प्रियंका गांधी जी ने निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटि को “गोमूत्र एक्सपर्ट” कहा तो देश के 215 से अधिक वर्तमान एवं पूर्व कुलपतियों तथा वरिष्ठ शिक्षाविदों ने खुला पत्र लिखकर नाराज़गी जताई है।
ये वास्तव में शिक्षाविद हैं ही नहीं, इसलिए इनके पत्र को अधिक तबज्जो देने की आवश्यकता नहीं है। इनके पास भले ही वैज्ञानिक और शिक्षाविद की डिग्रियाँ हों, लेकिन सोच आज भी गोबर और गोमूत्र तक सीमित दिखाई देती है। यदि ऐसा न होता, तो वे प्रियंका गांधी जी के विरुद्ध पत्र क्यों लिखते ? चयनात्मक आक्रोश न तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण है और न ही अकादमिक निष्पक्षता।
हेलो मेरिटधारियों,
देखिए, बीजेपी ने किस तरह आरक्षण व्यवस्था को कमजोर किया है। इसका अंदाज़ा इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल से लगाया जा सकता है। इससे इनके शातिर दिमाग का भी पता चलता है। आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण (EWS) वर्ग की मेरिट कई मामलों में SC, ST और OBC से भी कम है, लेकिन अब किसी के पेट में यह दर्द नहीं हो रहा कि “अयोग्य लोग नौकरी में आ रहे हैं।”
EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के लिए पात्रता के अनुसार परिवार की वार्षिक आय ₹8 लाख से कम, कृषि भूमि 5 एकड़ से कम तथा आवासीय फ्लैट 1,000 वर्ग फुट से कम होना चाहिए। साथ ही, आवेदक SC, ST या OBC वर्ग का नहीं होना चाहिए।
2025 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 104 उम्मीदवार EWS कोटे के तहत चयनित हुए।
* इनमें से कम-से-कम 84 उम्मीदवारों ने UPSC की कोचिंग ली थी, जिसकी फीस अक्सर लाखों रुपये होती है।
* 67 उम्मीदवार प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों में पढ़े थे, जहाँ फीस भी काफी अधिक होती है।
* 46 उम्मीदवार निजी (पब्लिक) स्कूलों से पढ़े थे, जिनकी फीस किसी से छिपी नहीं है।
* 28 उम्मीदवार व्यवसायी परिवारों से थे, जिनमें करोड़पति परिवार भी शामिल हो सकते हैं।
* 10 उम्मीदवारों के पास कॉर्पोरेट सेक्टर का अनुभव था, जहाँ वे लाखों रुपये के पैकेज पर कार्य कर चुके थे।
* 14 उम्मीदवार IIT से स्नातक थे।
युवाओं एवं छात्रों (Zen Z ) की एकता ने मोदी सरकार के छक्के छुड़ा दिया और शिक्षा मंत्री को इस्तीफ़ा देना पड़ा। इनकी एकता को तोड़ने के लिए रिज़रवेशन हटाओ मंच (RHA) बनवा दिया गया है । जवाब में SC/ST/OBC वालों ने आरक्षण बचाओ आंदोलन (ABA) मंच खड़ा कर दिया है ।
वकील शमशेर यादव जगराना और एडवोकेट विजय बहादुर माधव , उप्र डोमा अध्यक्ष,ने जनहित याचिका दाखिल करके सराहनीय कार्य किया है।
उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के गठन में दो वर्ष से अधिक की देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार पर कड़ी नाराज़गी जताई है। अदालत ने कहा कि यदि सरकार गंभीर है, तो आयोग का गठन तत्काल करे। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी और प्रमुख सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। आयोग के लंबे समय से निष्क्रिय रहने से अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों के निस्तारण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
राम मंदिर में जो डकैती हुई, उसका समाधान निकाला जा सकता है। जिसकी जहाँ आस्था हो, उस पर सवाल उठाने का कोई मतलब नहीं है। आस्था के अनुसार भगवान कण-कण में हैं और वे सबको देते हैं। यदि यह सही है तो भक्त उन्हें देने वाले कौन होते हैं? वे तो स्वयं उनसे माँगने जाते हैं। फिर नगद, सोना, चाँदी आदि चढ़ाने के बजाय केवल फूल-माला ही क्यों नहीं चढ़ाते? राम मंदिर के प्रबंधन को स्वयं ऐसी अपील करनी चाहिए।
मैं बहुजनों से अपील करूँगा कि उनकी जहाँ भी आस्था हो, वे उसे मानें, लेकिन अपना पैसा और धन शिक्षा, अधिकारों की लड़ाई, सामाजिक न्याय के साहित्य तथा ज्ञान-विज्ञान पर खर्च करें। हालाँकि, बुद्ध, फुले, शाहू, पेरियार, अंबेडकर और कबीर को मानने वालों की आस्था मान-सम्मान और आत्मसम्मान की प्राप्ति में है। इससे न केवल उनका विकास होगा, बल्कि देश भी तरक्की करेगा।
ये पटना और बिहार पुलिस का जवान है
नाम - सुनील महतो,पद - एक स्टार वाले है
गाड़ी में नंबर नहीं हैं मगर माथा पे हेलमेट जरूर है लेकिन
पटना ट्रैफिक पुलिस का औक़ात नहीं है की इसका चालान काट
कर दिखा दे काहे की सरकारी नौकरी है ना जी कैसे कटेगा
गाड़ी में ना आगे नंबर है और ना पीछे नंबर है सवाल करने पे कहते है की वरीय अधिकारी है हम मेरा चालान नहीं काट सकता कोई
कहा है सम्राट बिहार और सम्राट पटना यही औक़ात है