भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है।
ज़रा सोचिए - देशभर के परिवार जितना पैसा सिर्फ़ NEET की तैयारी पर ख़र्च करते हैं, वो भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट के बराबर है।
आज कोटा से, और देश के हर कोने से, लाखों युवा एक सुर में कह रहे हैं - इस व्यवस्था ने हमारे साथ अन्याय किया है।
हर युवा अलग है, पर सबकी कहानी एक - या तो सपने देखने नहीं दिए गए, या देखे हुए सपने तोड़ दिए गए।
‘छात्रों की गूंज’ सिर्फ़ अभियान नहीं - एक क्रांति है। हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी है जो आपको बड़े सपने देखने का हक़ दे और आपकी ज़िंदगी गिरवी रखे बिना, उन्हें पूरा करने में आपका साथ दे।
#ChhatronKiGoonj
"प्रधानमंत्री को वायु प्रदूषण को 'हेल्थ इमरजेंसी' घोषित करना चाहिए"
◆ कांग्रेस सांसद और LoP राहुल गांधी ने कहा
#RahulGandhi | Rahul Gandhi | #AirPollution
11 साल पहले शिक्षा का बजट टोटल बजट का 4.5% था, मोदी जी ने घटा कर 2.5% कर दिया
उच्च शिक्षा का बजट टोटल बजट का 2.5% था, अब 0.9% है
रक्षा का बजट टोटल बजट का 17% था, अब 13% है
और वो मेक इन इंडिया वाला बब्बर शेर मिमिया क्यों रहा है? मैनुफैक्चरिंग GDP का मात्र 12.8% क्यों?
राहुल गांधी जी सेना को कभी बदनाम नहीं कर सकते।
वे सिर्फ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे जी की किताब का हिस्सा पढ़ रहे थे, इसमें बदनाम करने जैसा कुछ नहीं है।
BJP जब भी किसी सवाल से छिपना चाहती है तो ऐसी ही फिजूल की बातें करती है।
#priyankagandhi#Parliament
ट्रंप ने अनाउंस किया - भारत अब ईरान की जगह वेनेजुएला से तेल खरीदेगा
ट्रंप तय कर रहे हैं कि भारत क्या करेगा, कहां से तेल खरीदेगा, कहां से नहीं
यह सरकार मोदी चला रहे हैं या ट्रम्प?
मोदी जी, कौन सा वो राज़ है आपका जिसकी वजह से आप ट्रम्प के सामने चुप हैं?
उत्तराखंड के दीपक भारत के हीरो हैं।
दीपक संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं - उस संविधान के लिए जिसे BJP और संघ परिवार रोज़ रौंदने की साज़िश कर रहे हैं।
वे नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान का जीवित प्रतीक हैं और यही बात सत्ता को सबसे ज़्यादा चुभती है।
संघ परिवार जानबूझकर देश में आर्थिक और सामाजिक ज़हर घोल रहा है, ताकि भारत बँटा रहे और कुछ लोग डर के सहारे राज करते रहें। उत्तराखंड की BJP सरकार खुलेआम उन असामाजिक ताक़तों का साथ दे रही है जो आम नागरिकों को डराने और परेशान करने में लगी हैं।
नफ़रत, डर और अराजकता के माहौल में कोई भी देश आगे नहीं बढ़ सकता। शांति के बिना विकास सिर्फ़ एक जुमला है।
हमें और दीपकों की ज़रूरत है - जो झुकें नहीं, जो डरें नहीं, और जो पूरी ताक़त से संविधान के साथ खड़े रहें।
हम तुम्हारे साथ हैं भाई। डरो मत।
तुम बब्बर शेर हो। 🇮🇳
पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे ने ऐसा क्या लिखा जिसे राहुल गांधी संसद में पढ़ना चाहते थे और सरकार ने पढ़ने नहीं दिया? आपको खुद पढ़ना चाहिए👇
भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी को 31 अगस्त 2020 को रात 8.15 बजे एक फोन कॉल आया। उन्हें जो जानकारी मिली, उससे वे चिंतित हो गए।
इन्फैंट्री के सपोर्ट से चार चीनी टैंक पूर्वी लद्दाख में रेचिन ला की ओर एक खड़ी पहाड़ी के रास्ते आगे बढ़ने लगे थे। जोशी ने इस मूवमेंट की जानकारी आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को दी, जिन्होंने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझ लिया।
टैंक कैलाश रेंज पर भारतीय ठिकानों से कुछ सौ मीटर की दूरी पर थे। यह एक रणनीतिक ऊंची जगह थी, जिस पर भारतीय सेना ने कुछ घंटे पहले ही कब्जा किया था। विवादित लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल- जो दोनों देशों के बीच असल सीमा है -के इस इलाके में ऊंचाई का हर मीटर रणनीतिक दबदबे में बदल जाता है।
भारतीय सैनिकों ने एक illuminating round फायर किया, जो एक तरह की चेतावनी थी। इसका कोई असर नहीं हुआ। चीनी आगे बढ़ते रहे।
नरवणे ने भारत के राजनीतिक और सैन्य प्रतिष्ठान के नेताओं को ताबड़तोड़ फोन करना शुरू कर दिया, जिनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह; राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल; चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत; और विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल थे।
'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' में नरवणे लिखते हैं, 'मेरा हर किसी से एक ही सवाल था, 'मेरे लिए आदेश क्या हैं?' स्थिति तेजी से बिगड़ रही थी और स्पष्टता की जरूरत थी। मौजूदा प्रोटोकॉल के मुताबिक नरवणे को साफ आदेश थे कि "जब तक ऊपर से मंजूरी न मिले, तब तक गोली न चलाएं।" ऊपर से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं आए।
मिनट बीतते गए। रात 9.10 बजे, लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने फिर फोन किया। चीनी टैंक आगे बढ़ते हुए दर्रे से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर आ गए थे। रात 9.25 बजे, नरवणे ने राजनाथ को फिर फोन किया, "स्पष्ट निर्देशों" के लिए पूछा। कोई निर्देश नहीं मिला।
इसी बीच, PLA कमांडर, मेजर जनरल लियू लिन का एक मैसेज आया। उसने हालात को शांत करने का एक प्रस्ताव दिया; दोनों पक्षों को आगे बढ़ना बंद कर देना चाहिए और अगले दिन सुबह 9.30 बजे, पास पर स्थानीय कमांडर अपने तीन-तीन प्रतिनिधियों के साथ मिलेंगे। यह एक उचित प्रस्ताव लग रहा था। एक पल के लिए ऐसा लगा कि कोई रास्ता निकल रहा है।
रात 10 बजे, नरवणे ने यही मैसेज देने के लिए राजनाथ और डोभाल को फोन किया। दस मिनट बाद, नॉर्दर्न कमांड ने फिर से फोन किया। चीनी टैंक नहीं रुके थे। वे अब टॉप से सिर्फ पांच सौ मीटर दूर थे।
नरवणे को याद है कि लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने कहा था कि "चीनी सेना को रोकने का एकमात्र तरीका हमारी अपनी मीडियम आर्टिलरी से फायरिंग करना था, जो तैयार थी और आदेश का इंतजार कर रही थी।"
पाकिस्तान के साथ लाइन ऑफ कंट्रोल पर आर्टिलरी की लड़ाई आम बात थी, जहां डिवीजनल और कोर कमांडरों को ऊपर किसी से पूछे बिना हर दिन सैकड़ों राउंड फायर करने का अधिकार दिया गया था। लेकिन यह चीन था। यहां बात अलग थी। PLA के साथ आर्टिलरी की लड़ाई बहुत नाजुक स्थिति में बदल सकती थी। "मेरी स्थिति नाज़ुक थी,"
नरवणे लिखते हैं। 'कमांड -जो सभी संभावित तरीकों से फायरिंग शुरू करना चाहता था' और 'एक सरकारी समिति -जिसने अभी तक स्पष्ट आदेश नहीं दिए थे'। इनके बाच नरवणे फंसे हुए थे। सेना मुख्यालय के ऑपरेशन रूम में, विकल्पों पर विचार किया जा रहा था और उन्हें खारिज किया जा रहा था। पूरा नॉर्दर्न फ्रंट हाई अलर्ट पर था।
टकराव की संभावित जगहों पर नज़र रखी जा रही थी। लेकिन फैसले का पॉइंट रेचिन ला था। नरवणे ने रक्षा मंत्री को एक और फोन किया, जिन्होंने वापस फोन करने का वादा किया। समय बीतता गया। हर मिनट, चीनी टैंक टॉप पर पहुंचने के एक मिनट करीब आ रहे थे।
राजनाथ सिंह ने रात 10.30 बजे वापस फोन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की थी, जिनके निर्देश एक ही वाक्य में थे: "जो उचित समझो, वह करो" यानी 'जो आपको ठीक लगे, वह करो'।
यह 'पूरी तरह से एक सैन्य फैसला' होने वाला था। मोदी से सलाह ली गई थी। उन्हें ब्रीफ किया गया था। लेकिन उन्होंने फैसला लेने से मना कर दिया था। नरवणे याद करते हैं कि "मुझे एक गर्म आलू पकड़ा दिया गया था और अब पूरी ज़िम्मेदारी मुझ पर थी।"
इसी कायरता को ढंकने के लिए चिल्ला चिल्लाकर सदन को बाधित किया और आखिरकार सदन स्थगित कर दिया गया।
पहले हमारे पास ऐसा प्रधानमंत्री था, जिसका नाम हार्वर्ड और ऑक्सफ़ोर्ड में लिया जाता था।
अब हमारे पास ऐसा प्रधानमंत्री है, जिसका नाम #EpsteinFiles में एपस्टीन के साथ सामने आ रहा है।
क्या जबरदस्त पतन है, मेरे भारत।
“एपस्टीन फ़ाइल्स” पर चुप्पी क्यों❓
कुछ दिनों पहले “कश्मीर फाइल्स” आई थी जिसने लोगों को बांटने का काम किया. फिर आई “केरल फाइल्स”, उसमें भी बांटने का काम किया गया.
अभी “एपस्टीन फाइल” आई है. अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन फाइल खोला है जिसमें प्रधानमंत्री तक का नाम आया है, लेकिन सब मौन हैं.
कश्मीर फाइल्स, केरल फाइल्स के बारे में तो भाजपा के लोग खूब बातें किया करते थे, अब जरा एपस्टीन फाइल के बारे में बोलें.
ओम बिरला जी,
अगर सदन में राष्ट्रीय सुरक्षा पर नहीं बोला जाएगा तो कहाँ बोला जाएगा?
आप कैमरा बस अपने पर करके कुछ भी बोलते हैं
और सदन स्थगित करके आपने BJP के डरपोकों पर मोहर लगा दी है
राहुल जी राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे
खोखला राष्ट्रवाद, डरपोक सरकार।
जो संसद में चीन के नाम से इतना डरते हैं, उन्होंने सरहद पर सेना को कितना हतोत्साहित किया होगा इसकी कल्पना कैसे की जाए!
यही बात श्री @RahulGandhi जनरल नरवणे के माध्यम से देश को बताना चाहते थे और, इसी सच्चाई से भाजपा का शीर्ष नेतृत्व घबराया हुआ है।
‘Epstein File’ पर प्रधानमंत्री मोदी जी के मन की सारी बातें खत्म हो गई हैं और कुछ नहीं बोलना चाहते हैं।
लेकिन देश के पूर्व सेना प्रमुख की किताब पर बात करने से भाजपा सरकार क्यों डर रही है?
ऐसा क्या है उस किताब में जो नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संसद में बोलने से रोका जा रहा है।
भारत-चीन की सीमा पर जो हुआ है, वो सेना का हर जवान जानता है।
लेकिन मोदी सरकार ये सच्चाई देश की जनता से छिपाना चाहती है।
: लोकसभा में नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
एप्स्टीन ने मोदी से संबंध बताते जो ईमेल की है उसकी कड़ियाँ जोड़िये
जून 2017 में मोदी अमेरिका गए, ट्रम्प से मिले
जुलाई 2017 में इज़राइल जाकर अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए नाचे गाये
फिर कुछ काम बन गया
एप्स्टीन जैसे घिनौने आदमी से देश के PM का संबंध क्यों है?
जवाब देना पड़ेगा
"एक ऐसा बजट जो सुधार करने से इनकार करता है"
◆ कांग्रेस सांसद और LoP राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
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