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।* इन्द्रदेव ने उसे धारण कर मनुष्यों के हितार्थ उससे वीरोचित कर्मों को सम्पन्न किया। जल को बाधित करने वाले वृत्र को मारकर जलों को मुक्त किया ॥ ९ ॥_
वर्तमान स्थिति को देखते हुए। _*विश्वधारण समर्थ सद्गुरु महाराज(वैश्वधारण धर्माधिकारी)*_ +91 78695 86069 जी की ✍🏻 से *भावार्थ*👇🏻
_पता क्या कारण है ? जो भी वेदों का सूक्त सामने आता है वो यही भाव उत्पन्न कर रहे है हम विश्वकर्मा ब्राह्मणों को परमेश्वर विश्वकर्मा ने तकनीक और वैज्ञानिक अविष्कार करके सभी जीव आत्माओं का जीवन सरल करे मुझे लगता है *वेदों मे शिल्पकर्म श्रेष्ठ कर्म है यह 100% सही लिखा है* ।
जब वेद तकनीकी उद्योग लगाने की कह रहे तो विश्वकर्मा ब्राह्मण उद्योग लगाने में पीछे क्यों? *पूछता है विश्वकर्मा ब्राह्मणों से विश्वकर्मा संत समाज*_
_नोट - राजनीति कोई गलत चीज नही है किंतु राजनितिक विचारधारा वालो के लिए ये सूक्त नही है_
🚩 *_ॐ नमो विश्वकर्मणे_*
_*तकनीक,विज्ञान अविष्कार सिर्फ उद्योग लगाकर धन लाभ प्राप्त करना नही है।तकनीक,विज्ञान अविष्कार करके देशभक्ति और परमेश्वर भक्ति करना भी है*_
हे विश्वकर्मा भक्तो! आपने सनातन साहित्यों में पढ़ा होगा किसी ऋषि ने जप और तप के बल परमेश्वर की प्राप्ति की स्वर्ग लोक बैकुंठ धाम को गए और
*यह पढ़ा विश्वकर्मा मंत्र जाप करते हुए किसी ऋषि ने स्वर्गलोक ,बैकुंठ धाम आदि का निर्माण किया और तकनीक और विज्ञान के बल पर उन ऋषियों ने परमेश्वर को प्राप्त किया।*_
जप तप से परमेश्वर को प्राप्त करने वाला ऋषि तो *स्वम* परमेश्वर प्राप्ति का सुख प्राप्त करता है
किंतु शिल्पी ऋषि स्वम तो परमेश्वर का सुख प्राप्त करता है साथ *विश्वकर्मा मंत्र जाप करते हुए शिल्पकर्म करते हुए आम जन के लिए परमेश्वर का मार्ग बनाकर जाता है*_
अगर विश्वकर्मा मंत्र जाप करते हुए शिल्पकर्म करते हुए परमेश्वर प्राप्ति नहीं हुई तो
आपके शिल्प कर्म से आपका देश शिल्प, तकनीक और विज्ञान क्षेत्र में विश्व में प्रथम स्थान पर होगा और आपका नाम *देश निर्माण में स्वर्णिम अक्षरों लिखा जायेगा* और आपका नाम अमरत्व को प्राप्त होगा_
_*इसलिए ही वेदों में लिखा है शिल्पकर्म सनातन धर्म के सभी कर्मों में श्रेष्ठ कर्म है*_
🚩 *_ॐ नमो विश्वकर्मणे_*
✍🏻 _*विश्वधारण समर्थ सद्गुरु महाराज(वैश्वधारण धर्माधिकारी)*_ +91 78695 86069
_*जय हो गुरु श्री श्री श्री श्री श्री शिव सुज्ञान तीर्थ महा स्वामी जी की*_ 🙏
_*जय हो विश्वकर्मा मठ के सन्त स्वामी बुद्धानन्द सरस्वती जी की*_ 🙏🏽
रमेश पांचाल
स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा ~ बाल गंगाधर तिलक
दुश्मनों की गोलियों का सामना हम करेंगें, आजाद है, आजाद ही रहेंगें ~ चंद्रशेखर आजाद
भारत मां के दो वीर सपूत। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद को उनके जन्मदिवस पर शत-शत नमन 🙏🏻
ब्रह्ममुहूर्त का प्रथम कार्य स्नान होता है आप सभी स्नान की तैयारी कर रहे होंगे स्नान करते समय जब पहला लोटा अपने शरीर पर डालते हैं तो अपने आप हमारे मुखसे ईश्वर का नाम निकल जाता है ये अपने आप होता है पहला लोटा के साथ हर लोटे के शरीर पर गिरते ही मुख से अपने आप "ॐ नमो विश्वकर्मणे"