आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने आज @mannkibaat में प्रतापगढ़ के आंवले और इससे समृद्धि की नई राह बना रही मातृशक्ति का उल्लेख कर समूचे उत्तर प्रदेश को गौरवान्वित किया है।
'एक जनपद-एक उत्पाद' से मिली नई शक्ति के परिणामस्वरूप आज आंवला प्रसंस्करण से जुड़ी लगभग 100 इकाइयां और सावित्री फुले व विंध्यवासिनी स्वयं सहायता समूह प्रतापगढ़ की पीढ़ियों पुरानी पहचान को किसानों की आय, स्थानीय उद्यम और मातृशक्ति के स्वावलंबन का सशक्त आधार बना रहे हैं।
स्थानीय सामर्थ्य को अवसर और मातृशक्ति के परिश्रम को नई पहचान देता यह प्रयास 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' से 'विकसित उत्तर प्रदेश' की यात्रा को गति प्रदान कर रहा है।
प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार।
@akhileshanandd हर समय का निश्चित बरसात का माप दंड है । सितंबर में जुलाई जैसी बरसात जरूरी नहीं होती । ये खेती के लिए भी नुकसान दायक होती ।
खैर जब स्टूडियों के बाहर की दुनिया देखी हो तब तो कुछ पता होगा
ये देश में एक रोचक इवेंट हो गया है.
करीब एक हफ़्ते पहले बद्रीनाथ धाम में भजन क्लबिंग का इवेंट हुआ था. वीडियो भी वायरल हुआ.
लोगों ने कहा कि ये सब इतने सेंसिटिव जोन में नहीं होना चाहिए.
वो इवेंट इंडियन आर्मी के गढ़वाल स्काउट ने करवाया था.
लेकिन अब सामने आया है कि आर्मी ने वो कार्यक्रम करवाने के लिए ज़िला प्रशासन से कोई परमीशन ही नहीं ली थी. जबकि परमीशन तो बेसिक काम है.
चमोली के डीएम ने सही कदम उठाया. आर्मी को ही नोटिस इशू कर दिया है.
अब सवाल है कि क्या गढ़वाल स्काउट के CO ने ख़ुद से ये क़दम उठाया था? अगर ऐसा है तो बेहद सीरियस बात है.
सवाल ये भी है कि आर्मी HQ ने क्या इसके लिए गढ़वाल स्काउट को कहा था? अगर ऐसा है तो भी बहुत सीरियस बात है.
आर्मी को इस तरह के इवेंट से दूर रहना चाहिए.
देश के बड़े बड़े स्टैंडअप कॉमेडियनों से लेकर व्हाट्सएप मैसेजेस और फेसबुक पोस्टों पर बैंक कर्मियों की कार्यशैली का खूब मजाक बना ,लोगों ने ठहाके लगाए,
लेकिन आज जब वहीं बैंक कर्मी जब काम के बोझ के तले दबकर डिप्रेशन का शिकार हो रहा और सुसाइड कर रहा तो लोगों ने मुंह में फेवी क्विक डाल रखी है।
#WATCH | Jamui molestation case | Patna, Bihar: Mother of the victim girl says, "Action has been taken within 24-48 hours. First, 3 accused were nabbed, and then the main perpetrator was caught following an encounter. I am satisfied with the action taken by the Govt. CM had called us here. He has given us assurance for her safety, education, and everything. He has told us that our daughter is like his daughter and has given us assurance. It felt good to meet him. What happened to my daughter should not happen to anyone else. My daughter was pleading. Those perpetrators should also plead now. Something must be done to instill fear in criminals like them..."
नाम : सुखबीर सिंह संधू
पद : इलेक्शन कमिश्नर ऑफ इंडिया
काम : प्राइवेट विजेट में देश के टैक्सपेयर का पैसा उड़ाना।
पिछले साल जून में अपनी प्राइवेट 4 दिन की जम्मू यात्रा में टैक्सपेयर के 266044 रुपए खर्च कर दिए ,
साहब ने 55000 का तो सिर्फ होटल बुक किया ।
साहिल फोन से नकल करते पकड़ा गया, प्रोफेसर ने उससे फोन ले लिया और वो उठकर चला गया,
सोशल मीडिया ने नकल करते पकड़ने वाले प्रोफेसर को हैवान बना दिया, साहिल के माता पिता ने खराब पैरेंटिंग का जिम्मा सिस्टम पर थोप दिया,
कोई भी व्यक्ति ऐसे भीड़तंत्र वाले देश में क्यूँ रहेगा? जहां सच से ज्यादा झूठ टिकता हो?
काफी समय पहले की बात है। एक प्रमुख राज्य के मुख्यमंत्री जी दिल्ली में एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री से मिलने पहुंचे। मीटिंग में सेक्रेटरी भी बुलाए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रभावित राज्यों में घर नष्ट हो जाने पर आप प्रति परिवार एक लाख के आसपास रुपये पीड़ितों को देते हैं, इतने से कुछ नहीं होता। आप राज्य का बजट उतना ही रहने दो, बस मेहरबानी इतना कर दीजिए कि प्रति परिवार डेढ़ लाख रुपये तक की व्यवस्था कर दीजिए। बाकि हम देख लेंगे। इस पर सेक्रेटरी ने कहा, सर यह तो गाइडलाइंस का उल्लंघन हो जाएगा। इस पर अनुभवी केंद्रीय मंत्री ने कहा - सेक्रेटरी साहब, गाइडलाइन्स बनाई थी किसने ? आपने ही न…तो आप ही बदल भी दीजिए। आपदा का समय है, हमेशा काग़ज़ की नहीं मानवता की भी सोचा करिए। सेक्रेटरी ने कहा- ओके सर, मैं देखता हूँ क्या कुछ हो सकता है ?
आज जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लग रहे कि SIR पर नियमों को दरकिनार कर सारा सिस्टम अपने हाथ में ले लिया। कुछ आरोप गंभीर भी हैं। हर बात के दो पहलू होते हैं। अब दूसरा पहलू तो ज्ञानेश कुमार ही बता सकते हैं। लेकिन, मुझे लगता है कि कई बार जब कुछ काम समय से या जल्दी करने होते हैं तो जिन नियमों को दरकिनार करना संभव होता है, अधिकारियों पर उनका तोड़ निकालने की मजबूरी होती है। अगर नियमों का अक्षरशः पालन होने लगे तो छोटे काम भी महीनों में होने लगते हैं। इसीलिए कई बार कुछ मौकों पर अधिकारी स्वविवेक से कार्य लेते हैं। जो अधिकारी साहसिक निर्णय करता है, उसे भी मालूम होता है कि सवाल उठने पर जवाबदेही उसकी ही होगी। राष्ट्रव्यापी SIR वैसे भी बड़ा जटिल कार्य है। न जाने कितने CEC आए, लेकिन हाथ डालने का साहस नहीं जुटा पाए। अब ज्ञानेश कुमार ने बर्रे के छत्ते में हाथ डाला है तो मधुमक्खियों का हमला झेलना ही पड़ेगा।
@navneetmishra99 भोजपुरी में जब बहुत अच्छे गाने बनते थे तब भी बिहार में जंगलराज था । मैं भोजपुरी गीतों को पसंद करता हूँ । उसमे बहुत अच्छे संगीत भी है । लेकिन अश्लीलता देखने जाएँगे तो मुख्य धारा में भोजपुरी से ज़्यादा है । ऐसे ott प्लेटफार्म, ऑनलाइन subscription उससे ज़्यादा दीमक ख़राब करते है
Completely agree with you tau. Just one question I have. Sexual violences are every state’s problem, but when such bad incidents happens in Bihar why every Bihari start posting that I am ashamed as Bihari.
IKYK,
The Jamui assault is only a symptom of a chronic disease that ails Bihar: brutalism as the prime response to lost cultural moorings, poverty, and poverty politics.
https://t.co/gF7YEFq1eS