हेलो @grok
राजस्थान की ऐसी कौन-सी जातियाँ हैं, जिनका संबंध पूर्ण रूप से राजस्थान (वर्तमान नाम) से है?
और जो आदिकाल (प्राचीन काल) से राजस्थान में निवास करती आ रही है?
पहली लाइन में जातियो का नाम बताओ
@HansrajMeena आरक्षण पर सवाल उठाने वालों को पहले इन बच्चों का वह संघर्ष देखना चाहिए जो वे हर रोज अपने अधिकारों और पढ़ाई के लिए करते हैं। AC कमरों में बैठकर लिखी गई पोस्ट से जमीनी हकीकत नहीं बदलती।
DNA रिपोर्ट और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित डॉ. विलास खरात की चर्चित पुस्तक-
📖 "विदेशी ब्राह्मणों की मातृभूमि: वेस्ट यूरेशिया"
इतिहास, मानव आनुवंशिकी (Genetics) और सामाजिक संरचना को नए दृष्टिकोण से समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़।
#History#DNA
DNA रिपोर्ट और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित डॉ. विलास खरात की चर्चित पुस्तक-
📖 "विदेशी ब्राह्मणों की मातृभूमि: वेस्ट यूरेशिया"
इतिहास, मानव आनुवंशिकी (Genetics) और सामाजिक संरचना को नए दृष्टिकोण से समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़।
#History#DNA
DNA रिपोर्ट और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित डॉ. विलास खरात की चर्चित पुस्तक-
📖 "विदेशी ब्राह्मणों की मातृभूमि: वेस्ट यूरेशिया"
इतिहास, मानव आनुवंशिकी (Genetics) और सामाजिक संरचना को नए दृष्टिकोण से समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़।
#History#DNA
DNA रिपोर्ट और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित डॉ. विलास खरात की चर्चित पुस्तक-
📖 "विदेशी ब्राह्मणों की मातृभूमि: वेस्ट यूरेशिया"
इतिहास, मानव आनुवंशिकी (Genetics) और सामाजिक संरचना को नए दृष्टिकोण से समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़।
#History#DNA
कई सालों तक शिक्षा पर वर्ग विशेष का 100% कब्जा रहा,
व्यापार पर एक खास तबके का पूरा एकाधिकार रहा। तब कभी किसी ने सिस्टम पर सवाल नहीं उठाया।
लेकिन आज जब 90% बहुजन और वंचित समाज को आगे बढ़ाने के लिए 70 साल से 49.5% हिस्सेदारी दी जा रही है, तो सबको संविधान और आरक्षण से तकलीफ होने लगी है।
#Reservation #VikasDivyakirti
कई सालों तक शिक्षा पर वर्ग विशेष का 100% कब्जा रहा,
व्यापार पर एक खास तबके का पूरा एकाधिकार रहा। तब कभी किसी ने सिस्टम पर सवाल नहीं उठाया।
लेकिन आज जब 90% बहुजन और वंचित समाज को आगे बढ़ाने के लिए 70 साल से 49.5% हिस्सेदारी दी जा रही है, तो सबको संविधान और आरक्षण से तकलीफ होने लगी है।
#Reservation #VikasDivyakirti
सेवा में,
माननीय अध्यक्ष महोदय,
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC),
@NCSC_GoI
भारत सरकार, नई दिल्ली।
विषय: आरक्षण सुधार आंदोलन की आड़ में दलित समुदाय, संवैधानिक प्रतीकों एवं वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों/अधिकारियों के विरुद्ध सोशल मीडिया एवं मुख्यधारा के मीडिया में प्रसारित हेट स्पीच पर रोक लगाने हेतु तत्काल दिशा-निर्देश जारी करने के संबंध में।
महोदय,
मैं आपका ध्यान एक अत्यंत संवेदनशील एवं गंभीर विषय की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। हाल ही में 'आरक्षण सुधार आंदोलन' (RHA) की आड़ में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों और मुख्यधारा (legacy) के मीडिया में अनुसूचित जाति (दलित) समुदाय के विरुद्ध लक्षित घृणास्पद वक्तव्यों (Hate Speech) एवं विद्वेषपूर्ण सामग्री में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है।
इस संदर्भ में निम्नलिखित बिंदु आपके संज्ञान में लाना आवश्यक हैं:
समुदाय और संवैधानिक प्रतीकों का अपमान: वैचारिक विमर्श और सुधार के नाम पर संपूर्ण दलित समाज के लिए अपमानजनक व आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही, संविधान निर्माता बोधिसत्व डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की प्रतिमा, विचारों और प्रतिष्ठा को सुनियोजित रूप से धूमिल करने का प्रयास हो रहा है।
वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को निशाना बनाना: इस अभियान के अंतर्गत संवैधानिक पदों पर आसीन संसद सदस्यों (MPs) के साथ-साथ अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले वरिष्ठ IAS, IPS एवं अन्य उच्चाधिकारियों को सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत हमलों व दुर्भावनापूर्ण ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है।
मीडिया द्वारा अनियंत्रित प्रसारण: पारंपरिक मीडिया तथा डिजिटल/सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस प्रकार के विभाजनकारी एवं नफरत फैलाने वाले वक्तव्यों को बिना किसी जवाबदेही के व्यापक कवरेज दे रहे हैं, जिससे समाज में सौहार्द और अनुसूचित जाति समुदाय की गरिमा प्रभावित हो रही है।
अतः आयोग से विनम्र निवेदन:
मीडिया दिशा-निर्देश (Advisory): सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के साथ समन्वय स्थापित कर समस्त डिजिटल प्लेटफॉर्मों एवं मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ, ताकि अनुसूचित जाति वर्ग के विरुद्ध प्रसारित किसी भी प्रकार की हेट स्पीच पर तुरंत रोक लगाई जा सके।
कानूनी कार्रवाई: अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (संशोधित) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत इस प्रकार के घृणास्पद अभियानों का संचालन करने वाले तत्वों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की निगरानी की जाए।
संवैधानिक संरक्षण: आयोग अपने संवैधानिक दायित्वों (अनुच्छेद 338) के तहत इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित प्राधिकारियों से त्वरित कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) तलब करे।
संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा हेतु आपके त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा है।
भवदीय,
अहिंदा डीईआई (Ahinda DEI)
@KraantiKumar NFS और Candidates Not Available के नाम पर आरक्षित वर्ग के युवाओं को बाहर करना और लेटरल एंट्री से बैकडोर एंट्री देना... यह खुला खेल बन चुका है।
EWS का कोटा पूरी तरह भर दिया जाता है. EWS की एक भी सीट ओबीसी एससी या एसटी को नही दी जाती.
ओबीसी एससी एसटी कोटे में दो तरीकों से चालबाजी की जाती है.
• Not Found Suitable
• Candidates not Available
यही तरीका अपनाकर ओबीसी एससी एससी कैंडिडेट को किनारे लगाकर इन सीटों को जनरल कैटोगरी वालों से भर दिया जाता है.
तीसरा तरीका है सरकारी पदों पर कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से भर्ती. चौथा तरीका है डिपार्टमेंट को निजीकरण कर ठेकेदारों के हवाले कर देना.
आरक्षण जीतना है आज तक कभी ईमानदारी से दिया नही गया.
वे आपका आरक्षण खत्म करने की बात करते हैं. तो आप लोग उनका जातीय विशेषाधिकार और ओवर रिप्रजेंटेशन खत्म करने की बात क्यों करते.