To reiterate, this is how agriculture is deliberately kept impoverished. When was the last time you heard a mainline economist express concern at this open loot?
जब बात "महात्मा गांधी" की आती है, तो मन में एक धोतीवाले, लाठी टेकते, चरखा चलाते बापू की तस्वीर उभरती है। वही बापू, जिन्होंने अंग्रेजों को नमक की पुड़िया से चक्कर में डाल दिया और सत्य-अहिंसा का ऐसा पाठ पढ़ाया कि दुनिया दंग रह गई। लेकिन सोचो, अगर बापू आज होते, तो क्या कहते? शायद यही, "अरे भाई, मैंने तो रास्ता दिखा दिया, तुम लोग अभी भी ट्रैफिक जाम में फंसे हो!"
गांधी जी का स्टाइल तो देखो! धोती, चप्पल, और एक लाठी—बस, यही थी उनकी पूरी "वॉर्डरोब"। आज के जमाने में लोग "मिनिमलिज्म" की बात करते हैं, इंस्टाग्राम पर फोटो डालते हैं, लेकिन बापू तो मिनिमलिज्म के बादशाह थे। न कोई ब्रांडेड कपड़ा, न कोई डिजाइनर चश्मा, फिर भी पूरी दुनिया उनके पीछे चल पड़ी। आजकल तो लोग एक जींस के लिए EMI चुकाते हैं, और बापू ने तो एक धोती में साम्राज्य हिला दिया!
उनका चरखा भी कमाल था। आज हम "मेड इन चाइना" के पीछे भागते हैं, लेकिन बापू कहते थे, "अपना माल बनाओ, अपनी ताकत बढ़ाओ।" खादी का वह चरखा सिर्फ कपड़ा नहीं, आत्मसम्मान की कहानी बुनता था। लेकिन हम? हम तो ऑनलाइन डिस्काउंट के चक्कर में खादी को भूल गए। बापू होते तो शायद ट्वीट करते, "चरखा चलाओ, वरना विदेशी मॉल में गुलामी पाओ!"
गांधी जी का सत्य और अहिंसा का फॉर्मूला ऐसा था, जैसे कोई सुपरहिट मसाला मूवी—सिम्पल, लेकिन दमदार। दांडी नमक मार्च देखो! एक मुट्ठी नमक उठाया, और अंग्रेजों के पसीने छूट गए। आजकल लोग एक ट्वीट से ट्रोल होने पर हाय-तौबा मचाते हैं, और बापू ने तो बिना ट्विटर के पूरी हुकूमत को ट्रोल कर दिया।
लेकिन आज की दुनिया में सत्य और अहिंसा की बात करो, तो लोग हंसते हैं। "अरे, ये तो पुराना मॉडल है, अब तो गाली-गलौज और ट्रेंडिंग हैशटैग चलते हैं!" बापू की अहिंसा को हमने "बोरिंग" समझ लिया, और सत्य को तो हमने व्हाट्सएप फॉरवर्ड में दफन कर दिया। फिर भी, बापू का वो डायलॉग, "जो बदलाव चाहते हो, वो खुद बनो," आज भी हर सेल्फ-हेल्प बुक में चमक रहा है। बस, फर्क इतना है कि हम उसे पढ़ते हैं, लाइक करते हैं, और भूल जाते है.
30 जनवरी 1948 को जब नाथूराम गोडसे ने गांधी जी को गोली मारी, तो लगा जैसे इंसानियत को ही गोली मार दी गई। "हे राम" कहते हुए बापू चले गए, लेकिन उनके विचारों को मारने की कोशिश आज भी जारी है। उनकी सादगी को हम "पिछड़ा" कहते हैं, उनकी अहिंसा को "कमजोरी" समझते हैं। बापू ने हमें आजादी दी, लेकिन हमने उस आजादी को स्मार्टफोन की स्क्रीन और ट्रोलिंग की कीबोर्ड में कैद कर लिया।
सोचो, अगर बापू आज होते, तो क्या करते? शायद X पर ट्रेंडिंग हैशटैग #Satyagraha चलाते, या इंस्टा लाइव पर चरखा चलाते हुए कहते, "लाइक्स मत करो, खादी पहनो!" लेकिन हम? हम तो उनकी मूर्तियों पर माला चढ़ाते हैं, 2 अक्टूबर को छुट्टी मनाते हैं, और बस। बापू की शिक्षाओं को तो हमने "हिस्ट्री" की किताब में बंद कर दिया।
आज की दुनिया में, जहां हर कोई चिल्ला-चिल्लाकर अपनी बात मनवाना चाहता है, बापू का शांत लेकिन दृढ़ रास्ता हमें रास्ता दिखाता है। उनकी अहिंसा कोई कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ा हथियार है। उनका सत्य कोई पुरानी कहानी नहीं, बल्कि आज की सबसे बड़ी जरूरत है। और उनकी सादगी? वो तो ऐसा "फैशन" है, जो कभी आउट ऑफ ट्रेंड नहीं होगा।
तो बापू, तुम जहां भी हो, हमें माफ करना। हमने तुम्हारी बात सुनी, समझी, लेकिन फॉलो करने में टाइमलाइन स्क्रॉल कर दी। फिर भी, तुम्हारी वो लाठी, वो चरखा, वो मुस्कान—सब कुछ आज भी हमारे दिल में जिंदा है। तुमने हमें सिखाया कि सच्चाई और प्यार से दुनिया जीती जा सकती है। बस, अब हमें थोड़ा हिम्मत जुटानी है, थोड़ा सत्य अपनाना है, और थोड़ा बापू बनना है।
बापू, तुम कमाल थे, हो, और रहोगे। बस, हम थोड़े नाकाम हैं—पर कोशिश करेंगे, वादा!😎
मेरे मोहल्ले का टैगोर नगर चौक स्थित हनुमान मंदिर अधिकतर सूना ही रहता है,मुहल्ले में 100 % आबादी हिंदू है लेकिन पंडितजी को अधिकतर अकेले ही आरती करते देखा जा सकता है,
ये देख कर मेरे मन में ख्याल आता है वो लोग कहाँ हैं जो मस्जिदों के सामने डीजे बजा कर नाचते हैं?कहाँ हैं वो लोग जो मस्जिदों में भगवा झंडा फ़हरा देते हैं?
वैसे मंदिर से 500 मीटर की दूरी पर ही रायपुर दक्षिण से विधायक और पूर्व सांसद सुनील सोनी का निवास है जो कि हर चुनावों में प्रभु श्री राम के नाम पर वोट की भीख मांगने निकलते हैं लेकिन इस मंदिर में कभी झांकने तक नहीं आए।
जय श्रीराम
पहले वे मुसलमानो के लिए आये
मैं ठठाकर हंसा,
उनसे नफरत जो करता था
फिर वे क्रिस्चियन के लिए आये
मैं चुप था, वे भी विदेशी जो थे।
फिर वे सिखों के लिए आये
निगाहे फेर ली मैनें, मैं सिख भी तो न था
फिर वे जैनियो पर टूटे, मैं मुस्कुराया
ये साले भी बहुत इतरा रहे थे
★★
तब जब वे मेरे लिए आये,
गले मे गद्दार, भ्रस्ट, द्रोही
वामपन्थी के तमगे लटकाए,
लेकर चले
सिर झुकाए मैंने महसूस किया
कोई ठठाकर हंस रहा था
कोई मेरी नस्ल, धर्म,
मेरी भाषा को गालियां दे रहा था
किसी ने कहा- बहुत इतराता था ये
★★
कत्लगाह पहुँच
मैनें आखरी निगाह उठाई
अजब ही मंजर था
हंसती हुई भीड़ में
हरेक के गले एक बिल्ला
पीठ और सर पर
लकड़ियों का गट्ठर था
वे यंत्रवत,
अपने नाप की चितायें सजा रहे थे..
😊
कई बार फ़सलें सूखने लगती हैं, किसान समझ नहीं पाता कि आखिर ऐसे क्यों हो रहा है, जबकि रोग-कीटों से बचाने के लिए दवाई भी डालता है, जबकि इसके पीछे सूत्रकृमि यानी निमेटोड होते हैं।
#RuralTV के ख़ास कार्यकम #KhetiKeDoctor में कृषि वैज्ञानिक डॉ दया श्रीवास्तव बता रहे हैं, कैसे इनसे बचाया जा सकता है।
@icarindia@AgriGoI@FAOeagriculture
पूरा वीडियो देखिए: https://t.co/nxV9WTLpI6
@budhwardee यह आजमाया नुस्खा है जो आचार्य @AchryConfucious आपको कभी नहीं सिखाएंगे @budhwardee ..
"जब भी चाय बहुत मीठी बन जाये तो उस चाय को पीने से पहले एक चम्मच शक्कर खा ले, चाय मीठी नहीं लगेगी।"
ज्ञान बहुत है दीपक भाई, पर मैंने कभी घमण्ड नहीं किया।
"देश के गद्दारो को- गोली मारो सालों को"- डायर चीखा!!
सिख, गुरखा और सिंध के आज्ञाकारी योद्धाओं ने फायर खोल दिया। 1650 गोलियां दागी, 379 लोग मरे, हजार से ऊपर घायल हुए।
बाग की जमीन खून से लाल हो गयी।
ये माकूल सजा थी,
जो रेनिगनल्ड डायर ने तय की थी।
●●
जांच के दौरान, हंटर कमीशन ने डायर से पूछा कि उसने लोगों को आने से रोकने के लिए,पहले ही फौजी पहरा क्यों नहीं लगाया ??
डायर बोला -मैंने तो उन्हें आने दिया। इन सबको मारने की ठान ली थी।’
आखिर इस बाग में जमा सारे लोग धारा 144 का उल्लंघन कर जमा हुए थे। सरकार से प्रदर्शन की अनुमति नही ली थी। मैदान बुक नही कराया था।
देश के खिलाफ पॉलीटिक्स कर रहे थे। राजा के खिलाफ, सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। काले कानून वापस लेने की मांग कर रहे थे।
●●
रौलेट एक्ट, अमन और व्यवस्था बचाने के लिए बनाया गया था। भारतीयों के भले के लिए था।
इसकी मुखालफत, अराजकता को आमंत्रण था। बगावत बर्दाश्त नही होगी। गद्दारी बर्दाश्त नही होगी। सबक सिखाया जाएगा।
पुश्तों तक रूह कांप जाए, ऐसा सबक सिखाया जायेगा।
●●
सीतलवाड़ - क्या मशीनगनें इसलिए नहीं चलवाई कि गाड़ियां अंदर नहीं जा सकीं?
डायर- मैं तुम्हें जवाब दे चुका हूं। गाड़ियां अंदर पहुंचती तो मैं मशीनगनों से ही फायर खोलता। मेरा उद्देश्य क्रांतिकारियों के हौसले तोड़ना था।
सीतलवाड़: या तुम्हारी कोशिश अंग्रेजी राज्य को बचाना था?
डायर: नहीं, अंग्रेजी राज्य बहुत मजबूत है।
●●
डॉ सत्यपाल और सैफुदीन किचलू, इन दो नेताओं को गवर्नमेंट ने कैद कर लिया था।
ये लोग, उस गांधी के फालोवर्स थे जो देश भर में बगावत फैला रहा था। इसलिए इन सबको हर जगह निपटाया जा रहा था, दबाया जा रहा था।
लेकिन ये बंगाल
और ये पंजाब ..
इनकी हिम्मत टूटती न थी।
भला क्या क्या नही किया था डायर ने। मार्शल ला लगाया। पुलिस की लाठी बराबर नजदीक कोई आये, तो कोड़े मारने के आदेश थे।
सड़कों पर साष्टांग घिसट कर चलना था, वैसे ही जैसे ये लोग अपने देवताओं के सामने घिसटते हैं। आखिर ब्रिटिश राज भी भगवान से कम था क्या??
●●
इन तरीकों से दो दिन की शांति के बाद, फिर से खबर आई कि ब्लडी इंडियन पब्लिक मीटिंग करेंगे।
मोहम्मद बशीर मीटिंग बुला रहा है। कन्हैयालाल उसका साथ दे रहा है। शहर में हड़ताल करेंगे, रैली निकलेंगे।
ब्लडी कांग्रेस पीपल..
इनको शबक शिखाना मांगटा
●●
कर्नल रेनिगनल्ड एडवर्ड हैरी डायर, ब्रिटेन में "बुचर ऑफ अमृतसर" के नाम से जाना जाता था। हंटर कमीशन की रिपोर्ट के बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया।
लेकिन बदनाम का ही नाम होता है। जब बुद्ध और गांधी के देश में, हत्यारों की, दंगाइयों की इतनी फैन फॉलोविंग है, तो भला इंग्लैंड में क्यूं कम हो।
डायर का उसका सम्मान किया गया और उसके फैन्स ने 26000 पाउंड का चन्दा करके, इनाम दिया।
●●
पॉपुलर धारणा के अनुसार डायर को उधमसिंह ने मौत के घाट उतारकर हिंदुस्तान का बदला लिया। गलत है, वो दूसरा डायर था - माइकल ओडायर
हत्यारे डायर की मौत, तपेदिक हार्ट स्ट्रोक और लकवे के बाद, 23 जुलाई 1927 को हुई।
तो क्या आखरी दिन, मौत के पहले, उसे आंखों के सामने जलियांवाला बाग के दृश्य दौड़ते दिखाई दिए होंगे??
●●
सुबह 11 बजे मीटिंग थी। बारह बजे तक भीड़ आती रही। साढ़े बारह बजे, पर ऊपर से सर्वे करने को हवाई जहाज गुजरा।
पायलट ने डायर को बताया, कोई छह हजार लोग हैं। अब डायर ने फ़ौज इकट्ठी की।
गाड़ियों में मशीनगनें लदवाई
बाग में सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पढ़ा जा रहा था। हिंदी में, उर्दू में, पंजाबी में, अंग्रेजी में। भीड़ बढ़ती जा रही थी।
डायर की फौज घुसी।
निकलने के रास्ते बंद कर दिए गए।
"देश के गद्दारो को- गोली मारो सालों को"- डायर चीखा!!
■■■
एक सौ छह साल हो चुके। दौर फिर वैसा ही है। देश इंसान से बड़ा, और उसकी मलिकार बनी सरकार, खुदा हो गई है।
धन लूटने की जुगत है, शोषण के कानून हैं। भयावह अधिकार सम्पन्न नई अपराध संहिता आ चुकी है। नेता बुलडोजर पर, सवार गली गली दहशत फैला रहा है। गुंडे न्याय दे रहे हैं, जज पूजा पाठ में लीन हैं।
मैं देख सकता हूँ, कि सत्यपाल, किचलू और बशीर एक बार फिर साथ- साथ बैठे हैं। इस बार सम्विधान की फटी हुई प्रस्तावना पढ़ रहे हैं।
डायर का इंतजार हो रहा हैं।
"ईवीएम में गंभीर खामियाँ हैं"—तुलसी गबार्ड
अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड के ईवीएम को लेकर दिए एक बयान ने वैश्विक स्तर पर चर्चा को जन्म दिया है। उनके अनुसार ईवीएम में ऐसी कमजोरियाँ हैं, जिनका फायदा उठाकर हैकर्स मतदान के परिणामों में हेराफेरी कर सकते हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये सिस्टम लंबे समय से हैकर्स के लिए असुरक्षित रहे हैं और इसके सबूत उनकी एजेंसी को मिले हैं।
इस आधार पर, गबार्ड ने सुझाव दिया है कि अमेरिका में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए पेपर बैलेट सिस्टम को अनिवार्य करना चाहिए, ताकि मतदाताओं का भरोसा बना रहे।
गबार्ड ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी खुफिया एजेंसी को ऐसे प्रमाण मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि ईवीएम में गंभीर खामियाँ हैं। यह सिस्टम हैकिंग के प्रति संवेदनशील है और इसके जरिए वोटों का परिणाम बदला जा सकता है।
उन्होंने तर्क दिया कि इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की जगह पेपर बैलेट का उपयोग करना चाहिए क्योंकि यह तरीका अधिक सुरक्षित और पारदर्शी है, जिससे मतदाताओं को यह भरोसा हो सकेगा कि उनका वोट सही ढंग से दर्ज हुआ है और उसमें कोई छेड़छाड़ नहीं की गई।
यह पहली बार नहीं है जब तुलसी गबार्ड ने ईवीएम की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। पहले भी, 2018 और 2019 में, उन्होंने इस मुद्दे पर बात की थी। उन्होंने 2018 में ट्वीट किया था कि इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम आसानी से हैक हो सकते हैं और उन्होंने पेपर बैलेट या वोटर-वेरिफायड पेपर बैकअप को अनिवार्य करने के लिए एक बिल पेश किया था।
उसके बाद उन्होंने 2019 में 'सिक्योरिंग अमेरिका इलेक्शंस एक्ट' की बात की, जिसमें पेपर बैलेट को अनिवार्य करने की माँग थी ताकि हर वोटर की आवाज सुनी जाए।
#EVM
#EVM_हटाओ_पाखंडी_भगाओ
#BanEVM
Himachal Pradesh sets the trend -- a higher MSP for organic wheat, organic maize, organic turmeric and for organic cow and buffalo milk. An assured and a higher price is the way to encourage a switch over to Natural Farming and provide healthy food. Well done @SukhuSukhvinder ji
BREAKING NEWS 📢
बीफ़ एक्सपोर्ट में नंबर वन, और गाय के नाम पर दंगे!
भक्तों के सपनों का रामराज्य, असल में बना है बीफ़ एक्सपोर्ट हब
भारत दुनिया का No.1 बीफ़ एक्सपोर्टर — और सबसे बड़ा हिस्सा यूपी से! 2016 में इंडिया ने 19.6% मीट एक्सपोर्ट किया — ब्राज़ील के बराबर
◾अल-क़बीर, हिंदुस्तान लीवर, एमआरके फूड्स जैसे बड़े खिलाड़ी,
◾भारत की प्रमुख बीफ़ एक्सपोर्ट कंपनियों के मालिक हिंदू हैं:
◾अरबियन एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड: स्वामी – श्री सुनील कपूर
◾एम.के.आर. फ्रोजन फूड एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड: स्वामी – श्री मदन अब्बोट
◾पी.एम.एल. इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड: स्वामी – श्री ए.एस. बिंद्रा
👉 इससे साफ़ होता है कि भारत में बीफ़ एक्सपोर्ट का बड़ा हिस्सा हिंदू मालिकों के हाथ में है।
बीफ़ बैन सिर्फ़ किताबों में, असल में तो धड़ल्ले से मुनाफा। सरकार की नज़रे इनायत, नियम सिर्फ़ पोस्टर तक!
वीडियो देखिए: कैसे “गौरक्षा” एक ढोंग है और बीफ़ एक्सपोर्ट एक अरबों का धंधा!
#ModiDisasterForIndia #PBKSvCSK #YogiAdityanath