सलाह : ये जितने भी मर्द जात अपनी बीवियों को इंस्टाग्राम पर नचवा रहे हैं वह लिखकर ले लीजिए उनका भी अंत सुरेंद्र शर्मा की तरह ही होगा, क्योंकि इंस्टाग्राम अब लोगों के घर उजाड़ने का प्रमुख कारण बन चुका है।
भरत तिवारी को एनकाउंटर में गोली मार के मार डाला,
भरत भूषण तिवारी एक ब्राह्मण बच्चा था, मैंने हिंदू मुसलमान नहीं देखा, नाइंसाफी जहाँ पर होगी हम आवाज उठायेंगे,
- असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM सांसद )
सूबे के साबिक़ वजीर-ए-आला Akhilesh Yadav जी आपके यौमें पैदाइश पर काका अपने तमाम ख़ैरख्वाहों के साथ दुआगो हैं कि परवरदिगार आपकी ज़ीस्त को रहमत, बरकत, आफ़ियत, मुसर्रत और कामयाबी से मालामाल फ़रमाए। आपकी हर आरज़ू को ताबीर अता हो, हर दुआ शरफ़-ए-क़बूलियत पाए से मुनव्वर रहे... आमीन 😊
💔- कभी मंदिर से चोरी की खबर आती है।
कहीं ईवीएम के जलने की चर्चा हैं।
कभी शिक्षा मंत्रालय में आग लग जाती है।
कभी होटल तो कभी library में आग लगने से लोग जान गंवा देते हैं और फायर ब्रिगेड वक़्त पर नहीं पहुँच पाती।
कहीं अस्पतालों के बाहर इलाज के लिए तरसते लोग...
तो कहीं स्कूलों की छत गिर जाती है।
कभी पेपर लीक से लाखों सपने टूट जाते हैं ...
तो कहीं न्याय की उम्मीद में उम्र निकल रही है।
आए दिन भ्रष्टाचार की खबरें, योजनाओं में घोटालों के आरोप है।
प्रदूषित हवा...गंदा पानी...टूटी सड़कें, गिरते पुल हैं।
महँगाई से जनता की जेब पर बढ़ता बोझ हैं।
आखिर कब तक?
कब तक इस देश का आम आदमी हर मोर्चे पर समझौता करता रहेगा?
खाने में मिलावट स्वीकार कर लो...
शिक्षा में खामियाँ स्वीकार कर लो...
स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली स्वीकार कर लो...
भ्रष्टाचार स्वीकार कर लो...
बेरोज़गारी स्वीकार कर लो...
और फिर कह दो - "ऐसे ही चलता है।"
नहीं...
ऐसे नहीं चलता।
समस्याओं को नियति मानकर हम देश को कमज़ोर कर रहे हैं
दुनिया के किसी भी विकसित देश ने चुप रहकर विकास नहीं किया।
वहाँ नागरिकों ने सवाल पूछे, जवाब माँगे और व्यवस्था को जवाबदेह बनाया।
आज भारत में करोड़ों ईमानदार लोग हैं- ईमानदार शिक्षक हैं।ईमानदार डॉक्टर हैं।ईमानदार अधिकारी हैं।ईमानदार पत्रकार हैं।ईमानदार कर्मचारी हैं।
लेकिन यदि ये सब अपने-अपने डर, स्वार्थ और मजबूरियों में चुप बैठे रहेंगे तो कुछ भी नहीं बदलेगा।
देश पीछे जा रहा है, क्योंकि गलत को देखकर भी बहुत लोग चुप हैं।
जिस दिन इस देश का आम नागरिक यह तय कर लेगा कि उसके बच्चों को शुद्ध भोजन चाहिए, अच्छी शिक्षा चाहिए, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था चाहिए, निष्पक्ष परीक्षाएँ चाहिए, सुरक्षित शहर चाहिए और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था चाहिए...
उस दिन से बदलाव शुरू होगा।
गलत को गलत कहने की कीमत चाहे जो हो, चुप मत रहिए।
यह लड़ाई किसी दल, नेता या सरकार के खिलाफ नहीं है।
यह लड़ाई भारत के भविष्य के लिए है।
भरत तिवारी को जिस जगह गोली मारी गई वहाँ कुछ संगठनों ने की स्मारक बनाने की घोषणा।
शाम्भवी पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप जी ने गांव के दलित समाज के व्यक्ति से रखवाया पहली ईंट……
ये स्मारक अन्याय, अत्याचार, ज़ुल्म, फेक एनकाउंटर के ख़िलाफ़ न्याय की लड़ाई का प्रतीक बनना चाहिए…. ये सिर्फ़ बिहार ही नहीं देशभर में फर्जी एनकाउंटर में मासूमों को मारने वाले उन पर अत्याचार करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए नजीर बनना चाहिए।
भारत में अब खांसी की सिरप को मेडिकल स्टोर से बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं खरीदा जा सकेगा।
केंद्र सरकार ने Drugs Rules, 1945 में संशोधन करते हुए खांसी की सिरप को उन दवाओं की सूची से बाहर कर दिया है, जिन्हें अब तक कुछ शर्तों के तहत बिना डॉक्टर की पर्ची के बेचा जा सकता था।
सरकार का मानना है कि खांसी की कुछ सिरपों के दुरुपयोग, अनियंत्रित बिक्री और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को देखते हुए यह कदम जरूरी है।