जयपुर स्थित SMS अस्पताल की मोर्चरी के बाहर दिवंगत नर्सिंग कार्मिक दीपक के परिजनों व आंदोलित मेडिकल स्टाफ के साथ बैठा हूं |
राज्य सरकार संवेदनशीलता के साथ आंदोलित परिजनों की मांगो पर सकारात्मक सहमति व्यक्त करें |
राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर द्वारा गर्भवती महिलाओं के संबंध में दिया गया बयान न केवल अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह प्रदेश की मातृ शक्ति, महिलाओं की गरिमा और संवेदनशील लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति असम्मान को भी दर्शाता है।
जब कोई गर्भवती महिला जीवन और स्वास्थ्य से जुड़े संकट का सामना कर रही हो, तब एक जिम्मेदार मंत्री से संवेदनशीलता, सहानुभूति और जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है। लेकिन स्वास्थ्य मंत्री के शब्दों ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों पर आत्ममंथन करने के बजाय पीड़ितों की पीड़ा को हल्के में लेने का प्रयास कर रही है।
सरकार के मंत्री के शब्द केवल व्यक्तिगत विचार नहीं होते, बल्कि वे सरकार की सोच और संवेदनशीलता का प्रतिबिंब होते हैं। गर्भवती महिलाओं, माताओं और बहनों के सम्मान से जुड़े विषयों पर इस प्रकार की टिप्पणी न केवल अमर्यादित है, बल्कि जनता के विश्वास को भी आहत करती है। आज प्रदेश के सरकारी अस्पताल संसाधनों की कमी, चिकित्सकीय अव्यवस्थाओं और जवाबदेही के अभाव जैसे गंभीर प्रश्नों से जूझ रहे हैं। जनता इन समस्याओं का समाधान चाहती है, व्यंग्य और उपहास नहीं। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर को अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए |
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी प्रदेश की माताओं, बहनों और आमजन की भावनाओं के साथ खड़ी है तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp
से मांग करती है कि स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं |
@PMOIndia@RajCMO
दौसा जिले के निवासी एवं महिला चिकित्सालय, जयपुर में संविदा पर कार्यरत नर्सिंग कार्मिक दीपक खारवाल के आत्महत्या कर लेने का अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक प्रकरण संज्ञान में आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा संविदा सेवा समाप्त किए जाने के कारण वे मानसिक रूप से अत्यंत परेशान थे तथा तंत्र की प्रताड़ना से आहत होकर उन्होंने यह कदम उठाया।
प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा आज गंभीर संकट से गुजर रहा है और नाकारा स्वास्थ्य मंत्री की वजह से स्वास्थ्य व्यवस्थाएं लगातार सवालों के घेरे में हैं। इसके बावजूद प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp की चुप्पी चिंताजनक है।
दीपक खारवाल आत्महत्या मामले में नर्सिंग कार्मिक एसएमएस अस्पताल की इमरजेंसी में आंदोलनरत हैं। मैंने राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता कर दिवंगत नर्सिंग कार्मिक के आंदोलित परिजनों एवं प्रतिनिधियों से तत्काल संवाद स्थापित करने तथा उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने के निर्देश दिए हैं।
इस दुःख की घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं शोकाकुल परिवार के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे तथा परिजनों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति दे।
ॐ शांति।
@RajCMO
And for all those asking why I haven’t spoken on the NEET paper leak - first of all, I raised my voice on this issue two years ago, and I’m doing so again today.
I am completely against paper leaks. Everyone involved, at any level, must be thoroughly investigated and held accountable. Students deserve a fair system.
And if the resignation of any minister can help ensure accountability and prevent such incidents from happening again, then yes - resignations should happen. No individual or position should be above the interests of students and the integrity of the education system.
For those calling me a BJP supporter, let me make one thing clear: it was Maneka Gandhi, a BJP leader at the time, who got a fake snake venom case filed against me. So I have no personal attachment to any political party.
I know the difference between right and wrong. I support students and their genuine concerns, but I will always oppose anyone trying to push anti-India agendas under the cover of student activism. I have raised my voice against such things before, and I will continue to do so.
This is Arpit Sharma. I strongly disagree with some of his publicly expressed views, including those related to Umar Khalid. Personally, I believe that anyone who supports terrorists or justifies terrorism is promoting a dangerous mindset. People should examine public statements carefully and decide for themselves instead of blindly following anyone in the name of student activism.
I’m not against students in fact, I support genuine concerns regarding the NEET paper leak. But I cannot support individuals or groups who use students’ issues to push their own agendas or openly back people like Umar Khalid and activities I believe go against India’s interests.
You support whoever fits your narrative, attack the country you can’t stop talking about, and then wonder why people don’t take you seriously. Obsession isn’t activism 🤡
इनको अधिकार है सरकारी खर्च पर चार धाम यात्रा करने का…इन्हें अधिकार है प्रोटोकॉल के तहत लंबी गाड़ियों के काफ़िले के साथ चलने का…इन्हें सब अधिकार है बस एक छोटे कर्मचारी को नहीं है यह अधिकार कि वो AC भी चालू कर लें।
वैसे अधिकार का तो ठीक है लेकिन ज़िम्मेदारी जिसकी शपथ ली थी तो सुनें…प्रदेश में वन क्षेत्र का नुक़सान आपके कार्यकाल में ऐतिहासिक हुआ है और आप एक पेड़ लगाने को ही अपना काम समझते है वो अलग बात है कि इनका लगाया पेड़ इनके कार्यालय के बाहर कब का मुरझा के खत्म हो चुका है!
राजस्थान में भजनलाल सरकार के सहकारिता मंत्री के वायरल ऑडियो में मंत्री गौतम कुमार दक ने जिस तरह अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया,आज
सोशल मीडिया पर आम जन और मीडिया ने सार्वजनिक गरिमा और मर्यादा को ध्यान में रखते हुए वायरल ऑडियो के आपत्तिजनक हिस्से को संपादित (कट) कर साझा किया गया है मगर प्रत्येक व्यक्ति के मन में BJP के नेतृत्व से एक ही प्रश्न है कि क्या यही भारतीय जनता पार्टी के संस्कार हैं ?
NSUI ने आज अपने अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में NEET पेपर लीक मामले में विरोध प्रदर्शन किया। बढ़िया किया, सभी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशंस को ऐसे विरोध दर्ज कराने चाहिएं। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ रुकना ही चाहिए, पेपर लीक रुकना ही चाहिए।
पर आज NSUI ने जिन विनोद जाखड़ के नेतृत्व में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन किया, क्या ये विनोद जाखड़ वही हैं, जो कुछ साल पहले राजस्थान की एक यूनिवर्सिटी में एग्जाम्स में घोटाला करते हुए पकड़े गए थे ? यह खबर बताती है कि विनोद जाखड़ ने अपने रसूख का फायदा उठा कर अपनी जगह किसी और को अपना एग्जाम देने के लिए बैठा दिया। मामला पकड़ा गया। जाखड़ जी फरार हो गए, बाद में पकड़े गए।
कोई ज्ञानवर्धन करे ये वाले विनोद जाखड़ कौन हैं ?
DIPR के आउटडोर और पेपर प्रिंटिंग टेंडर मामले में CMO सख्त…फाइल मंगवाई गई CMO …होंगे सख्त फैसले!
CM भजनलाल शर्मा का सख्त रूख…अब जांच के बाद गिर सकती है गाज ! (सूत्र)
#Rajasthan
बाड़मेर में स्वास्थ्य सेवा में भले ही फिसड्डी हो…लेकिन CMHO बाड़मेर की मेहरबानी तो ग़ज़ब है…76 लाख के काम प्रचार प्रसार के लिए स्वास्तिक को…वाह सीएमएचओ साहेब इसके लिए तो आपको तुरंत प्रभाव से WHO से सम्मानित होना चाहिए।
वैसे प्रमाण पत्र तो दे दिया लेकिन एक बार CHC/PHC चैक करवा लीजिएगा!
अब बाड़मेर वालों कहना मत कि स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़े हो !
#Rajasthan
मोदी कौन होता है मेरा धर्म पूछने वाला?
CAA और NRC लागू नहीं होने देंगे।
कागज़ नहीं दिखाएंगे।
मनुस्मृति, संविधान नहीं है। — अभिजीत दिपके, कॉकरोच जनता पार्टी
स्कूलों में राजस्थानी भाषा पढ़ाने के लिए शिक्षक जो नियुक्त होंगे उनकी शैक्षणिक योग्यता क्या होगी??
और क्या वो शैक्षणिक योग्यता सम्पूर्ण राजस्थान के लोगों के पास होगी या सिर्फ़ क्षेत्र विशेष के लोगों के पास ही होगी??
आपको क्या लगता है कमेंट में बताए???