सोशल मीडिया पर ‘एलियन स्टार’ के नाम से मशहूर इस 13 वर्षीय लड़के का नाम मोतीलाल मेघवाल है। कभी अपने अलग लुक की वजह से मजाक का सामना करने वाले मोतीलाल ने उसी चीज़ को अपनी ताकत बना लिया। इंस्टाग्राम रील्स, फेसबुक और यूट्यूब पर अपने हुनर से लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच बनाने वाला मोतीलाल इस बात की मिसाल है कि दलित समाज के बच्चे भी अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर पहचान बना रहे हैं। भीख मांगकर नहीं, मेहनत करके नाम कमाया है।
एक ट्रेंड चल रहा है— 'Reservation Hatao'
हो सकता है आपके चार दोस्त हों, जिन्हें लगता हो कि आरक्षण की वजह से उनका चयन नहीं हुआ। उनकी पीड़ा भी वास्तविक है, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
लेकिन क्या सिर्फ़ उन्हीं चार लोगों की कहानी पूरे भारत की कहानी है?
मैं गाँव से आता हूँ। मैंने अपनी आँखों से ऐसे परिवार देखे हैं जो इंसानी मल साफ़ करते थे। ऐसे बच्चे देखे हैं जिन्हें स्कूल में अलग बैठाया जाता था। जिनके छू लेने पर लोग नहाने चले जाते थे। यह कोई सैकड़ों साल पुरानी कहानी नहीं, आज भी बहुत से गाँव ऐसे हैं जहाँ वो समाज के नल से पानी नहीं पी सकते। आज भी उनकी बारात गाँव के बीच से नहीं निकल सकती।
सोचिए... जिस समाज ने किसी इंसान को जन्म के आधार पर ही सम्मान से वंचित कर दिया हो, उस मानसिक और सामाजिक दूरी का क्या ?
इसका मतलब यह भी नहीं कि आज का आरक्षण सिस्टम बिल्कुल परफेक्ट है।मैं खुद मानता हूँ कि Reforms की ज़रूरत है।?
जैसे General वर्ग में EWS आया।
जैसे OBC में Creamy Layer और Non-Creamy Layer का सिद्धांत आया।
SC/ST आरक्षण में जिन परिवारों की कई पीढ़ियाँ शिक्षा और अवसरों के माध्यम से आगे बढ़ चुकी हैं, उनके बारे में भी नीति-निर्माण के स्तर पर चर्चा हो सकती है।
लेकिन एक बात समझिए।
जब राजनीति आज भी जाति पर होती है...
जब समाज में आज भी जाति पूछी जाती है...
जब सामाजिक भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ...तब केवल यह कहना कि "आरक्षण पूरी तरह खत्म कर दो और सब कुछ सिर्फ़ आर्थिक आधार पर कर दो"
मेरा मानना है कि देश को दो अतियों से बचना होगा।
एक - 'कुछ मत बदलो।'
दूसरी -'सब खत्म कर दो।
'सही रास्ता है- सुधार (Reform), डेटा के आधार पर नीति, और सामाजिक न्याय के साथ समान अवसर।
क्योंकि किसी भी नीति का उद्देश्य समाज को बाँटना नहीं, बल्कि एक दिन ऐसी स्थिति तक पहुँचाना होना चाहिए जहाँ किसी विशेष सहायता की आवश्यकता ही न रह जाए।
दिल्ली पुलिस, मोदी-शाह की हुकूमत तो सुने ही, आम युवाओं! ये भाषण आपको ज़रूर सुनना चाहिए. इस आंदोलन में 23 दिन तक अनशन पर बैठी @neha_aisa का ये भाषण इस मोड़ पर बहुत ज़रूरी हस्तक्षेप है.
सरकारी कर्मचारियों का हक़ मत छीनो भजनलाल सरकार, इलाज को आसान करो!
अब RGHS के तहत ₹2,000 से अधिक की जांच कराने से पहले प्री-ऑथराइजेशन लेना अनिवार्य होगा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मरीज की बीमारी भी सरकारी अनुमति का इंतजार करेगी? अस्पतालों में इलाज के लिए पहुँचा मरीज पहले ही शारीरिक और मानसिक पीड़ा से गुजर रहा होता है। ऐसे समय में यदि डॉक्टर को भी जांच कराने से पहले मंजूरी का इंतजार करना पड़े, तो इससे इलाज में देरी की आशंका बढ़ सकती है।
भजनलाल सरकार को यह समझना चाहिए कि स्वास्थ्य सेवाओं में समय ही सबसे बड़ा उपचार होता है। मरीजों को राहत देने के बजाय यदि नई प्रशासनिक बाधाएँ खड़ी की जाएँगी, तो उसका बोझ सीधे आम जनता पर पड़ेगा।
सरकार यदि अनियमितताओं पर रोक लगाना चाहती है तो उसके अन्य प्रभावी उपाय हो सकते हैं, लेकिन ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिससे मरीजों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़े।
जनता को इलाज चाहिए, अनुमति नहीं। डॉक्टर को मरीज का उपचार करना चाहिए, फाइलों का इंतजार नहीं। भजनलाल सरकार से आग्रह है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार करे और ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे जिससे मरीजों को समय पर जांच और उपचार मिल सके। जनहित से बढ़कर कुछ नहीं।
@BhajanlalBjp