कोई बीमार हो घर में, नहीं धीरज वो खोती है;
छुपा अश्रु नयन के वो, कहीं कोने में रोती है।
सघन अंधियार हरती जो संग उजियारे लाकर,
सुसंस्कारी, सरल, सौम्य, वो गृहलक्ष्मी होती है।
मनी भंडारी ✍🏻
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चार रंग की स्वेटर ❤️🌼....... गीतांश ❣️
....... मनी भंडारी ✍🏻
हर रिश्ते का सबसे सच्चा मरहम है…
जहाँ शब्दों में अपनापन जीवित रहे, वहाँ रिश्ते उधड़ते नहीं,फिर से मुस्कुरा उठते हैं।
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हर वर्ष जंगलों की हरियाली धधकती लपटों में समा जाती है और उसके साथ न जाने कितने निरीह पशु-पक्षी,पेड़-पौधे उस अग्नि का शिकार हो जाते हैं।सबसे अधिक पीड़ा इस बात की होती है कि इन घटनाओं के बाद भी जिम्मेदार विभागों की सक्रियता अक्सर केवल कागज़ों तक सीमित दिखाई देती है।
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साथ तुम्हारा मिला मुझे जो, कठिन राह भी हुए सरल।
प्रीत रीत को निभा रही मैं, प्रेम भावना हुई प्रबल।
हर्षित मन से साथ बंधी जब, सप्तपदी में संग तुम्हारे
अनगिनत वो प्रार्थनाएं, मंगल मिलन संग हुई सफल।
~मनी भंडारी ✍🏻
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जिंदगी का खेत बंजर, नव बीज बोना चाहती हूं,
गोद अपनी दो मुझे तुम, मां मैं सोना चाहती हूं।
है नहीं अब कुछ सजीला, उर कंटीला हो चला,
कंटकों के अश्रु धोकर, हां मैं रोना चाहती हूं।
मनी भंडारी ✍🏻
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बचपन की वो शरारतें भी क्या शरारतें थीं।नटखट से हम हर वक्त कुछ ना कुछ नया करने को तैयार।आज जब पीछे मुड़कर देखते हैं,तो लगता है वो नादानियाँ ही सबसे खूबसूरत थीं।वो बेफिक्र दिन,वो खुलकर जीना.
शायद जिंदगी का सबसे सच्चा और प्यारा हिस्सा वही था
— मनी भंडारी
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जो आँगन कभी जीवन का केंद्र था, वह अब स्मृतियों का बोझ उठाए खड़ा है।चौक, छज्जे, पेड़-पौधे सब जैसे इंतज़ार में खामोश खड़े हैं कि कोई लौटे और फिर से उन्हें जीवंत कर दे। #पहाड़#मुक्तक#पलायन#उत्तराखंड#पौड़ी#अल्मोड़ा#viral
प्रेम का धागा ‘तुम से हम’ तक बुन लो अगर,
प्रेयसी, मुझे खुद की तुम चुन लो अगर,
प्रेम का यह मौन संवाद पूर्ण हो जाएगा,
बिन बोले ही मुझे तुम सुन लो अगर।
मनी भंडारी ✍🏻
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