हुए 🇮🇳❤️👍.
हल संवाद है - पेलेट गन-AK-47,आँसू गैस,शॉक बैटन या पुलिस की लाठी नहीं @narendramodi . #SackShah
आज हेमन्त जी के साथ खेलगांव, रांची स्थित हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 में शामिल हुई।
प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। हम सभी मिलकर अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और हरियाली से समृद्ध झारखण्ड के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएं।
आज इलाहाबाद हाई कोर्ट में जौहर यूनिवर्सिटी के फाउंडर मोहम्मद आज़म ख़ान और उनके बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्लाह आज़म की जमानत की मांग की जाने वाली याचिका पर सुनवाई होनी थी लेकिन जस्टिस विक्रम डी चौहान ने सुनवाई के वक़्त ख़ुद को सुनवाई से अलग कर मामले को मुख्य न्यायधीश को ट्रांसफर कर दिया।
जज साहब ने 15 जुलाई को सुनवाई की थी और अगली तारीख़ 6 अगस्त दे दी, आज़म ख़ान के वकीलों और परिजनों ने 20 दिन इंतिज़ार किया और आज अदालत पहुंचे तो जज साहब ने बिल्कुल मौके पर ख़ुद को सुनवाई से अलग कर लिया, जज साहब चाहते तो मामले को पिछली तारीख़ यानी 15 जुलाई को ही इस मामले से अलग कर सकते थे ताकि अब तक मामला की सुनवाई हो जाती, लेकिन साहब ने ऐसा नहीं किया क्योंकि मामले को खींचना भी था।
ख़ैर जज साहब की मामले से दूरी बनाने की मजबूरी जो भी रही हो लेकिन साफ़ जाहिर है कि अदालतों में सरकारों का खौफ़ है, इसलिए जज अब मामलों से दूरी बनाना ही बेहतर विकल्प समझते हैं, और यह दूरी उन्हीं केसों में बनाई जाती हैं जिनमें पहली ही सुनवाई में जमानत देने का आधार बनता हैं लेकिन दबाव के कारण जज फ़ैसले देने का भी फैसला नहीं ले पा रहे हैं, और फैसला लिया जाता है तो मामलों से दूरी बनाने का।
यह पहला मामला नहीं जब किसी जज ने आज़म ख़ान और उनके बेटे के मामले की सुनवाई से दूरी बनाई हो, इससे पहले 21 नवंबर 2025 को यतीमखाना केस में भी जो कि आज़म ख़ान से ही जुड़ा हुआ था, उसकी सुनवाई से भी जज समीर जैन ने ख़ुद को अलग कर मामले को मुख्य न्यायधीश के पास भेज दिया था।
साबित हैं जज साहब आज़म ख़ान के मामले को भांप चुके हैं जिसमें आज़म ख़ान और उनके बेटे को बरी या जल्द जमानत देने के अलावा कोई रास्ता नहीं था, लेकिन जज साहब ने जमानत न देकर ख़ुद को मामले की सुनवाई से अलग कर मुख्य न्यायधीश के पास भेजना मुनासिब समझा। अगर जज साहब को इस मामले से ख़ुद को अलग ही करना था तो अलग होने वाला फैसला कई महीनों में क्यों लिया गया? क्यों न ख़ुद को मामले की शुरुआत या जब मुख्य न्यायधीश ने अदालत में भेजा था उसी दौरान क्यों नहीं लौटाया गया? अब नागरिक अदालतों का नहीं बल्कि अदालत ही नागरिकों का समय बर्बाद करती हैं, अदालत का नागरिक समय बर्बाद करता है तो अदालत द्वारा नागरिकों पर जुर्माना और FIR तक दर्ज कर देती हैं लेकिन नागरिकों अगर अदालत ही नागरिकों का समय बर्बाद करें तो किस पर जुर्माना और किस पर FIR होनी चाहिए यह भी अदालतों को बताना चाहिए।
ये है भाजपाई तरक़्क़ी की नई हवा… कुछ दिनों पहले ही जिसका उद्घाटन हुआ हो उस सड़क को मरम्मत की ज़रूरत पड़ गई और एक्सप्रेस स्पीड से मरम्मत को सुखाने के लिए पंखे का इस्तेमाल किया जा रहा है ये भी हास्यास्पद है। 2-3 हफ़्ते में ही जिस एक्सप्रेसवे का दम उखड़ने लगा है उस पर चलने का जोखिम कौन उठाएगा?
सवाल ये भी है कि ‘अटल प्रोग्रेस वे’ योजना में ही रहेगा या कभी बनेगा भी… या काग़ज़ों में बनकर उसका ‘हिस्सा-बाँट’ हो चुका है।
भाजपा राज में हुआ हर निर्माण चलता कम है… धँसता, ढहता, गिरता ज़्यादा है।
असम के बाढ़ पीड़ितों के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए 3 करोड़ रुपये...
आइए, इस मुश्किल समय में असम के बाढ़ प्रभावित भाइयों-बहनों की यथासंभव सहायता करें।
@HemantSorenJMM