इलेक्टोरल बांड (जनता इसे “वसूली रैकेट” कह रही है) पर सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय से घोटालों की परतें खुलती देख जिस ढंग से पत्र लिखवाकर न्यायिक ढाँचे को दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है और फिर स्वयं प्रधानमंत्री का अखाड़े में उतरकर न्यायपालिका पर नकारात्मक टिप्पणी करना बताता है कि दाल में कुछ ज्यादा ही काला है। और कोई न कोई ऐसी बात है जिसे लेकर शायद वह स्वयं घबराए हुए हैं।
राजनीतिक दखलंदाजी से त्रस्त सुप्रीम कोर्ट के जजों का प्रेस कांफ्रेंस करना, जज को राज्यसभा भेजना, जज को प्रत्याशी बनाकर चुनाव में उतारना, जजों की नियुक्ति पर भी नियंत्रण का प्रयास करना और अपने विरुद्ध निर्णय आने पर न्यायपालिका के ऊपर टिप्पणी करना…. क्या मोदी जी की सरकार को एक स्वतंत्र और सशक्त न्यायपालिका मंजूर नहीं है?
@Naveenbishn0i @kana_ias श्री मान जी नवनियुक्त कृषि पर्यवेक्षकों को आज 7 महीने से भी ज्यादा का समय हो गया है लेकिन अभी तक हमारी सैलरी नही आई है, आपसे निवेदन है की दिवाली से पहले वेतन देने की कृपया करे जिससे हम भी दिवाली अच्छे से मना सके।👏