@DrKumarVishwas भारत में ब्राह्मणों द्वारा दलितों के साथ छुआछूत और भेदभाव की जड़ें मुख्य रूप से उत्तर वैदिक काल से (लगभग 1000-600 ईसा पूर्व) में जाति व्यवस्था के पदानुक्रमित होने के बाद से मानी जाती हैं। यह व्यवस्था सदियों से चली आ रही है और इसमें समय के साथ जटिलता आती गई। जो अभी तक है।
@ShahiPratap@narendramodi@NitinNabin@AmitShah@blsanthosh@BJP4Jharkhand भारत में छुआछूत (अस्पृश्यता) की समस्या ऐतिहासिक रूप से मुख्य रूप से दलितों, अनुसूचित जातियों (SC), और अनुसूचित जनजातियों (ST) के साथ रही है। जाति-आधारित भेदभाव के कारण इन वर्गों को पारंपरिक रूप से सामाजिक- आर्थिक और धार्मिक अवसरों से वंचित किया गया था।
@ShahiPratap@narendramodi@NitinNabin@AmitShah@blsanthosh@BJP4Jharkhand सर आज देश के प्रधान के बारे में जाति सूचक गाली के बारे आप अपनी बात तो रख दिए, हमलोग कहा जाए झारखंड में, एससी,एसटी को हजार सालों से जाति के नाम पर हर रोज पड़ताड़ीत किया जा रहा है। भेद,भाव 118% से ज्यादा है उसपे आपका ध्यान कभी नहीं जाता। Sc,St के बच्चो के शिक्षा बारे में कुछ सोचिए।
@PiyushTiwariNew भारत में ब्राह्मण,
राजपूत और बनिया समुदायों का उदय मुख्य रूप से वैदिक काल से लेकर मध्यकाल (लगभग 2000 ईसा पूर्व से 12वीं शताब्दी ईस्वी) के बीच हुआ। ब्राह्मण यूरेशिया से आए, राजपूत मध्ययुगीन योद्धाओं व विदेशी मूल के मिश्रण से उभरे, और बनिया (वैश्य) ने व्यापारिक समुदायों से ।
@DN_Thakur_Ji भारत में ब्राह्मण,
राजपूत और बनिया समुदायों का उदय मुख्य रूप से वैदिक काल से लेकर मध्यकाल (लगभग 2000 ईसा पूर्व से 12वीं शताब्दी ईस्वी) के बीच हुआ। ब्राह्मण यूरेशिया से आए, राजपूत मध्ययुगीन योद्धाओं व विदेशी मूल के मिश्रण से उभरे, और बनिया (वैश्य) ने व्यापारिक समुदायों से।
@Amit8Mehra@chitraaum भारत में ब्राह्मण,
राजपूत और बनिया समुदायों का उदय मुख्य रूप से वैदिक काल से लेकर मध्यकाल (लगभग 2000 ईसा पूर्व से 12वीं शताब्दी ईस्वी) के बीच हुआ। ब्राह्मण यूरेशिया से आए, राजपूत मध्ययुगीन योद्धाओं व विदेशी मूल के मिश्रण से उभरे, और बनिया (वैश्य) ने व्यापारिक समुदायों से।