राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव करवाने तथा राजस्थानी भाषा के नियमित विभाग की स्थापना की मांग को लेकर शुभम रेवाड की पिछले 7 दिनों से भूख हड़ताल जारी है। यह सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन की असंवेदनशीलता है कि उनकी मांगों को लेकर अभी तक कोई वार्ता तक नहीं की गई है।
चूंकि ये दोनों महत्वपूर्ण मांगें राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, अतः राजस्थान सरकार इस संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप कर युवा छात्र की मांगों का जल्द से जल्द सकारात्मक समाधान निकाले। @RajCMO
चेन्नई में फिजिकल परीक्षा देने पहुंचे सभी राजस्थानी छात्रों के लिए....
दक्षिणी भारत मीणा समाज (DBMS) चेन्नई के मीणा भाइयों द्वारा भोजन, रहने एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जो निःस्वार्थ सेवा की गई,
वह वास्तव में सराहनीय और प्रेरणादायक है।🙏
आरक्षण हटाओ ... !
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पहले कुछ प्रश्न है जिनके जवाब हम सब को पता होना चाहिए ... 👇
(1) संविधान में आरक्षण का प्रावधान क्यों किया गया ?
(2) आरक्षण का मूल उद्देश्य पूर्ण हो गया क्या ?
(3) हजारों सालों से दबे-कुचले, शोषित, पीड़ित, वंचित वर्गों के लोग क्या ? आज उनके जैसा सम्मान प्राप्त करने लगे है, जो आज आरक्षण हटाने की बात कर रहें ।
(4) बाबा साहब ने संविधान में आरक्षण को उचित स्थान देकर हमारे संविधान की आत्मा को अमर किया है, जिस दिन सभी लोग सभी प्रकार का न्याय समान रूप से प्राप्त कर लेंगे उस दिन आरक्षण स्वत: ही हट जाएगा ।
नोट - इस अतिसंवेदनशील मुद्दे को नहीं छेड़कर देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए अपने आप में सुधार की भावना लाइये, कुछ नवाचार करिए ताकि देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सके ।
आरक्षण हटाओ पार्टी बनी और 3 मिलियन लोग जुड़ गए,
बल्कि असलियत यह है आरक्षण नहीं होता तो देश के पिछड़े लोग कभी आगे नहीं आते। सीमित लोगों का वर्चस्व होता।
हां, आरक्षण में सुधार की जरूरत है वह यह है कि आबादी के अनुसार आरक्षण मिले।
आज शाम 7 बजे से 👇👇
#जितनी_जनसंख्या_उतना_आरक्षण
जितने भी ऑनलाइन एग्जाम होते हैं यानी CBT (Computer Based Test), उनमें पेपर लीक होना लगभग नामुमकिन है।
कैसे होगा? पेपर तो exam time पर ही system में land होता है।
CBT में पेपर लीक नहीं, बल्कि cheating होती है।
System का remote access कराकर बाहर बैठे solver gang से live paper solve कराया जाता है। आज maximum CBT exams इसी बीमारी का शिकार हैं।
आज लगभग सब कुछ outsourcing और private companies के भरोसे चल रहा है। ज़रूरत है कि सरकार का अपना exam infrastructure हो या फिर सिर्फ़ उन्हीं credible agencies like TCS से exam कराए जाएँ जिनका track record मजबूत हो।
साथ ही एक Centre Affiliation Board होना चाहिए जो पूरे देश के CBT centres का audit करे, standards तय करे और उनकी accountability सुनिश्चित करे।
Paper leak और CBT cheating दोनों अलग-अलग समस्याएँ हैं।
20 से ज़्यादा बच्चों की आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया है।
किसी घर का चिराग बुझ गया , किसी परिवार ने अपना सबसे होनहार बच्चा खो दिया… न जाने कितने घर आज भी उस दर्द के साथ जी रहे हैं।
और ऐसे समय में @nsitharaman ,Paper Leak के फायदे वाले बयान सुनना !
सिर्फ़ निंदनीय नहीं, बेहद असंवेदनशील भी है।
दु:खद और पूरी तरह असंवेदनशील बयान सत्ता पक्ष से आते रहे हैं।
ये सबसे असंवेदनशील बयानों में से एक है 💔
राजस्थान में NEET पेपर लीक के ख़िलाफ़ लड़ाई अब जयपुर के पत्रिका गेट पर शुरू हो चुकी है। इस आंदोलन के लिए पत्रिका गेट, राजस्थान का जंतर-मंतर बन चुका है।
NEET पेपर लीक घोटाले के ख़िलाफ़ अब लड़ाई पूरे देश में शुरू हो चुकी है। जब तक धर्मेंद्र प्रधान जी का इस्तीफ़ा नहीं होगा, लड़ाई जारी रहेगी। #jantrmantrpotest #neet @narendramodi@AshutoshRanka@Wangchuk66@dhruv_rathee@abhijeet_dipke@ManzuDinesh@ashokshera94
जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुए लाठीचार्ज की मैं कड़ी निंदा करता हूँ। तानाशाही पर आमादा मोदी सरकार यह समझ ले कि लाठियों के बल पर न सच को दबाया जा सकता है और न ही न्याय की गूंज को।
आज युवा भी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं क्योंकि एक समय पर युवाओं ने बड़ी संख्या में भाजपा के झूठे प्रचार के जाल में फंसकर श्री नरेन्द्र मोदी के पक्ष में वोट किया परन्तु प्रधानमंत्री मोदी ने इनकी आवाज को दबाया है।
अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे युवाओं की आवाज़ को कुचलना लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है। यह देश बाबासाहेब के संविधान और पंडित नेहरू के लोकतांत्रिक मूल्यों से चलेगा, न कि भाजपा की तानाशाही से!
Reality about Genz
ये जो नई Generation है ना… इस पर आप अपनी पुरानी रूढ़िवादी सोच नहीं थोप सकते ।।
कितनी भी कोशिश कर लो, हर बात पर धर्म, आस्था और भावनाओं में उलझाकर इन्हें नहीं उलझा सकोगे ।
ये सवाल पूछेगी, हर बात पे इनको logic चाहिए और हर बात का प्रमाण चाहिये ।
ये अपने माँ बाप के ग़लत होने पर मुंह पे सवाल कर देते है ।
genz अंधभक्ति करते ही नहीं चाहे सामने माँ बाप हो ।
इनकी बातें आपको कितनी भी बुरी लगें, इन्हें इससे ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता।
इन्हें अच्छे बनने का शौक नहीं है किसी के सामने ।।
आने वाला देश इन्हीं का है।
स्वीकार कीजिए… या मत कीजिए।
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
देश की राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हजारों छात्रों पर पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्ण लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोले दागना लोकतांत्रिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है।सरकार के इशारे पर किया गया यह कृत्य बेहद निंदनीय है।
पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर सरकार को छात्रों की आवाज़ को बल प्रयोग दबाने के बजाय उनकी बात सुनकर ठोस समाधान निकालना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी लगातार छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की माँग उठाते रहे हैं।
अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह तानाशाही करने के बजाय छात्रों से संवाद कर उनके हित में कदम उठाए।
इस समय देश की परीक्षा प्रणालियों में आमूलचूल सुरक्षात्मक बदलाव लाने की पहल करनी चाहिए।
@RahulGandhi@INCIndia
#DharmendraPradhanResign #संसद_मार्च
#NirmalChoudhary
दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज करना और आँसू गैस के गोले दागना पूरी तरह ग़लत है। मैं इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ।
पेपर लीक जैसे बेहद गंभीर मुद्दे पर सरकार को छात्रों की माँगों को गंभीरता से सुनना चाहिए और उनसे संवाद करना चाहिए, न कि बल प्रयोग का रास्ता अपनाना चाहिए।
छात्रों की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए।
सरकार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा लेना चाहिए और परीक्षाओं में हो रही धांधली को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी ने भी छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर कई बार सरकार को घेरा है।
श्री सोनम वांगचुक जी पिछले 19 दिनों से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर हैं। उनके गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए हम उनसे आग्रह करते हैं कि वे अपना अनशन ख़त्म कर अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष आदरणीय श्री राहुल गांधी जी लगातार छात्रों की आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा और छात्रों को हर हाल में न्याय मिलकर रहेगा।
भाजपा सरकार अब छात्रों के सवालों से बच नहीं सकती। करोड़ों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली इस विफल शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करनी पड़ेगी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा।
@RahulGandhi@Wangchuk66
#NirmalChoudhary
पिछले 19 दिन से सोनम वांगचुक जी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर अनशन पर बैठे हुए हैं, जिससे उनके स्वास्थ पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। मैं उनसे आग्रह करता हूँ कि वे अपना अनशन समाप्त करें।
पेपरलीक और विभिन्न अनियमितताओं के मामलों के कारण छात्रों और उनके परिवारों पर जो आपबीती है उसने सभी को झकझोर दिया है।
@RahulGandhi जी और हमारी पार्टी का मानना है — युवा देश का भविष्य हैं। उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। छात्रों को न्याय मिलना चाहिए।
भाजपा सरकार को इस मुद्दे पर जवाब देना होगा और यह सिर्फ भावनात्मक विषय नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है।
जब एक छोटी सी बच्ची कहे कि "स्कूल में शिक्षक लगाइए", तो ये सिर्फ़ एक मासूम की गुहार नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था की दर्दभरी पीड़ा है।
जयपुर से लेकर जालोर और बाड़मेर तक मनमाने व दुर्भावना से किए गए तबादलों ने सरकारी स्कूलों का ढांचा हिला दिया। हालात इतने भयावह हैं कि बच्चों को किताबें छोड़कर अपने ही स्कूल में शिक्षा व शिक्षक मांगने के लिए धरना देना पड़ रहा है।
इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि जिन नन्हें हाथों में किताबें होनी चाहिए, वे आज अपने भविष्य की लड़ाई के लिए तख्तियां लेकर बैठने को मजबूर हैं।