सुभाष चंद्रा की कंपनियों पर कुल 22,000 करोड़ की देनदारी थी. जिसमें बैंक और वित्तीय संस्थानों समीर कई क्रेडिटर्स का पैसा है.
सुभाष चंद्रा ने अपनी इन कंपनियों को दिवाला घोषित कर दिया और NCLT में सेटलमेंट के लिए अप्लाई कर दिया.
NCLT ने 22,000 करोड़ की जगह 6.5 करोड़ के भुगतान की मंजूरी पास कर दी, यानी हर 100 रुपए पर 3 पैसे का भुगतान.
NCLT : National Company Law Tribunal है. सरल भाषा में समझो, कोई कंपनी अगर अपना कर्ज़ भरने में असमर्थ है तो इस NCLT में जाकर खुद को दिवालिया घोषित करती है.
उद्योगपतियों को राहत देने के लिए NCLT का गठन किया गया है. लेकिन अगर गरीब किसान अगर कर्ज नही चुका पाए तो जमीन कुर्क, ट्रेक्टर जब्त और घर तक नीलाम कर दिया जाता है.
भारत की जनसंख्या 1772 में अखंड भारत की जनसंख्या 18-20 करोड़ थी. इसी साल ब्रिटिश हुकूमत ने बंगाल में जिले बनाए और हर जिले में भूमि राजस्व वसूलने के लिए डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर नियुक्त किया.
यही डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के शासन व्यवस्था की नींव बने.
1855 में भारत की प्रथम आदिवासी क्रांति के समय कुल 1,50,000 के करीब ब्रिटिश भारत में थे. इनमें 45,000 यूरोपीय सैनिक थे.
इतने बड़े भारत को अपने नियंत्रण में रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा जिलों को बनाना शुरू किया, 230 के आसपास जिलों को बनाया. हर जिले में एक ब्रिटिश मूल का कलेक्टर बनाया जाता.
ब्रिटिश हुकूमत ने भारत में बनाई हर संस्था और संगठन का मुखिया किसी न किसी अंग्रेज को बनाते. 1931 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में 1,10,000 भारतीय सिपाही थे. लेकिन बड़े अधिकारी अंग्रेज होते थे.
1947 के बाद अंग्रेजों का स्थान सवर्ण जातियों ने ले लिया है. उनकी आबादी अंग्रेजों की तरह है लेकिन बड़े पदों पर विराजमान होकर बहुसंख्यक बहुजन समाज पर वर्चस्व बनाए हुए हैं.
पंजाब विधानसभा ने आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे सरकार के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर लाने वाला बिल सर्वसम्मति से पास कर दिया.
ग्रुप C और D के 28,000 कर्मचारियों को नए कानून का सीधा लाभ मिलेगा. अब इन कर्मचारियों को ठेकेदार एजेंसी के जरिए काम नही करना होगा.
ठेकेदार एजेंसियों को मिलने वाला 15-22% कमिशन अब सीधे इन 28,000 कर्मचारियों के वेतन में जोड़ कर दिया जाएगा. इस कानून इतना ही मतलब है कर्मचारी और सरकार के बीच ठेकेदार एजेंसी को हटा दिया गया है, यह पक्की सरकारी नौकरी नही है.
सुनने में सब अच्छा लग रहा है. सवाल है क्या इन आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में OBC SC ST आरक्षण है या नही ? पंजाब में 30% से ज्यादा SC आबादी है. इसके बावजूद नए बिल में आरक्षण का प्रावधान नही किया गया. आरक्षण नही देंगे, केवल डॉ अंबेडकर की फ़ोटो और मूर्ति बनाकर वोट लेंगे.
सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम ने चार जजों को हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है.
1. जस्टिस एमसी त्रिपाठी - बॉम्बे हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया है.
2. जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा - पंजाब हरियाणा हाइकोर्ट.
3. जस्टिस आर.वी घुगे - कलकत्ता हाईकोर्ट.
4. जेवी कमेश्वरवर राव - पटना हाईकोर्ट.
इन जजों में एक भी OBC SC ST का नाम नही है. वर्तमान में किसी हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस OBC SC ST समाज से नही. दुख इस बात का कोलेजियम के इन नियुक्ति पर किसी भी राजनीतिक दल ने विरोध नही जताया है. विरोध केवल सोशल मीडिया पर किया जा रहा है.
फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर लगाम लगाओ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस सौमित्र दयाल और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की बेंच ने यूपी में फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि गड़बड़ी पकड़ने के लिए सरकार QR कोड वाला सॉफ्टवेयर डेवलप करे।
मेरा मानना है कि इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर संज्ञान में लाना चाहिए। फर्जी जाति प्रमाण पत्रों की आड़ में देश में अनगिनत लोगों ने SC-ST समाज के अधिकारों की हकमारी कर रखी है। कई लोग तो फर्जी प्रमाण पत्रों के दम पर MP-MLA तक बन गए हैं। कोर्ट में केस करने पर भी मामला इतने दिनों तक लटका रहता है कि तब तक उन सांसदों का कार्यकाल ही पूरा हो जाता है। ऐसे में इस धांधली पर लगाम लगाना बेहद ज़रूरी हो गया है।
अगर अब भी इस गंभीर मुद्दे पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो शोषितों और वंचितों के संवैधानिक अधिकार पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। सरकार को कोर्ट के इस सुझाव पर तुरंत अमल करते हुए फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
दिल दहला देने वाली घटना!
राजस्थान के श्रीगंगानगर की यह घटना किसी भी व्यक्ति की रूह कंपा देगी। महज़ 13 साल की एक बच्ची एक ऑटो में बैठी थी लेकिन ऑटोवाले ने उसे एक होटल में बेच दिया गया।
उस बच्ची के साथ लगातार 6 दिनों तक 30 दरिंदों ने गैंगरेप को अंजाम दिया। बंद कमरों के पीछे जो कुछ हुआ, वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला है। होटल मालिक ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर बच्ची को अलग-अलग होटलों में ले जाया गया और महज़ 6 दिनों के अंदर 30 से ज़्यादा लोगों ने उसके साथ दरिंदगी की। जब वह छोटी सी बच्ची दर्द से तड़पती और रोती थी, तो तरस खाने के बजाय ये लोग उसे शराब पिलाते थे।
सबसे शर्मनाक बात यह है कि मुख्यधारा का मीडिया भी इस मामले पर लगभग मूक-बधिर बना हुआ है। सरकार चाहे किसी भी दल की हो, लेकिन जब व्यवस्था और मीडिया सियासी नफ़े-नुकसान को देखकर अपनी आवाज़ तय करने लगें, तो समझ जाइए कि सिस्टम अंदर से खोखला हो चुका है। पुलिस ने अब तक 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन इस संगठित अपराध में शामिल हर एक चेहरे को बेनकाब कर फांसी के फंदे तक पहुँचाना होगा।
महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है केतन अग्रवाल हत्याकांड का केस फायर ब्रांड पब्लिक प्रोसिक्यूटर उज्ज्वल निकम लड़ेंगे.
केतन अग्रवाल का परिवार भी चाहता था सिया गोयल को मौत की सज़ा मिले. उज्जवल निकम से बड़ा सरकारी वकील कोई हो नही सकता.
1993 में जब मुंबई में सीरियल ब्लास्ट हुआ था तब आरोपियों के खिलाफ केस लड़ने के लिए कोई सरकारी वकील डर के मारे तैयार नही हो रहा था.
महाराष्ट्र सरकार ने तब जलगांव के जिले कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले मामूली वकील उज्ज्वल निकम पर भरोसा जताकर, मुंबई बुलाया गया. उज्जवल निकम को जेड प्लस सुरक्षा दी गयी.
सीरियल ब्लास्ट के बड़े बड़े आरोपियों के खिलाफ उज्जवल निकम ने केस लड़ा, ज्यादातर को मौत की सज़ा दिलाई. यहां तक संजय दत्त को भी आर्म्स एक्ट में 6 साल की कठोर सजा उज्जवल निकम के कारण मिली. आज भी उज्जवल निकम को 24×7 जेड सुरक्षा है.
अरुण दिल्ली के सुल्तानपुरी में रहते थे. वो दिहाड़ी मजदूर थे.
600 रुपए की दिहाड़ी पर उन्हें काम के लिए बुलाया गया था.
एक अन्य मजदूर सेप्टिक टैंक के अंदर बेहोश हो गया. अरुण उसे बचाने के लिए अंदर गए, लेकिन ज़हरीली गैस की चपेट में आने से उनकी भी मौत हो गयी.
अरुण बचाने तीसरा मजदूर गया तो उसकी भी मौत हो गयी. देश में मैन्युअल स्केवेनजिंग कानूनन प्रतिबंधित है.
ठेकेदारों ने अरुण और अन्य दो मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सेप्टिक टैंक में उतारा. 600 रुपए के लिए इंसान गु साफ करने के लिए मजबूर हैं.
सरकार के पास एक पायलट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए 500 करोड़ है लेकिन मजदूरों को उपकरण देने के लिए पैसा नही है. मृतकों के परिजनों को 10-10 करोड़ रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए.
अजित आगरकर बहुत बुरा गेंदबाज था. टीम में कभी परमानेंट खिलाड़ी नही था.
मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के सिफारिश पर BCCI ने अजित आगरकर को चीफ सेलेक्टर बना दिया.
एक विजेता टीम जो पराजित टीम में बदल दिया इस आदमी ने.
अजित आगरकर ने ही सूर्यकुमार यादव को कप्तानी और टीम से हटाया.
एक चीफ सेलेक्टर को BCCI साल के 3,00,00,000 रुपए देती है. हार जिम्मेदारी आगरकर की है. चीफ सेलेक्टर बदला जाए.
इस हैवान को फांसी दो।
नई दिल्ली में ये दरिंदा बबलू सिंह ने गुब्बारा बेचनी वाली एक मासूम बच्ची का रेप करके उसकी जघन्य हत्या कर दी।
बच्ची का परिवार फुटपाथ पर रहता था। गुब्बारा बेचकर परिवार का पेट पालती थी। इस हैवान ने उसे तड़पा तड़पाकर मार डाला। यह बेहद असहनीय है। भयावह!
2018 में विशेषाधिकार प्राप्त जाति का आदमी अपनी महिला मित्र के साथ अपनी गाड़ी में बैठा था,
गलती से लखनऊ पुलिस उसका एनकाउंटर कर दिया.
पूरे देश में हो हल्ला मच गया. मैनस्ट्रीम मीडिया के न्यूज़ एंकरों ने न्यूज़ रूम में आग लगा दी.
हर पार्टी का नेता मातम मनाने लगा. यहां तक OBC SC ST नेतृत्व वाले दल के नेता भी पीड़ित परिवार के लिए 1,00,00,000 मुआवजा और A क्लास सरकारी नौकरी की मांग करने लगे.
सरकार ने तत्काल एक करोड़ रुपए सहायता राशि जारी की और मृतक की पत्नी को म्युनिसिपल कारपोरेशन में OSD की नौकरी दी.
सवाल है क्या आज तक इस तरह का न्याय किसी OBC SC या आदिवासी के साथ हुआ है ? जवाब नही देने वाले अगले जन्म में चूहा बनेंगे.
दरिंदा पुजारी।
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में अमित गोस्वामी बाबा ने पूजा-पाठ और झाड़-फूंक के नाम पर एक लड़की का रेप किया।
ढोंगी बाबा ने अच्छा रिश्ता और नौकरी का सपना दिखाकर 24 साल की लड़की को अपने झांसे में लिया था।
आरोपी ने युवती की मां को कुछ चावल देकर कहा कि तुम हनुमान मंदिर जाओ और वहां 151 चावल के दाने चढ़ाकर आओ। मां को गायब देखकर बाबा ने बहाने से लड़की की बहन को भी कमरे से बाहर भेज दिया। इसके बाद उसने लड़की के साथ दुष्कर्म किया और फिर मौका पाते ही फरार हो गया। बाबा प्रयागराज का रहने वाला है।
इन हवस के पुजारियों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। सरकारों को इसे अत्यंत गंभीरता से लेना चाहिए। धर्म के नाम पर भोली-भाली लड़कियों एवं महिलाओं को अपने जाल में फंसाते हैं और फिर उनका यौन शोषण करते हैं। चारों ओर पुजारियों के भेष में आसाराम घूम रहे हैं।
अमेरिका-ईरान के बीच डील टूट चुकी है. ईरानी सेना IRGC ने होमरूज़ खाड़ी बंद करने का एलान किया.
IRGC ने धमकी दी उसके इजाजत के बिना होमरूज़ खाड़ी से कोई जहाज पास नही होगा.
डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा की तरह ईरान को धमकी दी. कहा, ईरान को बर्बाद कर दिया जाएगा.
इजराइल ने लेबनान पर हमला तेज कर दिया है. बेंजामिन नेतन्याहू ने अभी अभी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, इजराइल को अकेला भी अगर अपनी सुरक्षा के लिए लड़ना पड़े तो लड़ेंगे.
लगता है तेल युद्ध में आधी दुनिया खत्म हो जाएगी. बाद में पानी के लिए युद्ध में बची खुची दुनिया खत्म हो जाएगी.
कनाडा के टोरंटो शहर में फीफा वर्ल्डकप की दूसरी ओपनिंग सेरेमनी में डाइवर्सिटी की झलक साफ दिखी.
फुटबॉल स्टेडियम में मंच पर परफॉर्म करने वाले तीनों कलाकार मूल रूप से कनाडा के नही थे, बल्कि अलग अलग संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे.
Nora Fatehi : कैनेडियन सिंगर मोरक्को मूल की हैं.
Vegedream : फ्रांस के गायक का जन्म भले फ्रांस में हुआ है लेकिन इनका परिवार मूल रूप से कोट डी'आइवरी का है.
Sanjoy : बांग्लादेशी मूल के अमेरिकी डीजे और म्यूजिक प्रोड्यूसर हैं.
भारत में डाइवर्सिटी की बात करना गुनाह है. डाइवर्सिटी की बात करो तो टैलेंट की बहस बीच में ला दिया जाता है. यह कौन सा टैलेंट है UPSC में लिखित परीक्षा में कम नंबर या इंटरव्यू में ज्यादा.
असल में सवर्णों ने हर क्षेत्र में घेरा बना रखा है, अपनी जाति बिरादरी के अलावा आने जाति बिरादरी को अंदर आने से रोकते हैं. यह उनका टैलेंट नही, अघोषित APARTHEID है.
140 करोड़ की आबादी में हम 11 फुटबॉलर भी पैदा नही कर सके जो FIFA WORLD CUP 2026 में खेल रहे होतें.
भारत फुटबॉल खेलता है, टीम भी है. भारत ने 2026 के फुटबॉल वर्ल्ड कप में क्वालिफाई करने की कोशिश की,
लेकिन आप लोगों को जानकर हैरानी होगी भारत अफगानिस्तान से 1-2 से हार गया. फिर कुवैत से 1-2 से हार गया.
अगर भारत कुवैत को हरा देता तो अगले राउंड में पहुंच जाता. लेकिन अगले राउंड में पहुंचना और वर्ल्ड कप में पहुंचना दोनों अलग बात है, कारण अगले चरण में Japan, Australia, South Korea और Iran जैसी मजबूत टीमों से मुकाबला करना पड़ता.