एक ही #राज्यपाल, एक ही #राजभवन, एक ही #व्यवस्था।
दो घटनाएं, दो कुलपति और सवाल सिर्फ एक है कि आखिर @GovernorBihar की कसौटी क्या है?
बिहार के राज्यपाल और विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति से प्रश्न यह है कि जिस उच्च शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर आज उंगली उठा रहा है, उस व्यवस्था के शीर्ष पदों पर बैठने वाले कुलपतियों की नियुक्ति और उनके कामकाज की सबसे बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी किसके पास है ?
क्या बिहार में कुलपतियों के लिए कानून, नैतिकता और जवाबदेही की अलग-अलग कसौटियां हैं?
राजभवन के पास कार्रवाई करने की न इच्छा शक्ति की कमी थी और न अधिकारों की।
राजभवन के व्यवहार की कसौटी का सवाल और यह सवाल ही इस नक्कारखाने का अनार बम है।
राज्यपाल कार्यकाल में ऐसे विवाद और प्रश्न जरूर सामने आए, जिन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं है??
राज्यपाल के कार्यकाल पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा SLP civil - 12409/13 पारित न्यायदेश के आदेश के आलोक में मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के कुलपति को पद से हटाया गया तो वीर कुंवर सिंह, विश्वविद्यालय, आरा के कुलपति को पदमुक्त क्यों नहीं किया गया???
राजभवन की प्रशासनिक विश्वसनीयता समाप्त हो चुकी है कुलपति , वीर कुंवर सिंह, विश्वविद्यालय, आरा के भष्टाचार के साक्ष्यों के बावजूद उन्हें पद पर बनाए रखने का आधार क्या है?
बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर पहले राजभवन को अपने ही फैसलों का हिसाब देना चाहिए।
असली सवाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के कुलपति को पदमुक्त कर दिया तो वीर कुंवर सिंह, विश्वविद्यालय एवं ललित नारायण मिथिला, विश्वविद्यालय के कुलपति राज्यपाल का क्या लगते हैं???
आखिर एक ही राज्यपाल के सामने कुलपतियों के लिए तराजू एक ही है या नाम बदलते ही बाट बदल जाते हैं?
और अगर कसौटी हर व्यक्ति के लिए अलग है तो सवाल केवल उच्च शिक्षा की बदहाली का नहीं है सवाल यह है कि कहीं उच्च शिक्षा व्यवस्था राजभवन की धन वसूली का ठिकाना और सप्लायरों के संरक्षण के में तो नहीं बर्बाद हो रही है?
@rashtrapatibhvn@narendramodi@narendramodi_in@NamoApp@PMOIndia@ugc_india@BaatBiharKii@BiharKaVoice@BiruDeepak
अभी भारत की स्थिति बहुत विचित्र है ।
केन्द्र की सत्ता के प्रति जबरदस्त असंतोष पूरे देश में व्याप्त है ।
जबरदस्त प्रदर्शन, धरना , जुलूस आदि हो रहा है ।
सरकार किंकर्तव्यविमूढ़ है । यूजीसी का जाल खुद भाजपा के लिए विनाश का कारण बन गया है ।
भाजपा के कोर वोटर ही भाजपा पर चढ़ दौड़े हैं । इस समय भाजपाई ट्रोलर्स के भी हाथ पांव फूले हुए हैं। यदि कोई देशद्रोह, सोनिया विदेशी , पप्पू जैसे शब्द कहता है तो पांच सौ आदमी उस पर चढ़ दौड़ते हैं। वो या तो पोस्ट डीलिट करता है या भरपेट गाली सुनता है ।
वंदे मातरम् वाला पटाखा भी नहीं फूटा ।
कोई अब मितरो सुनने के लिए तैयार नहीं, चेहरा तो कोई देखना ही नहीं चाहता ।
अब एकमात्र उपाय है, वर्तमान लोकसभा भंग हो और मध्यावधि चुनाव कराए जाएं ।
जनता का विश्वास खो चुकी सरकार को पुनः जनादेश प्राप्त करना चाहिए ।
जंतर मंतर पर पूरे देश से आए युवा अकेले नहीं है
हम पूरी ताक़त के साथ खड़े है साथ
भोजन पानी रुकने की व्यवस्था हॉस्पिटल व अन्य कोई भी सकंट होने पर निसंकोच फ़ोन कीजिए
8882002222 प्रीत सिरोही
#JantarMantar
तू क्या किसी को चैलेंज देगा रे गवार, अनपढ़, बैल बुद्धि
एक तरफ़ खुली बहस का चैलेंज देने का नाटक करता है और दूसरी तरफ़ BLOCK करके भाग जाता है।
#भगौड़ा_रावण
भीम आर्मी का गुंडा, पुलिस के सामने कह रहा है-
"पहले मेरी शादी ब्राहमण, ठाकुर या गुर्जर समाज की बेटी से कराओ, तब ख़ुद को हिंदू मानूंगा"!
और इसके समर्थक वाह, वाह कर ताली बजा रहे हैं!
और आज ये लोग रो रहे हैं कि हमारी महिलाओं का अपमान हुआ?
क्यों भाई,
दूसरों की बहन बेटियों का अपमान करते समय ये सब याद नहीं आता??
दिल्ली में सांसद चंद्रशेखर रावण की आज़ाद समाज पार्टी ने पत्रकार अजीत भारती के खिलाफ़ SC/ST एक्ट और IT एक्ट 2000 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।
अजीत भारती पर ये कार्रवाई सरासर गलत है यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है जब इनके पास कोई तर्क नहीं बचता तो यह SC/ST एक्ट का सहारा लेते है।
"आरक्षण की समीक्षा भी हमें स्वीकार्य नहीं है"
-चिराग पासवान
बताओ,
इसको दादागिरी और आरक्षण का दुरूपयोग नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे?
जब संविधान बनाने वालों ने ही समीक्षा करने की बात कही थी, जब आयोग और रिपोर्ट में साफ साफ लिखा है कि समीक्षा होनी चाहिए, तो ये कैसे मना कर सकते हैं?
तुम्हारे पिताजी ने अपनी जाति की स्त्री को नकारते हुए तुम्हारी माताजी से विवाह किया और तुम्हे जन्म दिया.. कहीं ना कहीं वो जानते थे कि उनके वंश में विद्वता हेतु यह करना ही होगा..
खैर.. तुम चांदी का चम्मच मुंह में लेकर भी दलित शोषित पिछड़ा ही रह गए 😆
IAS संतोष वर्मा के इस आपत्तिजनक बयान का समर्थन सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने खुलकर किया था।
अगर अजीत भारती के कमेंट पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है तो फ़िर इस बयान पर कार्रवाई कब होगी?
श्री चंद्रशेखर जी चेक कर रहे हैं कि फोटोकॉपी ठीक से निकला कि नहीं। कभी किसी ने कहा कि ये सिटी स्कैन है। तब उलट-पलट कर देखते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया इतनी आगे बढ़ गई और हम सिटी पर ही अटके हैं, इसको हम लोग ‘बाजा स्कैन’ कहेंगे।
फिर किसी ने उन्हें कहा कि ये सिटी स्कैनर मशीन से निकलता है। मशीन देख कर उन्होंने कहा कि फोन में तो ‘कैम स्कैनर’ एप्प है, उससे करने पर पैसा बचता। ये संसाधनों का दुरुपयोग है और इसमें केवल फोटो दिख रहा है, अक्षर कहाँ है? ए फॉर एप्पल में गोल-गोल एप्पल या उसका बीज टाइप तो है, लेकिन अक्षर का साइज भी बड़ा रहता तो बच्चों को सीखने में सहूलियत होती।
अजीत भारती पर केस करना वाले कंप्लेनेंट का नाम है “बालकराम बौद्ध”
अगर कंप्लेनेंट बौद्ध धर्म से आता है तो SC/ST एक्ट कैसे लागू होता है ?
और अगर चंद्रशेखर रावण के लिए बोला गया है तो कोई third party वो भी Non SC कैसे फ़रियादी बन सकता है ? @ajeetbharti@DelhiPolice क़ानून का दुरुपयोग करना इसे कहते है। @gupta_rekha
Cc @narendramodi@AmitShah
आरक्षण के मुद्दे पर रविवार को देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन, लखनऊ और दिल्ली में उमड़ी भीड़
आरक्षण के मुद्दे को लेकर दिल्ली, लखनऊ समेत देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए।
वहीं, महाराष्ट्र के मालेगांव में एससी समुदाय से जुड़े लोगों ने SC आरक्षण में उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया।
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?