रुद्रप्रयाग से चीन के MMA रिंग तक - मिलिए भारत के निडर फाइटर अंगद बिष्ट से!
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के एक छोटे से गांव के एक साधारण युवक ने वो कर दिखाया है जिसके बारे में बहुत से लोग सपने ही देख सकते हैं — हम बात कर रहे हैं अंगद बिष्ट की, जिन्होंने चीन में आयोजित दुनिया के सबसे खतरनाक खेलों में से एक — MMA (मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स) में भारत को गौरवान्वित किया है!
कभी अपने गांव की धूल भरी गलियों में दौड़ने वाले अंगद आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा रहे हैं। चीनी धरती पर फ्लाईवेट कैटेगरी के मैच में उन्होंने फिलीपींस के जॉन अल्मांजा को टेक्निकल नॉकआउट (TKO) से हराया जिससे वे सेमीफाइनल में पहुंच गए!
यह सिर्फ़ जीत नहीं है यह एक योद्धा का उदय है, जो दर्द को ताकत में और सपनों को हकीकत में बदल देता है।
उत्तराखंड की पहाड़ियों में एक साधारण किसान के घर जन्मे अंगद ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन विदेशी धरती पर भारतीय ध्वज फहराएंगे।
उन्होंने देहरादून से अपनी यात्रा शुरू की, अथक प्रशिक्षण लिया और अब अपना खुद का MMA प्रशिक्षण केंद्र चलाते हैं, जिससे सैकड़ों युवाओं को प्रेरणा मिलती है
अगला मुकाबला? कोरिया के दिग्गज पहलवान चाए डोंग से कड़ा मुकाबला। लेकिन अंगद का जज्बा साफ झलकता है — वह अपने रास्ते में आने वाली किसी भी चुनौती के लिए तैयार हैं
उनकी यात्रा हर सपने देखने वाले के लिए एक शानदार उदाहरण है — आपकी जड़ें छोटी हो सकती हैं, लेकिन आपके सपने दुनिया को जीत सकते हैं
भारत के MMA हीरो अंगद बिष्ट को सलाम....Read News
>नाम रंजीत कुमार हिमांशु
>पद सन 2004 से बोकारो में चपरासी (संविदा कर्मी)
>जुर्म 4 साल पहले बचे हुए बिस्किट और चाय की पत्ती घर ले गए
>सजा नौकरी से बर्खास्तगी
>आरोप लगाया गया कि सरकारी सामान निजी इस्तेमाल के लिए लिया गया
>हिमांशु ने बाद में सामान वापस भी कर दिया था
>अब हाईकोर्ट ने नौकरी बहाल की है
>इतने बड़े अपराध के लिए फाँसी से कम की सजा नहीं होनी चाहिए
>जिस देश में अधिकारी 100 करोड़ का घोटाला करते हों वहाँ ये बिस्किट चुरा रहा
>क्या इसको इतनी छोटी चोरी करते हुए शर्म नहीं आयी
(चोरी चोरी होती है चाहे छोटी हो या बड़ी, काश ! बड़े चोरों को भी नौकरी से निकालना इतना आसान होता)
A scene from movie Citizen Vigilante that was released twelce days ago, and it's banned from screening in all of Europe.
Hammer plays an expat who turns vigilante against migrant rapists and corrupt officials after a girl's brutal attack, inspired by a real 2016 Hamburg case.
32 साल बाद रामपुर तिराहा कांड में फर्जी हथियार बरामदगी मामले में तीन पूर्व पुलिसकर्मी दोषी
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के सबसे चर्चित और संवेदनशील रामपुर तिराहा कांड से जुड़े फर्जी हथियार बरामदगी मामले में 32 साल बाद न्याय की दिशा में अहम फैसला आया है। मुजफ्फरनगर की विशेष सीबीआई अदालत ने मंगलवार को तत्कालीन छपार थानाध्यक्ष (एसएचओ) बृजकिशोर, कांस्टेबल उमेश चंद और अनिल कुमार को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को डेढ़-डेढ़ वर्ष के कठोर कारावास और 21-21 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
विशेष सीबीआई अदालत के पीठासीन अधिकारी डी.के. फौजदार ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
यह मामला 1-2 अक्टूबर 1994 की उस ऐतिहासिक और दर्दनाक घटना से जुड़ा है, जब अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर हजारों आंदोलनकारी दिल्ली के राजघाट की ओर कूच कर रहे थे। मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़े और गोलीबारी की, जिसमें कई आंदोलनकारियों की मौत हुई, जबकि अनेक लोग घायल हुए। इस घटना के बाद आंदोलनकारी महिलाओं के साथ दुष्कर्म और छेड़छाड़ के गंभीर आरोप भी सामने आए थे।
घटना के बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई को जायज़ ठहराने के लिए दावा किया कि आंदोलनकारियों के पास से अवैध तमंचे, कारतूस और अन्य हथियार बरामद हुए थे तथा उन्होंने पुलिस पर फायरिंग की थी। बाद की जांच में यह कहानी फर्जी साबित हुई।
ऐसे लोगों पर आजीवन प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
मसूरी में हरियाणा के पर्यटकों का स्थानीय लोगों से मामूली बात पर विवाद हो गया
देखते ही देखते मारपीट की नौबत आ गई
एक पर्यटक प्लास्टिक की क्रेट से स्थानीय लोगों पर हमला करता रहा
महिला पर भी उसने हमला किया
पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर बीएनएसएस की धारा 170 के तहत कार्रवाई की है।
#mussoorie
#uttarakhand
#tourists
जिस चाँदनी चौक जिले ने बिल्डर ख़ालिद क़ुरैशी को मीडिया प्रभारी बनाया,उसी ख़ालिद कुरैशी ने हिंदुओं की छाती पर चढ़कर नाचने लगा।
जो गेट पिछले 100 साल से कभी मंदिर की तरफ़ नहीं खुला था,अब उस मुस्लिम मोहल्ले के इलाक़े का गेट गुज्जर समुदाय के मोहल्ले और मंदिरों की तरफ़ खोलने की तैयारी हो रही है।
गुज्जर समुदाय एक हुआ बोले “यहाँ तांडव होगा अगर गेट इस तरह खुल गया तो”
@CPDelhi@HMOIndia@PMOIndia@RSSorg@VHPDigital@MCD_Delhi@CMODelhi@hdmalhotra
उत्तराखंड के विश्वविख्यात निशानेबाज दिवंगत जसपाल राणा के निधन के महज 16 दिन बाद उनकी माता श्यामा देवी राणा का 78 वर्ष की आयु में नई दिल्ली में निधन हो गया।
मार्मिक संयोग यह रहा कि जिस दिन उन्होंने अंतिम सांस ली, उसी दिन उनके बेटे जसपाल राणा का जन्मदिन भी था। उनके निधन से खेल जगत और उत्तराखंड में शोक की लहर है।
प्रिय हिंदुओं,
समय निकाल कर यह फिल्म #CitizenVigilante अवश्य देखिए.
प्लीज.. आपको ये फिल्म सिर्फ "मनोरंजन" के लिए देखना है अत: पॉपकॉर्न ले कर देखियेगा. इस फिल्म से कोई सीख वगैरह नहीं लेना है!!
इस फिल्म की सभी घटनाएं काल्पनिक हैं । ऐसा ना कभी हुआ है और कभी आपके कुटुंब, पड़ोस में ऐसा कुछ कभी हो ही नहीं सकता है, अत: आपको कभी ऐसा कुछ करने के बारे में नहीं सोचना.
शुभ कामना.. 🥹
@Anshu3848@ANI तेया अकाल तख्त 'उड़ता पंजाब' और 'इसाइस्तान बनता पंजाब' पर चूं क्यों नहीं किया आजतक? क्या इनका लक्ष्य झूमता पंजाब और इसाई बनता पंजाब ही है?
🚨 SHOCKER! A 55-yr-old Jumai Ali Sheikh raped a 7-yr-old girl in Kalyan, Maharashtra on June 24.
Just days earlier, two older Muslim men gang-raped a 16-yr-old in the same area. Locals are furious & demanding justice.
राममंदिर में SIT जांच हो गई, चंपत राय/अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया, 8 लोगों पर FIR हो गई!
लेकिन सबसे अहम सवाल:
गोपाल राव, जो ट्रस्ट के "बाप जी" कहे जाते हैं, वो साफ साफ बच कैसे निकले?
ये ना ट्रस्ट के सदस्य हैं, ना उत्तरप्रदेश के रहने वाले!
कर्नाटक से हैं, RSS के दत्तात्रेय होसबोले के गांव से हैं!
बता दें कि ये original राममंदिर ट्रस्ट के सदस्य थे भी नहीं! फिर ये इतने अहम रोल पर आए कैसे?
और इनको क्यों बचा लिया गया??