सुख भोग की इच्छा है, तो वो पराधीन बना देती है। साधन निर्माण में पराधीनता नहीं है। जप में, ध्यान में, संकल्प छोड़ने में भी पराधीनता नहीं है।
संकल्प पूर्ति में पराधीनता है, असाधन में पराधीनता है। साधन में स्वतंत्रता है और साधन साध्य से मिलाता है। ईश्वर साध्य है ।
साधन साध्य से मिलाता है और असाधन, असाध्य की तरफ घसीट के ले जाता है ।
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बदलते मौसम की मार हो, वायु प्रदूषण की जकड़न हो या पेट की परेशानियाँ, आयुर्वेद की मधुर मुलेठी को अपनाइए, जो आपके गले की खराश और पेट की एसिडिटी को अपनी सात्त्विक शीतलता से शांत कर नई जीवन शक्ति प्रदान करती है। पूरी पोस्ट पढ़े 👉🏻https://t.co/EoypjJrbE5
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रात्रि अन्ते पिबेत् वारि। रात्रि का अंत हो जाए, प्रभात को मंजन ब्रश करके पानी पीना चाहिए। लीटर सवा लीटर सुबह खूब पानी पीना चाहिए। 2:00 बजे तक पानी दो लीटर सवा दो लीटर पी लें, तो किडनी का function ठीक रहता है। मध्याह्ने तक्रं पिबेत्। मध्याह्न को छाछ पीनी चाहिए। खट्टी ना हो। जितनी दही, तीन गुना पानी; 100 ग्राम दही तो 300 पानी। जीरा, हींग का वघार कर सकते हैं। अगर शरीर में गर्मी है, तो थोड़ा मिश्री डाल सकते हैं। नहीं तो, वायु है तो थोड़ा जीरा और काली मिर्च डाल सकते हैं, सेंधा नमक। दिवस अन्ते पिबेत् दुग्धम्। दिन का अंत हो जाए, तो दूध पान करना चाहिए। वैद्यस्य किं प्रयोजनम्। फिर doctor वैद्य का क्या प्रयोजन है, क्या आवश्यकता है?
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#AsharamjiBapuQuotes : Out of 8.4 million species, only human birth is fit for attaining God. Even gods have to be born as humans if they wish to attain God or Self-realization.
Such Anmol Vachan help us remain focused on ultimate goal of life God-realization or Self-realization.
जहां पहुंचना चाहते हो, वहीं अभी भी हो। लेकिन पता नहीं। ऐसा नहीं की, आपको चलना पड़ेगा, कहीं दूसरी जगह पहुंचेंगे, जहां पहुंचना है। बोले, ईश्वर को पाना है, तो ईश्वर को पाना है। जहां से विचार उठ रहा है, वहीं ईश्वर है, तेरा बाप बैठा है। बोले, ब्रह्म को देखना है। ब्रह्म को तो ब्रह्म को देखने का जो भाव बना ना, वो भाव उसी की सत्ता से उठा है। इतना नजदीक है
सो साहिब सदसदा हजूरे,
अंधा जानत ताको को दूरे।
ज्ञान की आंख नहीं है, इसलिए उसको दूर मानते हैं।
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भय, राग, क्रोध से अंतःकरण मलिन हो जाता है और जीव बेचारा जन्म-मरण का भागी होता है। भय, राग, क्रोध मिटने पर भी जीव को साधनों में 'मैं' बुद्धि मौजूद रहती है।
हकीकत में भय, राग, क्रोध आदि होते हैं मन, बुद्धि में और मन, बुद्धि साधन हैं । तो हम साधनों की शुद्धि, साध्य को देखने के लिए करें तो ठीक है, लेकिन साधनों को ही 'मैं' मानते रहे तो साध्य ठीक से नहीं दिख पाएगा।
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@YssSpeaks Anmol Vachan
Sant Shri Asharamji Bapu कहते हैं " भगवदगीता के एक अध्याय, एक श्लोक या आधे श्लोक का भी जो मनुष्य नित्य पठन करता है, उसकी दुर्गति नही होती, " !
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@AshramJodhpur सत्संग का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाना है। पूज्य बापूजी के Anmol Vachan हमें प्रेम, करुणा और सदाचार को व्यवहार में उतारने की प्रेरणा देते हैं। ❤️✨ #AsharamjiBapuQuotes
@HariommSahoo Anmol Vachan jeevan prawartankaari.
Gagar me Sagar.
#AsharamjiBapuQuotes ko koti koti pranaam.
Sant Shri Asharamji Bapu ji ki maha jaijaikaar!
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@GuptaPradeepkr@hinduvadi072 जब मन ईश्वर से जुड़ता है तो चिंताएँ कमजोर पड़ जाती हैं। Sant Shri Asharamji Bapu के Anmol Vachan हमें सिखाते हैं कि श्रद्धा, भक्ति और सत्संग के सहारे जीवन की हर चुनौती का सामना सहजता से किया जा सकता है।
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Anmol Vachan जीवन को नई दिशा देते हैं। Sakaratmak Jeevan जीने की प्रेरणा और Adhyatmik Gyan का प्रकाश हमें हर परिस्थिति में स्थिर रखता है। यही संदेश हमें भीतर से मजबूत बनाता है। 🙏🏻✨
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#AsharamjiBapuQuotes : One should not scratch one's head with both hands. One should not touch the head with unclean hands. Otherwise, the intellect will diminish.
Such Anmol Vachan encourage adoption of good habits & disciplined conduct, paving way for our holistic development.
जीवन की सच्ची सफलता बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि मन की शांति और आत्मसंतोष में है।
Sant Shri Asharamji Bapu के Anmol Vachan हमें भीतर की दिव्यता को पहचानने की प्रेरणा देते हैं।
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सत्य के समान कोई व्रत नहीं है, आत्मज्ञान के समान कोई ज्ञान नहीं है, गुरु के समान कोई हितैषी नहीं है और भगवान के समान कोई व्यापक, आनंददायक नहीं है !
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परम पूज्य #santshriasharamjibapu की पावन प्रेरणा से बाल संस्कार विभाग, अमरावती, महाराष्ट्र द्वारा एक दिवसीय ग्रीष्मकालीन बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु योग व उच्च संस्कार शिबीर का बड़े धूमधाम से आयोजन किया गया। 120+ बच्चों ने शिबीर का लाभ लिया।
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