देश के यशस्वी रक्षामंत्री श्री @rajnathsingh जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ । महादेव से सदैव आपके मंगल की कामना करती हूँ आपके नेतृत्व में देश की सेनायें और सुदृढ़ हो ऐसी कामना करूँगी 💐💐💐💐💐
Jai Somnath!
Somnath Swabhiman Parv begins today. A thousand years ago, in January 1026, Somnath faced its first ever attack. The attack of 1026 and the subsequent attacks couldn’t diminish the eternal faith of millions, nor break the civilisational spirit that rebuilt Somnath time and again.
I’m sharing some pictures from my previous visits to Somnath. If you have been there too, share them using #SomnathSwabhimanParv.
#SomnathSwabhimanParv is about remembering the countless children of Bharat Mata, who never compromised with their principles and ethos. However daunting the times were, their resolve remained unshaken and their commitment to our ethos unwavering.
Here are some glimpses of a programme held in Somnath on 31st October 2001. This was the year when we marked 50 years since the rebuilt Somnath Temple opened its doors in 1951 in the presence of the then President Dr. Rajendra Prasad. The efforts of Sardar Patel, KM Munshi and several others were noteworthy. It was also when the 125th Jayanti of Sardar Patel was being marked. The programme of 2001 was attended by then Prime Minister Atal Ji, Home Minister Advani Ji and several other dignitaries.
In 2026, we mark 75 years since the grand ceremony of 1951!
माघ मेले के इतिहास में पहली बार मेले के दर्शन तत्त्व को परिलक्षित करते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी के स्तर से माघ मेले का लोगो जारी किया गया है। इस लोगो के अन्तर्गत तीर्थराज प्रयाग, संगम की तपोभूमि तथा ज्योतिषीय गणना के अनुसार माघ मास में संगम की रेती पर अनुष्ठान करने की महत्वता को समग्र रूप से दर्शाया गया है।
सर्वप्रथम लोगो में सूर्य एवं चंद्रमा की 14 कलाओं की उपस्थिति ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य, चंद्रमा एवं नक्षत्रों की स्थितियों को प्रतिबिंबित करता है जो प्रयागराज में माघ मेले का कारक बनता। भारतीय ज्योतिषीय गणना के अनुसार चंद्रमा 27 नक्षत्रों की परिक्रमा लगभग 27.3 दिनों में पूर्ण करता है। माघ मेला इन्हीं नक्षत्रीय गतियों के अत्यंत सूक्ष्म गणित पर आधारित है। जब सूर्य मकर राशि में होता है और पूर्णिमा के दिन चंद्रमा माघी या अश्लेषा-पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रों के समीप होता है, तब माघ मास बनता है और उसी काल में माघ मेला आयोजित होता है।
चंद्रमा की 14 कलाओं का संबंध मानव जीवन, मनोवैज्ञानिक ऊर्जा और आध्यात्मिक साधना से माना गया है। माघ मेला चंद्र-ऊर्जा की इन कलाओं के सक्रिय होने का विशेष काल भी है। अमावस्या से पूर्णिमा की ओर चंद्रमा की वृद्धि (शुक्ल पक्ष) साधना की उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। माघ स्नान की तिथियाँ चंद्र कलाओं के अत्यंत सूक्ष्म संतुलन पर चुनी जाती हैं। माघ महीने की ऊर्जा (शक्ति) अनुशासन, भक्ति और गहन आध्यात्मिक कार्यों से जुड़ी होती है क्योंकि यह महीना पवित्र नदियों में स्नान, दान, तपस्या और कल्पवास जैसे कार्यों के लिए विशेष माना जाता है। इस माह में किए गए कार्य व्यक्ति को निरोगी बनाते हैं और उसे दिव्य ऊर्जा से भर देते हैं।
प्रयागराज का अविनाशी अक्षयवट, जिसकी जड़ों में भगवन ब्रह्मा जी का, तने में भगवन विष्णु जी का एवं शाखाओं और जटाओं में भगवन शिव जी का वास है, उसके दर्शन मात्र से मोक्ष मार्ग सरल हो जाता हैं। इसी कारण कल्पवासियों में उसका स्थान अद्वितीय है। सनातन धर्म के अनुसार मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति हैं अतः महात्मा का चित्र इस देव भूमि में सनातनी परम्परा को दर्शाता है जहां चिर काल से ऋषि-मुनि आध्यात्मिक ऊर्जा हेतु आते रहे हैं।
माघ मास में किए गए पूजन एवं कल्पवास का पूर्ण फल संगम स्नान के उपरांत श्री लेटे हुए हनुमान जी के दर्शन से प्राप्त होता है: अतः लोगों पर उनके मंदिर एवं पताका की उपस्थिति माघ मेले में किए गए तप की पूर्णता: की व्याख्या करता है। संगम पर साइबेरियन पक्षियों की उपस्थिति यहाँ के पर्यावरण की विशेषता को दर्शाता है। लोगो पर श्लोक "माघे निमज्जनं यत्र पापं परिहरेत् तत:" का अर्थ है माघ के महीने में स्नान करने से सभी पाप मुक्ति हो जाती है। यह लोगो मेला प्राधिकरण द्वारा आबद्ध किए गए डिजाइन कंसल्टेंट श्री अजय सक्सेना एवं प्रागल्भ अजय द्वारा डिजाइन किया गया।
@InfoDeptUP@UPGovt@CMOfficeUP@ChiefSecyUP
आज का दिन तो बहुत महत्वपूर्ण है, विवादित ढांचा को हटाने का भी दिन है,
स्वाभाविक रूप से एक कलंक हटा, एक विरासत की पुनर्स्थापना का कार्य देश के अंदर हुआ...
Я рад приветствовать в Дели своего друга - Президента Путина. С нетерпением жду наших встреч сегодня вечером и завтра. Дружба между Индией и Россией проверена временем; она принесла огромную пользу нашим народам.
@KremlinRussia_E
What 19 year old Vedamurti Devavrat Mahesh Rekhe has done will be remembered by the coming generations!
Every person passionate about Indian culture is proud of him for completing the Dandakrama Parayanam, consisting of 2000 mantras of the Shukla Yajurveda’s Madhyandini branch, in 50 days without any interruption. This includes several Vedic verses and sacred words recited flawlessly. He embodies the finest of our Guru Parampara.
As the MP from Kashi, I am elated that this extraordinary feat took place in this sacred city. My Pranams to his family, the several saints, seers, scholars and organisations from all over India that have supported him.
19 वर्ष के देवव्रत महेश रेखे जी ने जो उपलब्धि हासिल की है, वो जानकर मन प्रफुल्लित हो गया है। उनकी ये सफलता हमारी आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बनने वाली है।
भारतीय संस्कृति में आस्था रखने वाले हर एक व्यक्ति को ये जानकर अच्छा लगेगा कि श्री देवव्रत ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा के 2000 मंत्रों वाले 'दण्डकर्म पारायणम्' को 50 दिनों तक बिना किसी अवरोध के पूर्ण किया है। इसमें अनेक वैदिक ऋचाएं और पवित्रतम शब्द उल्लेखित हैं, जिन्हें उन्होंने पूर्ण शुद्धता के साथ उच्चारित किया। ये उपलब्धि हमारी गुरु परंपरा का सबसे उत्तम रूप है।
काशी से सांसद के रूप में, मुझे इस बात का गर्व है कि उनकी यह अद्भुत साधना इसी पवित्र धरती पर संपन्न हुई। उनके परिवार, संतों, मुनियों, विद्वानों और देशभर की उन सभी संस्थाओं को मेरा प्रणाम, जिन्होंने इस तपस्या में उन्हें सहयोग दिया।