कुछ समय पहले, यह ज्ञात हुआ कि कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्री मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके साथ अन्य वरिष्ठ नेता, जैसे कि श्री राहुल गांधी, श्रीमती प्रियंका गांधी इत्यादि अकस्मात ही अकबर रोड़ के समीप एक स्थान पर अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गयेहैं। सरकार ने इस वरिष्ठ दल की गरिमा के दृष्टिगत, मुझे स्वंय और मेरे साथ केंद्रीय गृह सचिव, श्री गोविंद मोहन को इन वरिष्ठ नेताओं से वार्ता करने हेतु मौके पर भेजा। श्री राहुल गांधी से अनुरोध किया गया कि वे अपना धरना समाप्त करें, क्योंकि यह स्थल धरने का स्थल नहीं है, और यहां पर धरना करने से जनसाधारण को काफी असुविधा भी पहुंच रही है। श्री राहुल गांधी जी ने यह मांग रखी कि यदि सरकार संसद में NEET और उससे संबंधित आंदोलन के साथ जुड़े सभी विषयों पर चर्चा करने के लिए मान जाती है, तो वह अपना धरना तुरंत समाप्त कर देगें। कुछ ही क्षणों में सरकार के शीर्ष नेत्रत्व की अनुमति लेने के बाद, श्री राहुल गांधी को यह आश्वसान दिया गया कि उनकी मांग को मान लिया गया है, तथा सरकार NEET और उससे संबंधित आंदोलन के साथ जुड़े सभी विषयों पर संसद में चर्चा करने को तैयार है।
श्री राहुल गांधी जी को जब यह सूचना पहुंचाई गई तो उन्होंने कहा कि वह इतने पर ही नहीं मानेंगे अपितु उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का भी आश्वसान चाहा। उन्होंने कहा कि अब मेरी दो मांगे हैं: संसद में चर्चा एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा। जब उनको याद दिलाया गया कि पहले उन्होने केवल चर्चा की ही मांग की थी, तब उन्होंने कहा कि अब मेरी मांगें बदल गयी हैं। जब उनकों विनम्रता से ये समझाने का प्रयास किया गया कि उनके जैसे वरिष्ठ नेता को इतनी जल्दी अपनी बात से मुकर जाना शोभा नहीं देता, तो उन्होंने कहा कि यह उनकी मर्जी है। जब गृह सचिव ने यह समझाने का प्रयास किया कि यह स्थल धरने के लिए अनुकूल नही हैं तो उनका उत्तर था कि ये भी उनकी मर्जी है वे जहां बैठें।
श्री राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता एवं नेता प्रतिपक्ष काअपनी बात से मुकर जाना दुर्भाग्यपूर्ण है और लोकंतंत्र की हर मर्यादा के विपरीत है। सरकार NEET और उससे संबंधित आंदोलन के साथ जुड़े सभी विषयों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार है। इसके विपरीत, कांग्रेस पार्टी ने आज तक इस गंभीर विषय पर नियमानुसार औपचारिक चर्चा करने का कोई नोटिस नहीं दिया है। श्री राहुल गांधी का व्यवहार लोकतंत्र के ऊसूलों से मेल नहीं खाता है।
प्रधानमंत्री मोदी जी का काम लगभग पूर्ण हो गया अब अमित शाह जी की बारी है
सावधान रहें सुरक्षित रहें देश से प्रेम करें देश विरोधी गतिविधियों को करने वालों के चेहरे सामने आ चुके हैं और एक विशेष जानकारी इस तरह की बात कीजिए उत्तर प्रदेश की सीमाओं से बाहर कीजिए योगी बाबा का मिजाज दूसरा है जंतर मंतर ख़ाली कराया जा चुका है।
उछल कूद इतनी होगी, जितनी सरकार चाहेगी।
आज राजधानी की सड़को पर उत्पात मचाकर लिमिट क्रॉस हो चुकी है- अब किसी कॉकरोच को सभ्य समाज दूषित करने का मौक़ा नहीं मिलना चाहिए।
सिर्फ़ 1 मौत!
सिर्फ़ 1 मौत...आज 'इंडिया' में कॉकरोच के विदेशी हैंडलर और पॉलिटिकल मास्टर बस यही चाहते थे कि दंगे बढ़ें और उन्हें दूसरे राज्यों में फैलाकर आखिर में पूरा भारत जला दिया जाए।
सिर्फ़ 1 आदमी!
सिर्फ़ 1 आदमी @AmitShah ने हालात को अच्छे से संभालकर इस साज़िश को नाकाम कर दिया। उनके सब्र का इम्तिहान लिया। उन्हें एक्सपोज़ होने दिया। उनके पॉलिटिकल मास्टर्स को खुद ही एक्सपोज़ होने दिया। उनका असली चेहरा देश के सामने लाया। सोनम वांगचुक को 'सही' समय पर उठाकर उन्हें अंदर से तोड़ दिया। हॉस्पिटल के कागज़ों पर उनके मर्ज़ी के साइन करवाए। और फिर....दंगाईयों को कंट्रोल करने के लिए बेरहमी से ताकत का इस्तेमाल किया लेकिन एक भी मौत नहीं होने दी।
आप सोच सकते हैं कि कितना ध्यान से ऑपरेशन किया गया होगा और कितनी सावधानी बरती गई होगी, क्योंकि इंटेलिजेंस रिपोर्ट थी कि कॉकरोच हैंडलर खुद कहीं से फायरिंग करके कुछ कॉकरोच मार सकते हैं और फिर इस मौके का इस्तेमाल करके मामले को बढ़ा सकते हैं।
आज सिक्योरिटी फोर्स ने बिना एक भी गोली चलाए और पुलिस फोर्स के नाम पर 'किसी' को ऐसा करने नहीं दिया, ऐसी हर कोशिश नाकाम कर दी गई।
इसके लिए खड़े होकर तालियां बजानी चाहिए।
आगे क्या?
जंतर मंतर खाली कराया जा चुका है।
अब FCRA (अमेंडमेंट) बिल पास किया जाए।
हर वो इंसान जो कॉकरोच को फंडिंग 'हैंडल' कर रहा था, उसे ढूंढकर UAPA के तहत सज़ा दी जाए।
मोटा भाई ने बाद में एंटी-CAA प्रोटेस्ट का इस्तेमाल कट्टरपंथी ताकतों को खत्म करने के लिए किया। मोटा भाई ने बाद में 'कथित' किसान विरोध का इस्तेमाल खलीस्तानी ताकतों को खत्म करने के लिए किया।
मोटा भाई आज के मौके का इस्तेमाल अब अर्बन नक्सल को खत्म करने के लिए करेंगे।
मोटा भाई हैं यानी देश सुरक्षित हाथों में है, देश विरोधी अराजक तत्वों को बहुत प्यार और दुलार से कुचला जाएगा ...
साभार
“पेपर लीक पूरे देश की समस्या है। हमने इसे रोकने की कोशिश की, गहलोत जी ने भी कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए।”
— प्रियंका गांधी, राजस्थान में पेपर लीक पर
राहुल गांधी अभी जिस जगह खड़ा है वह जगह मोदी के आवास के पास का हाई अलर्ट जोन है |
यह मालूम होते भी कि मोदी सेंसिटिव लीडर हैं फिर भी राहुल गांधी आवास के नजदीक पहुंच गया | 😡
हिंदुओं सुनो - सरकार हर स्टेप पर अपना काउंटर नहीं कर सकती - कुछ मामले हमको ही उठाने पड़ेंगे |
सोनम वांगचुक को गिरफ्तार करो
अभिजीत दिपके को गिरफ्तार करो
अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करो
यदि आप सहमत हैं तो इस ट्वीट को रीट्वीट करें।
#WeStandWithDelhiPolice
बीजेपी सांसद रवि किशन ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा,
“वह हताश हैं। चुनाव हारने के बाद अब दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता को गालियां दे रहे हैं। मैं महादेव से प्रार्थना करूंगा कि उन्हें सद्बुद्धि और स्वास्थ्य दें।”
इस चित्र में ये जो सज्जन दिखाई दे रहे हैं, ये डॉक्टर सी.पी.मेथ्यु हैं, जो कोट्टायम मेडिकल कॉलेज के केंसर सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर और बाद में प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत हुए,||
60 वर्ष की आयु में इन्होने वह सब भूलने का निर्णय लिया जो कुछ भी उन्होने सीखा था,||
एक पारंपरिक वैद्य को इन्होने अपना गुरु बनाया और उनसे सीखी हुई विद्या से अनगिनत केंसर रोगियों को ठीक किया,||
इनके मरीजों में कई तो ऐसे मरीज थे जिन्हें अमेरिका की मेयो क्लीनिक ने भी जवाब दे दिया था,||
बाद में इन्होने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया और अपना उपनयन संस्कार भी करवाकर वेदों और उपनिषदों का स्वाध्याय किया,||
20 अक्तूबर 2021 को इन का निधन हुआ और सारे अंतिम संस्कार हिन्दू धर्मानुसार हुए,||
केरल के किसी भी समाचारपत्र ने इनके देहावसान का समाचार नहीं छापा, क्योंकि ये ईसाई मत को छोड़कर हिन्दू बन गए थे और सनातन धर्म अपना लिया,||
@narendramodi@NitinNabin@AmitShah@blsanthosh@myogiadityanath@idharampalsingh@mppchaudhary@pmoindia@BJP4India@BJP4UP
हैरान तो में भी हूं जो दूसरे के लिए कुंवा खोदते थे भो।रसी वाले अपने लिए एक भी कुंवा नहीं खोद पाए और 500 साल तक मू।ट पीकर कैसे जिंदा रहे।
@raviparmarIN 😁✌️
जंतर-मंतर पर CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान मंच से जम्मू-कश्मीर के एक सांसद ने अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग उठाई।
जिस आंदोलन की शुरुआत NEET पेपर लीक के विरोध से हुई थी, उसके मंच पर अब अनुच्छेद 370 का मुद्दा भी सामने आ गया है।
अब इस आंदोलन का एजेंडा पूरी तरह से साफ़ हो गया है।
राम मंदिर का मामला सबसे चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि इसमें गहन शोध की आवश्यकता पड़ी। आज भव्य राम मंदिर को देखकर अत्यंत संतोष और गर्व का अनुभव होता है। यह केवल मेरे लिए नहीं, बल्कि पूरी सभ्यता के लिए गौरव का क्षण है।
Jo bhi ho.
History will remember that they couldn’t defeat him democratically. That’s why they resorted to undemocratic means to try to defeat him.
But Mahakal’s blessings are always with him.✌🏻