@Ramsuryavanshir इसी प्रकार से तुम मीठे वचन बोलकर लोगो को गुमराह करते हो। परन्तु मैं तुम्हारी इस प्रवृति से अवगत हूं, मुझपर तुम्हारे शब्दबाण नहीं चलने वाले पुत्र।
@l0rdshen यही तो मेरी महिमा है।
संसार की दृष्टि में मैने बुरी बनकर भी विश्व का कल्याण ही किया है, परन्तु विकृत प्रवृति वाले मनुष्यों ने मेरी इस महानता की उपेक्षा कर मुझे केवल अपशब्द ही दिए हैं।
@LakshmanaPrince भरत तो बालक है, राम की बातों में बहक गया है।
और तुम्हे कदाचित यह ज्ञात नहीं पुत्र, परन्तु तुम भी उन्हीं मिष्ठ वचनों के जाल में बंधे हो।
राम-सीता का मोह त्याग दो, उस वनचारी के साथ कंद-मूल का सेवन करने से अच्छा है कि तुम अयोध्या लौट आओ, और अपने भ्राता के साथ प्रजा की सेवा करो।