प्राणप्रिया!❣️
जब मेरे अंतर में अहम का प्राणोत्सर्ग होता है, और मेरे जागृत चैतन्य में प्रियतम नाम सुमिरन का पुण्य:-प्रताप अनायास सकल मनोरथ सिद्ध करता है। तब मेरी प्रज्ञा और वाणी में मधुरता संजोये जादूई तिलिस्म की अंतरंगता में ईश्वरत्व का साक्षात्कार होता है।🌼🌼🌼
Love Is in the Air. A bonded pair of Himalayan Monals share a quiet moment high up in the winter canopy of Chopta, Uttarakhand.
📷 Baiju Patil ( @patil_baiju )
@anurakti___ नीरव रात्रि के व्योम पे तारामण्डलों का उजास जैसे तुम्हारी उपस्थिति का तोरण है। जिधर अनुराग-अनुरक्ति की चौखट पे मौन अभिव्यंजना चौखट है, और शिउली फूलों के खिलने और झरने तक अन्त:करण का वंदनवार हो तुम...प्रिया!❣️चले आओ कि तुम्हें दैवीय स्वप्निल बिम्बों की छांह में नयनों में समो लूं
सांध्य ग���न के गोपुरम पे आरोहण करती हुई सिंदूरी आभा की वल्लरियों का उत्सव मानो जैसे प्रेम-अनुष्ठान है-
समूची पृथ्वी के आंचल पे पुखराज विभावरी का दैवीय अनुष्ठान...
और,
इस प्रेम-अनुष्ठान की समिधा में प्रेम-तितीर्षु अमरता का साक्षात्कार करता है...
कितनी ही सारगर्भित है- अनुरक्ति
गोधूलि के वेला में अंबर पर सिंदूरी आभा बिखरी है...
मैं अत्यंत आतुर और स्नेह-भरे नयनों से तुम्हारी राह तक रही हूं...
जैसे खेल--कूद के पश्चात धूल से सने अपने नन्हे बालक को
घर लौटते देख माँ के कलेजे में ममता का अगाध ज्वार उमड़ आता है...
श्वेत पारिजात (सत्व), रक्त गुड़हल (रज) और पीत-नारंगी गेंद��� (तम को आलोकित करता)
ये तीनों पुष्प केवल वनस्पति नहीं, सृष्टि के तीन गुणों का समाहार हैं, जो माँ के आगमन प��� एक ही सूत्र में पिरोए जाते हैं...
पावन पग धरियो जगदंबे,
अंगना अमिय रस बरसाती....❤️❤️❤️
श्वेत पारिजात (सत्व), रक्त गुड़हल (रज) और पीत-नारंगी गेंदा (तम को आलोकित करता)
ये तीनों पुष्प केवल वनस्पति नहीं, सृष्टि के तीन गुणों का समाहार हैं, जो माँ के आगमन पर एक ही सूत्र में पिरो�� जाते हैं...
पावन पग धरियो जगदंबे,
अंगना अमिय रस बरसाती....❤️❤️❤️