महिला, पुरुष और बच्चों, सब अपनी-अपनी सीट ख़ाली करो, हम कांवड़िए हैं, हमारे ऊपर मुख्यमंत्री और पुलिस अफ़सर, हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा करते हैं..🤐
मुसलमानों को इनसे अनुशासन सीखना चाहिए! 😂
होम वर्क पूरा ना होने पर टीचर ने बच्चे को थप्पड़ लगा दिया टीचर के डर से 6 साल के मासूम बच्चे की हार्ट अटै��� से मौत😢...
आंध्र प्रदेश के एक स्कूल में 6 वर्षीय छात्र प्रणय तेजा की कक्षा में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि होमवर्क पूरा न करने पर उसकी शिक्षिका अनुराधा ने उसे डांटा और थप्पड़ मारा। गाल पर थप्पड़ लगने के कुछ ही सेकंड बाद बच्चा अचानक शांत होकर गिर पड़ा। शिक्षकों ने उसे बचाने की कोशिश की और King George Hospital ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
शुरुआती तौर पर मौत को घबराहट और सदमे से जुड़ी हृदय संबंधी घटना बताया जा रहा है। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।
लेकिन सवाल सिर्फ यह नहीं है कि गलती किसकी थी?
अपने विचार इसपर जरूर दे ................
हमारी पीढ़ी भी स्कूल में मार खाती थी। हम भी मार खाये हैं......
किसी ने scale से मारा,
किसी ने कान खींचे,
किसी ने पूरी class के सामने खड़ा किया…
और हममें से ब��ुत लोग आज कहते हैं—
“हम भी तो मार खाकर बड़े हुए हैं, हमें क्या हुआ?”
लेकिन education का उद्देश्य यह नहीं होना चाहिए कि “बच्चा डरकर काम करे।”
उद्देश्य होना चाहिए—
“बच्चा समझकर सीखे।”
🧠 एक बच्चे का brain और nervous system adult जैसा नहीं होता।
डर, humiliation और excessive stress बच्चे के behaviour, learning, attention और emotional development पर असर डाल सकते हैं।
इसलिए discipline का मतलब physical punishment नहीं, बल्कि boundaries, communication और consistent consequences होना चाहिए।
❤️ और एक दूसरा सवाल—क्या हर स्कूल बच्चों की medical emergencies के लिए तैयार है?
क्या teachers को पता है कि बच्चा अचानक बेहोश हो जाए तो क्या करना है?
क्या स्कूल में first-aid, CPR training, emergency response protocol, ambulance access और nearby referral hospital की व���यवस्था है?
क्योंकि कभी-कभी बच्चा बाहर से बिल्कुल स्वस्थ दिखाई दे सकता है, फिर भी कोई underlying medical condition हो सकती है।
इसलिए किसी भी अचानक हुई मौत को केवल “डर गया था”, “heart attack था” या “थप्पड़ से हुआ” कहकर conclude करना medically सही नहीं है।
Investigation + medical examination + postmortem जरूरी है।
🚨 लेकिन एक बात पर कोई investigation नहीं चाहिए—
बच्चे को मारना education नहीं है।
गलती पर समझाइए, parents को involve कीजिए, जरूरत हो तो counsellor की मदद लीजिए- "लेकिन हाथ मत उठाइए।"
हमें ऐसी education चाहिए जहाँ बच्चा teacher से सवाल पूछने से न डरे, जहाँ गलती करना learning process का हिस्सा हो और जहाँ marks से ज्यादा mental health, physical safety और curiosity को महत्व मिले।
और सबसे जरूरी—
School सिर्फ पढ़ाने की जगह नहीं है।
School बच्चे के लिए दूसरा घर है।
अगर हम बच्चों को सुरक्षित स्कूल भी नहीं दे पाए, तो हमें खुद से पूछना होगा—
हम आखिर किस तरह की education system बना रहे हैं?
#StopCorporalPunishment
#ChildSafety
#EducationReform
#SchoolSafety
#ChildHealth
#MentalHealth
#Parenting
#Neuroscience
thebrainyogi
गिरिडीह झंडा मैदान में मांगों को लेकर धरना दे रहे छात्रों के साथ #JMM गुंडों द्वारा कथित मारपीट एवं अभद्रता निंदनीय है। लोकतांत्रिक आ��दोलन को दबाने के बजाय छात्रों की मांगें सुनी जाएं और प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करे।
#गिरिडीह #छात्रआंदोलन #JPSC #JSSC
गिरिडीह झंडा मैदान में मांगों को लेकर धरना दे रहे छात्रों के साथ #JMM गुंडों द्वारा कथित मारपीट एवं अभद्रता निंदनीय है। लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने के बजाय छात्रों की मांगें सुनी जाएं और प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करे।
#गिरि���ीह #छात्रआंदोलन #JPSC #JSSC
बिना उचित कानूनी प्रक्रिया नियुक्तियों व परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला अब सरकार के गले की फांस बन गया है। आंदोलन खत्म कराने के बाद हाईकोर्ट की रोक ने सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हेमंत जी, युवाओं से इतना बड़ा छल क्यों? जवाब दीजिए।
#JPSC#JSSC#HemantSoren#JH
मैं सिद्धि सिंह, विवेकानंद विद्या मंदिर सेक्टर 2 धुर्वा रांची की छात्रा हूं। मेरा कसूर मात्र इतना है कि स्कूल के द्वारा जबरन बढ़ाई जा रही फीस और सिले���स का विरोध मेरे पिता के द्वारा किया गया, और इसकी शिकायत उपायुक्त रांची और स्कूल से किया गया। बदले में आज चार महीना बीत जाने के बाद भी स्कूल ने मेरा एडमिशन नहीं लिया। जबकि मेरे द्वारा लगातार 2 - 3 महीने तक बकाया फीस अकाउंट में जमा करने के लिए स्कूल दौड़ लगाया गया, लेकिन मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के अलावा कोई निष्कर्ष नहीं निकला, इसकी शिकायत DC रांची, CBSE और अन्य सभी जगहों पर किया। लेकिन किसी ने भी ���ेरा साथ नहीं दिया, जबकि मेरे द्वारा DC रांची, DSE रांची, CBSE रांची के ही आदेशों का पालन किया जा रहा था।
अब मैं स्कूल नहीं जाती घर में ही रहती हूं, सिस्टम में बैठे लोगों ने मिलकर मेरा भविष्य खराब कर दिया। माननीय उच्च न्यायालय झारखंड से अनुरोध है कि मुझे इंसाफ दिलाया जाए।
��िद्धि सिंह
छात्रा, विवेकानंद विद्या मंदिर सेक्टर 2 धुर्वा रांची।
14 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे मेरे साथ आज पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की और बलपूर्वक रोकने की कोशिश की गई। मेरे साथ मौजूद साथियों के साथ भी पुलिस द्वारा मारपीट की गई।
कई दिनों से भूखा होने के बावजूद मैं अपने अधिकार और जनता की आवाज़ के लिए खड़ा हूँ। हमें इस तरह रोककर हमारी आवाज़ को दबाया नह��ं जा सकता।
#devendranathmahto
#JharkhandProtest
#JharkhandStudentProtest
जयपुर से गुंजा नए भारत का आह्वान! 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले अपने देश से वादा करना है कि फासीवादी ताकतों को उखाड़ फेंकना है!
एक धर्मनिरपेक्ष, समान और आज़ाद भारत के लिए!
सबसे पहले होम डिलीवरी होनी रहती है वो करते नहीं है और पैसा इन्हें होम डिलीवरी का चाहिए।
अब जोड़िए एक दिन 400 के लगभग गैस का आदान प्रदान होता है कितना लूटते है ए लोग।
जब होम डिलीवरी ��हीं तो पैसे होम डिलीवरी के क्यों?