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"सम्बन्धों को अनुबन्धों को परिभाषाएँ देनी होंगी
होठों के संग नयनों को कुछ भाषाएँ देनी होंगी
हर विवश आँख के आँसू को
यूँ ही हँस हँस पीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीड़ा है
तब तक मुझको जीना होगा..."
कविताओं की एक और मनहर साँझ 🎤💕
आज शाम 08:00 बजे,
जरूर जुड़ें🤝
नोट: कार्यक्रम का लिंक एक घंटे पूर्व @ परिवार के व्हाट्सएप समूह में प्रेषित किया जाएगा।
@DrKumarVishwas@Vishwaasam
"माँग मुझ से है ख़ास, दुनिया की
लफ़्ज़ मेरे हैं आस, दुनिया की
क़तरा-क़तरा है शायरी मेरी
दरिया-दरिया है प्यास दुनिया की"❤️
एक और सजीली शाम
गीत ग़ज़लों के नाम 🎤💞
🗓️ 04 जून 2026
🕗 08:00 (शाम)
नोट: कार्यक्रम का लिंक एक घंटे पूर्व परिवार के व्हाट्सएप समूह में प्रेषित किया जाएगा।
@DrKumarVishwas@ManharMagazine
आज का सुविचार
कविता ही मनुष्य के हृदय को स्वार्थ संबंधों के संकुचित मंडल से ऊपर उठाकर; लोकसामान्य भावभूमि पर ले जाती है, जहाँ जगत् की नाना गतियों के मार्मिक स्वरूप का साक्षात्कार और शुद्ध अनुभूतियों का संचार होता है।
–आचार्य रामचंद्र शुक्ल✍️
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@Vishwaasam
परिवार को मिला परिवारप्रधान का आशीर्वाद 🎉
आज मनहर के ऑनलाइन लोकार्पण समारोह में परम श्रद्धेय युगकवि डॉ. कुमार विश्वास जी की मनहर उपस्थिति ने सभी सदस्यों का मन हर लिया।
@DrKumarVishwas@ManharMagazine