दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में अब प्रयागराज की सड़कों पर भी हजारों छात्र उतर आए हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि इतना बड़ा छात्र आंदोलन भी मुख्यधारा का मीडिया शायद नहीं दिखाएगा।
छात्रों के प्रोटेस्ट के बाद मोदी जी तो झोला उठाकर चल दिए। ऐसे कैसे चलेगा मोदी जी..? आपको तो चाहिए था छात्रों से बात करना उनके मुद्दों पर कार्रवाई करना लेकिन आप तो पतली गली से निकल दिए। विश्वगुरु अपने छात्रों से क्यों भागने लगें.?
दिल्ली | जंतर-मंतर पर CJP के विरोध मार्च में प्रदर्शनकारियों को भीड़ नियंत्रण के नाम पर लाठियों से कुटा गया ,
सवाल यह है कि क्या अब सरकार के खिलाफ आवाज उठाना भी अपराध माना जाएगा? लोकतंत्र में संवाद की जगह बल प्रयोग और दमन की राजनीति चिंता का विषय बनती जा रही है।
देश की जनता को मोदी जी के आह्वान पर अमल करना चाहिए 👇
"ये दिल्ली की सल्तनत के अंत का आरम्भ हो चुका है। देश के नौजवान इस बात को लेकर आगे बढ़ें, ये समय की माँग है। ये ज़ुल्म के सामने जंग ही रास्ता है। ज़ुल्म के सामने झुकना इस देश की मिट्टी में नहीं है दोस्तों।"
“उनकी तबीयत बिगड़ रही थी, इसलिए हमने उन्हें शांतिपूर्वक हटाया।”
केन-बेतवा आंदोलनकारियों को हटाने के बाद पुलिस ने बयान दिया।
सोनम जी के स्वास्थ्य की “चिंता” के कारण ही उन्हें भी “शांतिपूर्वक” हटाया गया?
शांति का चोला ओढ़ाकर लोकतंत्र का चीरहरण हो रहा है।