पूज्य संतश्री आशारामजी बापूजी का ६२वाँ आत्मसाक्षात्कार दिवस
12 अक्टूबर
आत्मज्ञान इस जीव का द्वैत भाव मिटा के अद्वैत ज्ञान का प्रकाश कर देता है । जो आत्मज्ञानरहित हैं वे चाहे कुछ भी पा लें.- पूज्य बापूजी
सितम्बर2026 अंक405 पेज4
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कितनी भी सिद्धियाँ हासिल कर लो, इन्द्रपद पा लो लेकिन यदि संयम जीवन में नहीं है तो कोई लाभ नहीं, आत्मसाक्षात्कार नहीं होगा । संयम जीवन में बहुत आवश्यक है।
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तीन चीज़ें श्राद्ध में प्रशंसनीय हैं:-
एक तो शुद्धि, दूसरा अक्रोध और तीसरा आत्वरिता (जल्दबाजी नहीं)।
तीन चीज़ें श्राद्ध में पवित्र :-
तिल श्राद्ध में पवित्र हैं। बेटी का बेटा श्राद्ध कराता है तो पवित्र माना जाता है और कुतुप काल पवित्र माना जाता है। 11 बजकर 36 मिनट से लेकर 12 बजकर 24 मिनट तक वो विशेष काल माना जाता है।
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#श्राद्ध_महिमा
ब्रह्मज्ञानी स्वयं को ब्रह्मस्वरूप जानता है
उपनिषद् का उद्घोष है—
“अहं ब्रह्मास्मि।”
बृहदारण्यक उपनिषद् 1.4.10
अर्थात् ब्रह्मज्ञानी देह, मन और अहंकार से परे अपने वास्तविक स्वरूप को ब्रह्म के रूप में अनुभव करता है।
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जैसे ओमकार बीज मंत्र है, ऐसे 21 बीज मंत्र हैं। जैसे थं.. थं.. थं ..थं.. थं.. स्त्री संबंधी रोग सारे थम जाएंगे। 108 बार जप करे, प्राणायाम करे। मासिक तकलीफ, ये वो, हाई बीपी, लो बीपी ये सब थम जाएगा। ऐसे घुटनों का दर्द है तो बं... बं ...बं ..बं.. बं ..बं ..बं.. सवा लाख बार जप करे, शिवरात्रि की रात को। घुटनों की तकलीफ बं बं हो जाएगी। भाग जाएगी। ऐसे ऐसे बीज मंत्र है कि बाप रे बाप कोई आलसी आदमी है। निद्रा आती है। भजन करते तो आलस होता है। लं.. लं.. लं.. लं.. लं.. लं ..लं.. लं.. लं.. लं ..लं ..लं.. 108 बार जप करे, प्राणायाम करे, फुर्तीला बन जाएगा।
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|| Thought of the Day ||
हरिनाम स्मरण से केवल शारीरिक स्वास्थ्य-लाभ ही नहीं अपितु प्राणशक्ति और आत्मशक्ति का भी विकास किया जा सकता है ।
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ब्रह्मज्ञानी
दुर्लभ मगर … सुलभ !
ब्रह्मज्ञानी को अपने और दूसरे के बीच मूलभूत भेद दिखाई नहीं देता। इसलिए उसके भीतर करुणा, मैत्री और समभाव उत्पन्न होता है। ….वह समस्त प्राणियों में एक ही आत्मा को देखता है।
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It's #QuizTime!
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