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मेरिट लिस्ट में नाम, फिर भी दाख़िला नहीं: पटना विश्वविद्यालय में पीएचडी अभ्यर्थियों का संघर्ष
पटना: एक स्टूडेंट नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी से शुरू होकर पहली से दसवीं कक्षा होते हुए बारहवीं और ग्रैजूएशन के बाद पोस्ट-ग्रैजूएशन की बाधा पार करती है। वह इन तमाम ऊबड़-खाबड़ रस्तों से गुज़रते हुए पीएचडी के द्वार पर आ खड़ी होती है।
शिक्षा में डिग्री के इस अंतिम द्वार पर कहां तो उनका स्वागत होना था, लेकिन उन्हें मिलता है – बंदूक़-धारी दरबान, गड़बड़ी और भ्रष्टाचार में लिप्त क़ानून के साथ ही वह संरचना जो पक्षपात में डूबी हुई है।
बिहार को अंग्रेज़ी में द लैंड ऑफ़ द बुद्धा कहते हैं। अंग्रेज़ी में बिहार के बारे में कुछ भी कहिए – सुनने में अच्छा ही लगता है। यहाँ की राजधानी स्थित पटना विश्वविद्यालय में पीएचडी अड्मिशन में द्वार पार कर लेने के बाद जब स्टूडेंट्स को कहा गया कि आप अंदर नहीं आ सकते तब यहाँ जयप्रकाश नारायण अनुशद भवन में उन्होंने प्रदर्शन कर दिया। वे भूख हड़ताल पर चले गए।
भूख हड़ताल पर बैठे इन स्टूडेंट्स ने समिति बनाई। रिसर्च स्कॉलर संघर्ष समिति के साथ-साथ कुछ संगठनों—AISF और PFVC— ने PHD में हो रहे कथित रूप से हो रही गड़बड़ी एवं पक्षपात को लेकर अपनी आवाज़ें बुलंद कीं।
“पटना विश्वविद्यालय के पीएचडी नामांकन में हमने फ़ॉर्म भरा। इंटर्व्यू दिया। मेरिट-लिस्ट बनाई गई, और मेरिट-लिस्ट में नाम आया। फिर मेरिट-लिस्ट से नाम हटा दिया गया,” अभ्यर्थी, निवास कुमार ने बैनर तले चल रहे भाषण के दौरान कहा।” अंग्रेज़ी में इसी भाव को “बज़-किल” कहते हैं – यानी, सारी मेहनत पर गोबर फेर देना।
निवास कुमार का मेरिट-लिस्ट में दसवें नंबर पर नाम था। प्रशासन ने उनको अड्मिशन देने के बजाय बज़-किल दिया है।
दूसरे उम्मीदवार भी कुछ इसी तरह का आरोप लगा रहे हैं। वे कह रहे हैं कि विश्वविद्यालय ने फ़ॉर्म भरवा लेने और इंटर्व्यू लेने के बाद मेरिट-लिस्ट में नाम आने के बावजूद उन्हें प्रवेश देने से मना कर दिया।
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घुसपैठ पर बनी कमेटी के अध्यक्ष कौन, रिशुश्री गिरफ्तार, पुलिस की तलाशी, TRE-4 अपडेट, हरा गमछा | बिहार इस हफ्ते 19
केंद्र सरकार ने अवैध घुसपैठ और जनसंख्या बदलावों के अध्ययन के लिए हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन का गठन किया है। इस समिति में कौन-कौन है? वहीं बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में रिशुश्री की गिरफ्तारी के बाद नए खुलासे सामने आए हैं। इसके अलावा मोकामा में पुलिसकर्मियों की तलाशी वाले वायरल वीडियो का पूरा सच, TRE-4 शिक्षक भर्ती पर ताज़ा अपडेट और AI समिट में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान पर छिड़ा राजनीतिक विवाद भी इस एपिसोड में शामिल है।
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BJP में शामिल हुईं Ritu Jaiswal, 2025 में की थी RJD से बग़ावत
भाजपा में शामिल हुईं पूर्व राजद महिला मोर्चा अध्यक्ष रितु जायसवाल। 2020 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव राजद के टिकट पर लड़ीं, लेकिन हार गई थीं। 2025 में टिकट नहीं मिलने पर राजद से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा, जिसमें भी हार का सामना करना पड़ा।
The Journey Under Watch: क्या मदरसा पढ़ने जा रहे बच्चों पर अब शक किया जाने लगा है? बिहार के अररिया से महाराष्ट्र और ओडिशा जा रहे नाबालिग मदरसा छात्रों को रास्ते में रोका गया, पूछताछ हुई, दस्तावेज़ जांचे गए और ट्रेन से उतार कर बाल गृह भेज दिया गया। परिवारों, बच्चों और अधिकारियों से बातचीत के आधार पर यह ग्राउंड रिपोर्ट पूछती है—गरीबी के चलते शिक्षा के लिए दूर भेजे जाने वाले इन बच्चों का सफर डर और निगरानी में क्यों बदल रहा है?
@tnzl_ | Watch: https://t.co/36vsKp2AnF
बिहार: रेलवे भर्ती प्रदर्शन में चार साल बाद क्यों हुई छात्र नेता ओसामा की गिरफ़्तारी?
छात्र नेता ओसामा ख़ुर्शीद 16 मई की शाम गंगा-जेपी पथ पर अपने कुछ साथियों के साथ थे। तभी पटना पुलिस की दो गाड़ियाँ उनके पास आकर रुकीं। गाड़ियों से 8 से 10 पुलिसकर्मी उतरे और उन्हें गिरफ़्तार कर लिया। पहले तो ओसामा और उनके साथियों को कुछ समझ ही नहीं आया, क्योंकि हाल में ओसामा के ख़िलाफ़ किसी तरह की कोई शिकायत थाने में दर्ज नहीं हुई थी।
ओसामा के दोस्त सादिक़ रज़ा कहते हैं, “हमने जब पुलिस से पूछा कि उन्हें क्यों गिरफ़्तार किया जा रहा है, तो उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा कि मुक़दमा है।”
पुलिस उन्हें कदमकुआँ थाने लेकर गई। ओसामा के दोस्त भी तुरंत थाने पहुँचे, जहाँ पता चला कि चार साल पुराने एक मामले में ओसामा की गिरफ़्तारी की गई है।
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ईंट-भट्ठों से ज़हरीली होती हवा: ग्रामीण बिहार में एनीमिया और प्रदूषण का गहरा रिश्ता
शायद आपको यकीन न हो, पर बिहार के गांवों की हवा अब दिल्ली जैसी ज़हरीली हो चली है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि मानसून के बाद और सर्दियों के महीनों में बिहार के पांच प्रमुख क्षेत्रों—जिन्हें ‘एयरशेड’ कहा जाता है—वहाँ वायु प्रदूषण का स्तर राष्ट्रीय मानकों से दो से तीन गुना अधिक है।
रिपोर्ट चेतावनी देती है कि साल के इन महीनों में करीब 90 प्रतिशत दिनों में ग्रामीण बिहार के लोग ऐसी हवा में सांस लेते हैं जो उनकी सेहत के लिए खतरनाक है। ‘एयरशेड’ दरअसल वह इलाका होता है जहाँ स्थानीय मौसम और ज़मीन की बनावट की वजह से प्रदूषण फंस जाता है और बाहर निकल नहीं पाता।
यह नया अध्ययन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी ने ‘अमृत’ (AMRIT—Ambient air quality Monitoring over Rural areas using Indigenous Technology) प्रोजेक्ट के तहत किया है। इस प्रोजेक्ट का मकसद ग्रामीण इलाकों की हवा की गुणवत्ता की जांच करना है।
इस अध्ययन के तहत बिहार के सभी 38 जिलों के हर ब्लॉक में 538 छोटे और सस्ते सेंसर लगाए गए। यह वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए सबसे बड़े सेंसर नेटवर्क में से एक है। राज्य में पांच वायु विभाजकों को सीमांकित करने के लिए डेटा-संचालित मशीन-लर्निंग तकनीकों का उपयोग किया गया और पीएम2.5 के स्तर को दर्ज किया गया। आंकड़ों की जांच से पता चला कि राज्य के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में प्रदूषण का स्तर सबसे ज़्यादा है। यह शोध नवंबर 2025 में एनवायरनमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी जर्नल में प्रकाशित किया गया।
@JamwalNidhi writes: https://t.co/D3wLZlXHUh
बिहार इस हफ़्ते: TRE-4 अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज, शिक्षा मंत्री विवाद, सरकार का बड़ा कर्ज़
सरकारें बदलती हैं, मंत्री बदलते हैं, लेकिन क्या छात्रों और अभ्यर्थियों पर पुलिसिया कार्रवाई कभी बदलती है? TRE-4 नोटिफिकेशन में देरी, अभ्यर्थियों पर FIR, नए शिक्षा मंत्री के बयान पर विवाद और विपक्ष की प्रतिक्रिया — इस वीडियो में पूरी कहानी विस्तार से।
साथ ही
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- बिहार सरकार अगले एक साल में कितना कर्ज़ लेने जा रही है
- भोजपुर-बक्सर MLC चुनाव में राजद की जीत
- पटना ब्लैकआउट के दौरान कारोबारी हत्या
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