There are only three shortcomings in life: Daaridrya (poverty), Dukha (sorrow), and Bhaya (fear). If Maa Baglamukhi is pleased, all these things will be fixed.
हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव
@pmoindia
आज भारत को अगर किसी क्षेत्र में सबसे तेज विकास की जरूरत है तो वो है रक्षा क्षेत्र है क्योंकि आज जिस तरह की वैश्विक परिस्थितियां हैं उनमें शेष सभी विकास धरे के धरे रह जायेंगे।।।।
सभी विकास कार्य स्थगित कर रक्षा क्षेत्र के विकास पर खर्च बढ़ाया जाय वो भी अप्रत्याशित।।
वेनेजुएला के उदाहरण से भारत के बुद्धुओं अर्थात बुद्धिजीवियों को समझ आ जाना चाहिए कि ढाई हजार साल पहले तथागत बुद्ध ने क्यों कहा था.
"राजसैनिक को प्रवज्या नहीं देनी चाहिए."
जब एक राजवंश इस नियम से विचलित होता उसे हटा दिया जाता और उसकी जगह तलवार चमकाता दूसरा राजवंश आ जाता था.
यहाँ तक कि अशोक ने एकमात्र स्वतंत्र जनपद कलिंग पर हमला किया, जीता और फिर युद्ध पर आँसू हजार बहाए...
लेकिन, इतना कुछ करने के उपरांत जमीन एक इंच फिर भी नहीं छोड़ी.
गुप्तों ने अफगानिस्तान में सेना भेजी और फिर शांति का प्रचार किया, मंदिर स्तूप बनवाये.
हर्षवर्धन ने पहले उत्तरापथ विजय की फिर प्रयाग में सर्वस्व दान करते रहे।
फिर बीसवी शताब्दी में एक पाखंडी आदमी आया.
अपनी दयनीय काया को अपना हथियार बनाकर उसने जनता को 'अहिंसा' का ऐसा उल्टा पाठ पढ़ाया कि सेना को भंग करने तक की बातें होने लगीं और लेहरू के प्रिय जनरल बी एम कौल सेना से मकान बनवाने लगे.
लेकिन, अब तो हिंदुओं को समझ आ जाना चाहिए कि दुनियाँ की हकीकत क्या है.
वास्तविकता यह है कि.... चाहे व्यक्ति हो या समाज या संस्कृति या राष्ट्र, जीवित वही रहता है जो शक्तिशाली होता है वरना कमजोर का तो ईराक और वेनेजुएला हो जाता है.
समझने लायक बात है कि.... जिस अमेरिका को अपने यहाँ बसे आतंकवादी पन्नू की हत्या से भी एतराज है वह दूसरे देश में घुसकर वहाँ के राष्ट्रपति तक को बंधक बना लेता है.
अगर अमेरिका को लोकतंत्र की इतनी परवाह है तो चीन और रूस तो छोड़िये...
सिर्फ, उत्तर कोरिया पर हमला करके देख ले.
खैर, उत्तर कोरिया भी छोड़िये... क्योंकि, वहाँ तो परमाणु बम है..
इसीलिए, वो सऊदी अरब, यूएई पर ही हमला करके देख ले.
मानो या न मानो... लेकिन, यह एक कटु सच्चाई है कि.... शक्ति में ही सामर्थ्य होती है चाहे वह शांति की हो या दंड की..
और, यह मानवता के इतिहास का सबसे कड़वा सच है.
दया, करुणा, अहिंसा का अधिकार भी शक्तिवान को ही है.
इसीलिए....
राष्ट्र के स्तर पर,
धर्म के स्तर पर,
व्यक्ति के स्तर पर,
शक्ति अर्जित करना प्रत्येक हिंदू का व्यक्तिगत नैतिक, धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है वरना आपको मिटाने के लिये अमेरिका और चीन को बस चालीस करोड़ कटेशरों को उकसाना और हथियार देना भर है.
हमारे हर देवी-देवता का एक हाथ अभय मुद्रा में शांति प्रसारित करता है और दूसरे हाथ में थमा शस्त्र उस शांति की रक्षा करता है.
बस समस्या यह है कि हिंदुओं को न व्यक्तिगत शारीरिक शक्ति में रुचि है न सामाजिक शक्ति में.
यही कारण है कि, मोदी जी... ऐन केन प्रकारेण (चाहे आरक्षण के नाम पर हो या अंबेडकर के नाम पर) हिंदुओं को एक एकजुट रखने का प्रयास करते हुए तेजी से देश की सैन्य शक्ति बढ़ाने में लगे हुए हैं.
क्योंकि, दुनिया चाहे 21वीं सदी में प्रवेश कर जाए या फिर 27वीं सदी में...
राजा भर्तिहरी के ग्रंथ नीतिशतकम् का ये कथन सर्वकालिक है...
"वीर भोग्या वसुंधरा..!"
जय महाकाल...!!!
#Venezuela #trump #Madurai
बाकी सब तो सही है लेकिन आपने इसमें शब्द प्रयोग किया है कि ये राश्ट्रीय संकट है।
अरे भाई ये संकट ही नहीं है कयोंकि अपने मोदी जी आपदा ( संकट) में भी अवसर तलाशने में माहिर खिलाड़ी हैं।
ये इटालियन वे ऑफ़ डेमोक्रेसी है, ट्रम्प के 50% टेरीफ के बाद राहुल गाँधी की आँखों मे जो चमक है वो चाणक्य की बात याद दिलाती है कि विदेशी माता की संतान कभी देशभक्त नहीं हो सकती।
विचारधारा कोई भी हो ये एक राष्ट्रीय संकट है कोई राजनीतिक संभावना नहीं। कांग्रेस मे ही शशि थरूर और राजीव शुक्ला ने डोनाल्ड ट्रम्प को अच्छा जवाब दिया है जो प्रशंसनीय है।
राहुल गाँधी का आचरण इस दृष्टि से अच्छा है कि यदि किसी के मन मे ये बंदा एक विकल्प के रूप मे दिख रहा हो तो उस पर काली स्याही पोत सकते है।
बाकी आगे की कमेंट बाक्स में पढ़ें .....
केवल वजीफा दो वो भी केवल होशियार बच्चों को।
किताबों और कापियों के रेट सरकार तय करे जरूरत पड़े तो प्रकाशक को सब्सिडी दो।
अर्थात पुरानी शिक्षा पद्धति लागू करो ।
क्या पूर्व की सरकारों की तरह भाजपा की सरकारें भी शिक्षा माफियाओं के समक्ष नतमस्तक हैं।
@myogioffice@pmoindia
उत्तर प्रदेश में लगभग 5000 सरकारी स्कूल बंद होने जा रहे हैं।
सरकारी स्कूल में मिड डे मील के नाम पर निम्न आय वर्ग के सम्मान को खत्म किया जाना इसका एक बड़ा कारण है।
पूर्व की भांति शिक्षा के स्तर को सुधारो और फ़्री का सब बंद करो ।